कृष्ण गोपाल सिन्हा की कहानी - संकल्प

SHARE:

एक लम्बे अरसे के बाद राघव ने रंजना को देखा तो खुशी के साथ उसके मन में कुछ कुतूहल भी हो रहा था. दस साल पहले के मुकाबले रंजना के रंग रूप में ...

एक लम्बे अरसे के बाद राघव ने रंजना को देखा तो खुशी के साथ उसके मन में कुछ कुतूहल भी हो रहा था. दस साल पहले के मुकाबले रंजना के रंग रूप में बदलाव तो आया था पर अब वह ज़्यादा भद्र और परिपक्व लग रही थी. किसी की पूरी ज़िंदगी का पांचवा, छठा या सातवां हिस्सा होता है दस साल. इस दस साल में कब और कैसे रंजना के गले में रुद्राक्ष की माला को जगह मिल गया राघव को समझ में नहीं आ रहा था.

राघव के ज़िंदगी की अब तक के सफ़र में उसका बेहद कष्टपूर्ण बचपन और संघर्षमय युवावस्था शामिल था. वह जब चार साल का था तभी उसके सर से मां बाप का साया उठ चुका था. अपने माँ-बाप का वह इकलौती संतान थी जिसकी देख-भाल और पालन पोषण उसके चाचा ने की थी. उसकी पढ़ाई लिखाई भी उन्ही की देखरेख में हुयी थी. बालक और युवा राघव सचमुच बहुत ही सीधा, सरल, बुद्धिमान और होनहार था और इस बात से उसके चाचा उसकी ओर विशेष ध्यान देते थे. राघव की पढ़ाई पूरी हुयी तो चाचा जी ने उसके घर बसाने की सोची. एक संपन्न परिवार की सुन्दर और पढ़ी लिखी लड़की अनुराधा से शादी भी तय कर दी. सबको लग रहा था कि अब खुशियों की दुनिया के दरवाजे उसके लिए खुलने लगे है . लेकिन नियति को कुछ और ही मंज़ूर था. एक सड़क दुर्घटना में राघव के चाचा जी की मौत हो गयी. राघव ने एक बार अपने पिता को तब खोया था जब उसे पूरा होश नहीं था और अब दूसरी बार अपने पिता तुल्य चाचा को खोने का आघात लगा था.

कुछ समय बाद कुछ रिश्तेदारों और दोस्तों के बहुत समझाने पर बड़ी मुश्किल से बड़े बेमन से वह शादी के लिए सहमत हुआ पर उससे पहले वह अनुराधा से एक बार मिलना और बातें करना चाहता था. वह अनुराधा से मिला तो उसकी बातें सुनकर वह अवाक रह गया. अनुराधा ने उसे बताया कि वह तो खुद शादी के खिलाफ थी पर इसके लिए माँ बाप को मना नहीं पायी थी. अपनी सोच,अपने सपने, अपने लाइफ स्टाइल के बारे में बताते हुए यह काबुल करने में फख्र महसूस हो रहा था कि वह आज़ाद ख्यालों की है और कही एक जगह किसी एक से बंध कर वह नहीं जीना चाहती. उसे यह कहने और बताने में भी शर्म नहीं महसूस नहीं हुयी कि उसने तो पहले से ही कुछ रिश्ते बना और तोड़ भी चुकी है.

अनुराधा से मिलने के बाद राघव ईश्वर को इस बात के लिए धन्यवाद दे रहा था कि वह एक बहुत बड़ी मुसीबत से बच गया और उसकी ज़िंदगी बर्बाद होने से बच गया. किसी और से वह यह सब बिना बताये यह तय कर लिया कि अब शादी करने का कोई सवाल ही नहीं है. इस निर्णय के बाद वह अपनी नौकरी और दोस्तों में इस क़दर राम गया कि कभी शादी की बात सोची ही नहीं और समय अपनी रफ़्तार से निकलता रहा. समय के कितने बड़े अंतराल के बाद वह रंजना के संपर्क में आया, उसने कभी हिसाब नहीं लगाया और अपने वर्तमान को उसने ईश्वर की ही मर्जी मानने लगा.

दस साल पहले तक राघव और रंजना के बीच एक साथ काम करने का रिश्ता होने के अलावा एक दूसरे को अच्छी तरह समझने और एक दूसरे का ध्यान रखने का सम्बन्ध था. रंजना अपने से उम्र में काफी बड़े राघव की बहुत इज्ज़त करती थी और राघव भी उसकी और उसके परिवार की पूरी खबर रखते थे. रंजना और राघव में एक और रिश्ता भी था जिसे उनके अलावा कोई भी नहीं जानता था दरअसल, दोनों ने एक दूसरे की ज़िंदगी में कोई दखल न देने का फैसला किया था फिर भी अपनी हर बात को एक दूसरे से बाँट लेने में संकोच भी नहीं करते थे. राघव ने अपनी तरफ से अपने रिश्तों के बारे में पाबंदियां तय की थी और रंजना को बताये भी थे पर इन मामलों में रंजना गंभीर और संजीदा रहती. दरअसल, दोनों ने ही अपने बीच की नजदीकियों और दूरियों के अपने अपने पैमाने तय कर लिए थे.

रंजना कालेज के दिनों में पढ़ाई में तेज और अपनी फ्रेंड सर्किल में एक्टिव और शोख मानी जाती थी. फैकल्टी के लोग उसके ऊपर ज़्यादा ध्यान देते और वह जब भी किसी को ज़रूरत पड़ती पढ़ाई में उसकी मदद को तैयार रहती. सभी उसकी इज्ज़त करते थे. कुछ लड़के मन ही मन उसे पसंद करने और चाहने भी लगे थे पर वे इसका रंजना से इज़हार करने की हिम्मत नहीं कर सकते थे, रंजना के मन में इमरान और अमरदीप के लिए अलग जगह थी और वह इनका काफी इज्ज़त भी करती थी पर इस बात का कभी भी उन दोनों से या किसी और से कभी ज़िक्र तक नहीं किया था .इमरान और अमरदीप दोनों से ही रंजना की अच्छी दोस्ती हो गयी थी जो बराबर कायम रही और वे दोनों ही रंजना के परिवार के सदस्य की तरह अपने रिश्ते को निभाने में कामयाब भी रहे. इमरान के साथ रंजना का पूरा परिवार ईद की खुशियाँ मनाता तो अमरदीप के साथ गुरुपर्व मनाते और लंगर छकते थे और यह सिलसिला रंजना के लिए शादी के बाद भी चलता रहा और रोहित भी उनके साथ पूरे मन से शामिल रहता.

रंजना ख़ूबसूरत थी, तह्जीबदार थी, मौके की नफासत को समझती थी और कभी किसी को कोई शिकायत का मौक़ा नहीं देती थी. परिवार में उसके माँ बाप और जानने वाले उसकी बड़ी तारीफ़ किया करते थे. उसमें परिवार के लिए कुछ अलग करने का जज्बा भी था. इस खूबी की ज़रूरत तब काम आयी जब उसकी बड़ी बहन संध्या ने शादी से ठीक पहले रोहित से शादी करने से इनकार कर दिया. दरअसल, एक अरसे से संध्या और रोहित एक दूसरे से प्यार करते आ रहे थे और यह बात उन दोनों के परिवार वालों को मालूम था और वे दोनों के रिश्ते के लिए राजी भी थे. सन्धा के इस फैसले से दोनों परिवार के लोग सकते में आ गए थे. रोहित की हालत बहुत बुरी हो गयी और उसने ज़िंदगी से ही तौबा करने की ठान ली और घर वालों को यह बात बता भी दी थी.

इस बात को लेकर रंजना भी परेशान थी. उसे अपनी बहन के इस फैसले की वजह समझ में नहीं आ रही थी . दूसरी ओर उसे रोहित से भी हमदर्दी थी क्योंकि वह उसे बहुत ही सीधा और सुलझा हुआ लगता था. उसने संध्या और रोहित से इस बारे में वजह जानने की भरपूर कोशिश की पर किसी ने कुछ नहीं बताया. संध्या को समझाने की सभी की सारी कोशिशें काम नहीं आयीं. इस बीच रंजना ने फैसला किया कि वह इसका हल निकालेगी और उसने रोहित और अपने परिवार के सामने खुद रोहित से शादी का प्रस्ताव रखा. किसी की समझ में कुछ भी नहीं आ रहा था. संध्या को अपनी बहन के इस क़दम पर कुछ भी नहीं कहना था. रंजना रोहित की बहुत इज्ज़त करती ही थी. रोहित के मन में रंजना के लिए एक अलग जगह और इज्ज़त पहले से ही थी जो अब उसके इस फैसले से और भी बढ़ गयी. इससे रोहित को काफी राहत और सुकून महसूस हुआ.

ज़िंदगी के इस मोड़ पर आकर रंजना में धीरे-धीरे एक यह बदलाव आने लगा कि वह पहले की तरह शोख और चंचल रहने के बजाय अब संजीदा और गंभीर रहने लगी थी. वह अपने में आये इस बदलाव को रोहित और अपने घर वालों को महसूस नहीं होने देना चाहती थी. संध्या की शादी कही और तय हुयी और शादी की रस्म पूरी होने पर वह अपने ससुराल चली गयी. कुछ समय बाद रंजना की पढ़ाई पूरी होने के बाद रोहित से उसकी शादी हो गयी और वह भी अपने ससुराल चली गयी. शादी के दो साल बाद रंजना की गोद भरी और रोहित पिता बन गए. रंजना और रोहित के घर वालों के अलावा इमरान और अमरदीप ने भी जमकर खुशियाँ मनाई.

रंजना अपने परिवार में रम जाने के साथ साथ ऑफिस के काम काज में भी पूरी दिलचस्पी लेती और अपने ऑफिसरों और कलीग्स के बीच अपनी एक अलग पहचान बना ली थी. सब कुछ सामान्य और सहज था पर कब और कैसे रंजना नवीन के नजदीक आने लगी, यह उसे भी समझ में नहीं आ रहा था. इससे पहले की उनकी नजदीकियां किसी तरह के सम्बन्ध में बदलती, रंजना ने अपने को संभाल लिया रोहित को रंजना पर पूरा भरोसा था इसीलिए उसने रंजना से दफ्तर के लोगों से मेलजोल होने और बढ़ाने पर उसने कभी कोई सवाल नहीं किया. . इसी बीच रंजना के ऑफिस में एक नए मैनेजर राघव ने ज्वाइन किया. थोड़े ही समय में उन्होंने रंजना के काम को देखा और लोगो से भी उसकी तारीफ़ सुनी तो काफी खुश हुए. धीरे-धीरे उनका भरोसा रंजना पर बढ़ाता गया और उसकी जिम्मेदारियां भी बढ़ने लगी . अब हर बात में रंजना और हर काम में रंजना को पूछा और खोजा जाने लगा.

इसी बीच रंजना राघव के संपर्क में आयी तो दोनों एक दूसरे को अच्छी तरह समझने लगे थे . राघव कभी-कभी रंजना के घर . भी जाता और रोहित से मिलकर उसे अच्छा भी लगता था. .किसी तरह की कमी नहीं होने देता था. रोहित जानता था कि रंजना और राघव के बीच ऑफिस में अच्छी अंडरस्टैंडिंग है.. कभी भी उसके मन में इन दोनों के संबंधों को लेकर किसी तरह के शक या संदेह की बात नहीं आयी. इसकी ख़ास वजह पति -पत्नी के बीच की अच्छी समझ थी.

कभी-कभी रंजना और राघव के बीच बातों का सिलसिला ऐसा होता कि उम्र का फासला कोई

मायने ही नहीं रखता था. राघव की आदत थी कि वह रंजना की हर ज़रूरतों के बारे में पूछता और उसका ध्यान रखता था. राघव की तरह रंजना भी उसका ध्यान तो रखती थी पर उसकी हर ज़रूरतों के बारे में न पूछती और न ही जानना ही चाहती थी. दोनों के बीच नजदीकियों की शायद यही वजह थी. कभी-कभी काम के सिलसिले में वे एक साथ बाहर भी जाते थे. एक दूसरे से वे काफी खुले थे और यह सब उनके आपस में तय किये गए पैमानों के मुताबिक़ ही होता था.

वक़्त को भले ही सब कुछ पता हो पर आदमी ज़िंदगी में आने वाले मोड़ और बदलाव को भांपने और जानने में पूरी तरह नाकाम रहता है. रंजना और राघव भी इस फलसफे के घेरे से बाहर नहीं थे. रंजना को याद हो न हो पर राघव को यह बात याद रखने और कसक देने वाली थी जब किसी बात चीत के दौरान रंजना ने कहा था कि वह अच्छा खाती है , अच्छा पहनती है और इसके अलावा उसे क्या चाहिए. राघव रंजना की इस बात को लेकर बहुत परेशान रहता पर न कुछ पूछ सकता था और न ही कुछ कर ही सकता था.

इसी तरह एक बार राघव ने रंजना से पूछा कि बिना देखे देख लेना, बिना छुए छू लेना और बिना दिए पा लेना क्या हो सकता है. रंजना ने फ़ौरन कहा .'अहसास' और इस बात को अपने ज़हन से वह निकाल नहीं पायी. एक दिन राघव के मन की कसक और रंजना के मन के अहसास ने उस पैमाने को छलका ही दिया जिसे पूरे जतन से दोनों ने संभाल कर रखा था. दोनों में से किसी को कुछ समझ में नहीं आया कि यह सब कैसे हुआ . दोनों के लिए अनजाने में अनचाहा सा था सब कुछ. न कोई किसी से कुछ कह सकता था न पूछ ही सकता था. दोनों के बीच की दीवार कब और कैसे गिरी , तूफ़ान कब और कैसे आया, बिजली कब और कैसे कौंधी, समंदर ने कैसे उन्हें अपने में समो लिया, दोनों ही नहीं समझ पाए. दोनों जिन नयी गहराइयों तक डूबे थे ,जिन नयी ऊंचाईयों को महसूस किया था वह इससे पहले न सोचा था न जाना था. लहरें तो पहले भी महसूस हुयी थी पर इस बार लहरों का पूरा समंदर ही उनमें समा गया था. उन्होंने पूरा ब्रह्माण्ड अपने अन्दर महसूस किया था. किसने क्या खोया और किसने क्या पाया यह सवाल बेमानी लग रहा था. दरअसल न तो किसी ने कुछ खोया था जब कि दोनों को लग रहा था कि उन्होंने पाया ही पाया है. किसने ज़्यादा या किसने कम पाया, यह भी बेमानी इसलिए था क्योंकि दोनों को ही यह लग रहा था कि उसे एक दूसरे से ज़्यादा ही मिला है. दोनों के चहरे पर सुकून था, संतोष था, संतृप्ति थी, किसी बड़े उपलब्धि का गर्व था. काफी देर तक दोनों एक दूसरे से कुछ सुनने का इंतज़ार करते रहे , किसी ने न कुछ कहा न कुछ पूछा. दोनों का मौन ही एक दूसरे के प्रति कृतज्ञता की अभिव्यक्ति कर रहे थे. रंजना कुछ खाने पीने के इंतजाम में जुट गयी. राघव कभी रंजना को. तो कभी अपनी हथेलियों को निहारने लगा.

रंजना के चहरे पर एक नयी चमक, चाल में एक नयी मस्ती और व्यवहार में बढ़ी हुयी सौम्यता और स्निग्धता महसूस की जाने लगी थी. पंद्रह साल के वैवाहिक जीवन में उसे कुछ होने और पाने का अहसास अब हर पल महसूस होता . राघव के लिए अब उसके मन में पहले से ज़्यादा सम्मान ने जगह बना लिया था. ज़ल्द ही उसे अहसास हुआ कि वह दूसरी बार माँ बनने जा रही थी. रोहित से पहले यह बात वह राघव को बताना चाहती थी पर खुद पर उसने काबू रखा और कुछ समय बाद किसी और से शेयर करने या खबर होने से पहले राघव को बता ही दिया. राघव ने महसूस किया कि रंजना बहुत खुश थी. वह भी बहुत खुश हुआ और रंजना को माँ बनने की बधाई भी दी. रंजना ने जब रोहित को यह बात बतायी तो उसकी खुशी का ठिकाना नहीं रहा. दस साल के बेटे को जब यह बात बतायी गयी तो वह इस बात से बहुत खुश हुआ कि अब उसे भैया कहने वाला आयेगा.

राघव बस रंजना को उसके और उसके होने वाले बच्चे पर पूरा ध्यान देने की बातें करता. रंजना ही यह जानती थी कि उसे यह तोहफा राघव ने ही दिया है पर यह बात उसने अभी राघव को ज़ाहिर नहीं की थी. इस बीच किसी वजह से राघव को यह शहर छोड़ना पड़ रहा था. अच्छे ओहदे पर वह कुछ समय के लिए विदेश जा रहा था. रंजना को यह अच्छा तो नहीं लग रहा था पर वह इसमें कोई अड़चन नहीं आने देना चाहती थी. संयोग से राघव का जाना कुछ समय के लिए टल गया. रंजना खुश हुयी. ज़िंदगी में अब तक उसे किससे क्या मिला यह वही जानती थी और अब वो अपनी ज़िंदगी से बहुत प्यार करने लगी थी.

रंजना के गोद में एक सुन्दर सी बिटिया आयी. सभी बहुत खुश हुए. राघव से रंजना मिली तो कभी अपनी गोद में बेटी को देखती तो कभी राघव को देख रही थी. राघव उसके चेहरे पर आयी इस नयी खुशी को देखकर बेहद खुश था . मौक़ा पाकर रंजना ने उसे बताया की उसे अपनी ज़िंदगी में नए अहसासात और नयी खुशियां उन्हीं से मिली है और यह भी बताया कि यह खूबसूरत उपहार उसकी गोद में उन्हीं की दी हुयी नेमत है. रंजना ने कहा कि उसकी ज़िंदगी को खुशियों और बहारों से उन्होंने ही भरा है और यह बात भी सिर्फ वे दोनों ही जानते है. राघव की समझ में नहीं आ रहा था कि वह क्या कहे, क्या पूछे. अब उसे उन दोनों से अलग होना बहुत मुश्किल लगने लगा. वह रंजना से इस हद तक जुड़ जाएगा, बंध जाएगा, न सोचा था न जानता ही था पर यह अच्छा लग रहा था. रंजना ने उसे समझाया , उसे अपनी और अपनी नयी मेहमान का वास्ता देकर इस बात के लिए तैयार किया कि इस बंधन को वह अपनी ताक़त बनाए जिससे उसे भी ताक़त मिलेगी. वह नर्सिंग होम से घर आयी और एक हफ्ते बाद राघव को विदेश के लिए विदा किया.

दोनों के बीच संपर्क और बात चीत का सिलसिला चलता रहा. विदेश में उसका स्टे बढ़ाता गया और इस तरह साल दर साल बीतने लगा. रंजना के साथ रोहित, अमन और अंशिका थे पर राघव तो वहा बिलकुल अकेला ही था. अंशिका नाम राघव ने दिया था. रोहित से भी बातें होती रहती. जब भी रंजना राघव से आने के बारे में बातें करती तो राघव अपने ढंग से उसे समझाया करता . इस बीच रंजना की सोच तो पहले जैसी ही थी पर उसके जीने के अंदाज़ में बदलाव ज़रूर आ रहा था. रंजना अपना पूरा ध्यान अपने दोनों बच्चों पर देती थी. रोहित और उसके बीच के सम्बन्ध सतही तौर पर तो सामान्य थे पर रंजना को यह लगने लगा था कि उन दोनों के संबंधों की एक कड़ी राघव भी बन गया था. ऐसा उसे इसलिए लगता था क्योंकि जब भी रोहित के साथ होती तो राघव को अपने अहसासों से अलग नहीं कर पाती थी. कुछ समय तक तो ऐसा चलता आ रहा पर धीरे-धीरे रंजना को लगने लगा कि इस तरह वो रोहित के साथ न्याय नहीं कर रही है जब कि रोहित अब रंजना को पहले से ज़्यादा खुश और एक्टिव महसूस करता था और उसे यह अच्छा भी लगता था. रंजना एक अजीब तरह की कशमकश महसूस करती. केवल रोहित से उसे खुशी तब तक नहीं मिलती जब तक उसे राघव के पास होने का अहसास उसका साथ नहीं देता. अब उसे डर भी लगने लगा कि कहीं अनजाने में कुछ ऐसा न हो जिससे उसके मन की सच्चाई का अनुमान रोहित को हो जाय. शायद इसलिए भी अब रोहित के प्रति उसके व्यवहार में बदलाव आने लगा और धीरे-धीरे वह कोई बहाना बनाकर रोहित से दूर रहने लगी. मगर वह इस बात का भी ध्यान रखती थी कि उसके इस बदले हुए व्यवहार से रोहित पर कोई असर न पड़े और वह अकेलेपन या खालीपन महसूस करे. इसीलिये उसकी सारी ज़रूरतों पर वह ध्यान देती थी और भावनात्मक रूप से उसे सहारा और साथ देने की भी कोशिश करती थी.

अपने प्रयास में वह कामयाब रही. सब कुछ उसका रहन- सहन, बात-व्यवहार पहले जैसा ही रहा. उसकी सोच और व्यवहार में जो बदलाव आया भी था उसका ताल्लुक बस रोहित और राघव से था ज़रूर पर उसने किसी को बतलाया नहीं. वह पहले जैसी ही खुश थी. इस तरह समय बीतता रहा. जब समय को पंख लग जाते हैं तो उसके छोटे या लम्बे होने का अहसास कभी होता है और कभी नहीं भी होता. राघव के जब वापिस आने का समय हुआ तो उसके गए दस साल पूरे हो रहे थे. उसके आने की खबर से सभी बहुत खुश थे.

राघव वापिस आया तो अंशिका दस साल पुरी कर चुकी थी. अमन बड़ा हो गया था. रोहित पहले से ज्यादा संजीदा और गंभीर लगने लगा था. रंजना के चहरे पर पहले से ज़्यादा चमक थी. उसकी पर्सनैलिटी में निखार आ गया था. उसे राघव भी पहले से ज़्यादा आकर्षक लग रहे लग रहे थे. उसके चहरे पर तेज और बढ़ गया था. उसके लहजे में अब वजन बढ़ गया था. जो सबसे बड़ा परिवर्तन राघव को लगा वह था उसके गले में रुद्राक्ष की माला जिससे उसके व्यक्तित्व में और निखार आ गया था. उसके मन में राघव के लिए सम्मान और जगह दोनों ही बढ़ गया था. राघव उसे एक सम्पूर्ण पुरुष होने के अलावा एक विलक्षण व्यक्तित्व मानने लगी थी. अमन ने तो पहले ही उन्हें देखा था और अपनापन भी पाया था और अंशिका ने तो बस सुना ही था, देखी और मिली तो ऐसा नहीं लगा कि वह उन्हें पहले से नहीं जानती और मिली थी. राघव को उससे मिलकर कैसा महसूस हुआ होगा यह राघव के अलावा रंजना भी समझ रही थी.

राघव के मन में रंजना को लेकर कुछ सवाल उठ रहे थे. वह इस बारे में रंजना से कुछ कहता उससे पहले ही मौक़ा पाकर उसने राघव को बताया कि अंशिका के जनम के बाद वह कभी भी उसे अपने से अलग नहीं कर पायी . उसने स्वीकार किया कि जब कभी वह रोहित के साथ होती तो राघव को नहीं भूल पाती थी. दरअसल , वह राघव को मन से कभी अलग नहीं कर पायी और फिर काफी कोशिश के बाद भी जब वह नाकामयाब रही तो उसने तय किया कि वह रोहित के साथ अपने रिश्ते को नए ढंग से देखेगी और जीयेगी .

रंजना ने स्वीकार किया कि उसने एक संकल्प के रूप में रुद्राक्ष धारण किया है. इस संकल्प के दो पहलू थे. एक ओर वह चाहती थी कि राघव के प्रति सम्मान और समर्पण का संकल्प उसका संबल बने और दूसरी ओर वह उसी मन से रोहित से पत्नी के रूप में जुडी भी रहना चाहती थी और इसके लिए भी उसे ताक़त की ज़रूरत थी. मन की शान्ति और तन की मर्यादा के लिए ही उसे स्वामी जी ने यह माला मन्त्र के रूप में दिया था जो अब उसके गले की शोभा बढाने के अलावा उसके समर्पण और निष्ठा का प्रतीक था.

रंजना की बातें राघव को बहुत अच्छी लगी. अपने मन की बात भी वह उसके सामने रखने को आतुर था ही इसलिए कहने लगा कि उसके मन पर किसी तरह का बोझ नहीं रहना चाहिए . राघव खुद यह मानता था कि ज़िदगी में अनजाने में कुछ अनचाहा हो भी जाए और उसे लेकर मन में कोई पश्चाताप, ग्लानि या क्षोभ न हो तो वह गुनाह नहीं है. संयोग से रंजना की सोच राघव की सोच जैसी ही थी.

रंजना और राघव को एक दूसरे पर पूरा भरोसा था,गर्व था,एक दूसरे को अपनी ताक़त समझते थे, कमजोरी नहीं. रोहित और रंजना के परिवार का ही वे एक हिस्सा बन चुके थे. दोनों बच्चे रोहित और रंजना के अलावा राघव से भी भरपूर प्यार और दुलार पाते थे. राघव को कभी ऐसा नहीं लगा कि वह अकेला है. सभी के लिए ज़िंदगी खूबसूरत थी, दुनियाँ ख़ुशनुमा थी.

****************

COMMENTS

BLOGGER: 2
Loading...

विज्ञापन

----
--- विज्ञा. --

---***---

-- विज्ञापन -- ---

|रचनाकार में खोजें_

रचनाकार.ऑर्ग के लाखों पन्नों में सैकड़ों साहित्यकारों की हजारों रचनाओं में से अपनी मनपसंद विधा की रचनाएं ढूंढकर पढ़ें. इसके लिए नीचे दिए गए सर्च बक्से में खोज शब्द भर कर सर्च बटन पर क्लिक करें:
मनपसंद रचनाएँ खोजकर पढ़ें

|कथा-कहानी_$type=blogging$com=0$au=0$count=7$page=1$src=random-posts$s=200

-- विज्ञापन --

|हास्य-व्यंग्य_$type=complex$com=0$au=0$count=7$page=1$src=random-posts

|लोककथाएँ_$type=blogging$com=0$au=0$count=7$page=1$src=random-posts

-- विज्ञापन --

|लघुकथाएँ_$type=blogging$com=0$au=0$count=7$page=1$src=random-posts

|आलेख_$type=blogging$com=0$au=0$count=7$page=1$src=random-posts

-- विज्ञापन --

|काव्य जगत_$type=complex$com=0$au=0$count=7$page=1$src=random-posts

|संस्मरण_$type=blogging$com=0$au=0$count=7$page=1$src=random-posts

-- विज्ञापन --

|बच्चों के लिए रचनाएँ_$type=blogging$com=0$au=0$count=7$page=1$src=random-posts

|विविधा_$type=blogging$au=0$com=0$label=1$count=10$va=1$page=1$src=random-posts

 आलेख कविता कहानी व्यंग्य 14 सितम्बर 14 september 15 अगस्त 2 अक्टूबर अक्तूबर अंजनी श्रीवास्तव अंजली काजल अंजली देशपांडे अंबिकादत्त व्यास अखिलेश कुमार भारती अखिलेश सोनी अग्रसेन अजय अरूण अजय वर्मा अजित वडनेरकर अजीत प्रियदर्शी अजीत भारती अनंत वडघणे अनन्त आलोक अनमोल विचार अनामिका अनामी शरण बबल अनिमेष कुमार गुप्ता अनिल कुमार पारा अनिल जनविजय अनुज कुमार आचार्य अनुज कुमार आचार्य बैजनाथ अनुज खरे अनुपम मिश्र अनूप शुक्ल अपर्णा शर्मा अभिमन्यु अभिषेक ओझा अभिषेक कुमार अम्बर अभिषेक मिश्र अमरपाल सिंह आयुष्कर अमरलाल हिंगोराणी अमित शर्मा अमित शुक्ल अमिय बिन्दु अमृता प्रीतम अरविन्द कुमार खेड़े अरूण देव अरूण माहेश्वरी अर्चना चतुर्वेदी अर्चना वर्मा अर्जुन सिंह नेगी अविनाश त्रिपाठी अशोक गौतम अशोक जैन पोरवाल अशोक शुक्ल अश्विनी कुमार आलोक आई बी अरोड़ा आकांक्षा यादव आचार्य बलवन्त आचार्य शिवपूजन सहाय आजादी आदित्य प्रचंडिया आनंद टहलरामाणी आनन्द किरण आर. के. नारायण आरकॉम आरती आरिफा एविस आलेख आलोक कुमार आलोक कुमार सातपुते आशीष कुमार त्रिवेदी आशीष श्रीवास्तव आशुतोष आशुतोष शुक्ल इंदु संचेतना इन्दिरा वासवाणी इन्द्रमणि उपाध्याय इन्द्रेश कुमार इलाहाबाद ई-बुक ईबुक ईश्वरचन्द्र उपन्यास उपासना उपासना बेहार उमाशंकर सिंह परमार उमेश चन्द्र सिरसवारी उमेशचन्द्र सिरसवारी उषा छाबड़ा उषा रानी ऋतुराज सिंह कौल ऋषभचरण जैन एम. एम. चन्द्रा एस. एम. चन्द्रा कथासरित्सागर कर्ण कला जगत कलावंती सिंह कल्पना कुलश्रेष्ठ कवि कविता कहानी कहानी संग्रह काजल कुमार कान्हा कामिनी कामायनी कार्टून काशीनाथ सिंह किताबी कोना किरन सिंह किशोरी लाल गोस्वामी कुंवर प्रेमिल कुबेर कुमार करन मस्ताना कुसुमलता सिंह कृश्न चन्दर कृष्ण कृष्ण कुमार यादव कृष्ण खटवाणी कृष्ण जन्माष्टमी के. पी. सक्सेना केदारनाथ सिंह कैलाश मंडलोई कैलाश वानखेड़े कैशलेस कैस जौनपुरी क़ैस जौनपुरी कौशल किशोर श्रीवास्तव खिमन मूलाणी गंगा प्रसाद श्रीवास्तव गंगाप्रसाद शर्मा गुणशेखर ग़ज़लें गजानंद प्रसाद देवांगन गजेन्द्र नामदेव गणि राजेन्द्र विजय गणेश चतुर्थी गणेश सिंह गांधी जयंती गिरधारी राम गीत गीता दुबे गीता सिंह गुंजन शर्मा गुडविन मसीह गुनो सामताणी गुरदयाल सिंह गोरख प्रभाकर काकडे गोवर्धन यादव गोविन्द वल्लभ पंत गोविन्द सेन चंद्रकला त्रिपाठी चंद्रलेखा चतुष्पदी चन्द्रकिशोर जायसवाल चन्द्रकुमार जैन चाँद पत्रिका चिकित्सा शिविर चुटकुला ज़कीया ज़ुबैरी जगदीप सिंह दाँगी जयचन्द प्रजापति कक्कूजी जयश्री जाजू जयश्री राय जया जादवानी जवाहरलाल कौल जसबीर चावला जावेद अनीस जीवंत प्रसारण जीवनी जीशान हैदर जैदी जुगलबंदी जुनैद अंसारी जैक लंडन ज्ञान चतुर्वेदी ज्योति अग्रवाल टेकचंद ठाकुर प्रसाद सिंह तकनीक तक्षक तनूजा चौधरी तरुण भटनागर तरूण कु सोनी तन्वीर ताराशंकर बंद्योपाध्याय तीर्थ चांदवाणी तुलसीराम तेजेन्द्र शर्मा तेवर तेवरी त्रिलोचन दामोदर दत्त दीक्षित दिनेश बैस दिलबाग सिंह विर्क दिलीप भाटिया दिविक रमेश दीपक आचार्य दुर्गाष्टमी देवी नागरानी देवेन्द्र कुमार मिश्रा देवेन्द्र पाठक महरूम दोहे धर्मेन्द्र निर्मल धर्मेन्द्र राजमंगल नइमत गुलची नजीर नज़ीर अकबराबादी नन्दलाल भारती नरेंद्र शुक्ल नरेन्द्र कुमार आर्य नरेन्द्र कोहली नरेन्‍द्रकुमार मेहता नलिनी मिश्र नवदुर्गा नवरात्रि नागार्जुन नाटक नामवर सिंह निबंध निर्मल गुप्ता नीतू सुदीप्ति ‘नित्या’ नीरज खरे नीलम महेंद्र नीला प्रसाद पंकज प्रखर पंकज मित्र पंकज शुक्ला पंकज सुबीर परसाई परसाईं परिहास पल्लव पल्लवी त्रिवेदी पवन तिवारी पाक कला पाठकीय पालगुम्मि पद्मराजू पुनर्वसु जोशी पूजा उपाध्याय पोपटी हीरानंदाणी पौराणिक प्रज्ञा प्रताप सहगल प्रतिभा प्रतिभा सक्सेना प्रदीप कुमार प्रदीप कुमार दाश दीपक प्रदीप कुमार साह प्रदोष मिश्र प्रभात दुबे प्रभु चौधरी प्रमिला भारती प्रमोद कुमार तिवारी प्रमोद भार्गव प्रमोद यादव प्रवीण कुमार झा प्रांजल धर प्राची प्रियंवद प्रियदर्शन प्रेम कहानी प्रेम दिवस प्रेम मंगल फिक्र तौंसवी फ्लेनरी ऑक्नर बंग महिला बंसी खूबचंदाणी बकर पुराण बजरंग बिहारी तिवारी बरसाने लाल चतुर्वेदी बलबीर दत्त बलराज सिंह सिद्धू बलूची बसंत त्रिपाठी बातचीत बाल कथा बाल कलम बाल दिवस बालकथा बालकृष्ण भट्ट बालगीत बृज मोहन बृजेन्द्र श्रीवास्तव उत्कर्ष बेढब बनारसी बैचलर्स किचन बॉब डिलेन भरत त्रिवेदी भागवत रावत भारत कालरा भारत भूषण अग्रवाल भारत यायावर भावना राय भावना शुक्ल भीष्म साहनी भूतनाथ भूपेन्द्र कुमार दवे मंजरी शुक्ला मंजीत ठाकुर मंजूर एहतेशाम मंतव्य मथुरा प्रसाद नवीन मदन सोनी मधु त्रिवेदी मधु संधु मधुर नज्मी मधुरा प्रसाद नवीन मधुरिमा प्रसाद मधुरेश मनीष कुमार सिंह मनोज कुमार मनोज कुमार झा मनोज कुमार पांडेय मनोज कुमार श्रीवास्तव मनोज दास ममता सिंह मयंक चतुर्वेदी महापर्व छठ महाभारत महावीर प्रसाद द्विवेदी महाशिवरात्रि महेंद्र भटनागर महेन्द्र देवांगन माटी महेश कटारे महेश कुमार गोंड हीवेट महेश सिंह महेश हीवेट मानसून मार्कण्डेय मिलन चौरसिया मिलन मिलान कुन्देरा मिशेल फूको मिश्रीमल जैन तरंगित मीनू पामर मुकेश वर्मा मुक्तिबोध मुर्दहिया मृदुला गर्ग मेराज फैज़ाबादी मैक्सिम गोर्की मैथिली शरण गुप्त मोतीलाल जोतवाणी मोहन कल्पना मोहन वर्मा यशवंत कोठारी यशोधरा विरोदय यात्रा संस्मरण योग योग दिवस योगासन योगेन्द्र प्रताप मौर्य योगेश अग्रवाल रक्षा बंधन रच रचना समय रजनीश कांत रत्ना राय रमेश उपाध्याय रमेश राज रमेशराज रवि रतलामी रवींद्र नाथ ठाकुर रवीन्द्र अग्निहोत्री रवीन्द्र नाथ त्यागी रवीन्द्र संगीत रवीन्द्र सहाय वर्मा रसोई रांगेय राघव राकेश अचल राकेश दुबे राकेश बिहारी राकेश भ्रमर राकेश मिश्र राजकुमार कुम्भज राजन कुमार राजशेखर चौबे राजीव रंजन उपाध्याय राजेन्द्र कुमार राजेन्द्र विजय राजेश कुमार राजेश गोसाईं राजेश जोशी राधा कृष्ण राधाकृष्ण राधेश्याम द्विवेदी राम कृष्ण खुराना राम शिव मूर्ति यादव रामचंद्र शुक्ल रामचन्द्र शुक्ल रामचरन गुप्त रामवृक्ष सिंह रावण राहुल कुमार राहुल सिंह रिंकी मिश्रा रिचर्ड फाइनमेन रिलायंस इन्फोकाम रीटा शहाणी रेंसमवेयर रेणु कुमारी रेवती रमण शर्मा रोहित रुसिया लक्ष्मी यादव लक्ष्मीकांत मुकुल लक्ष्मीकांत वैष्णव लखमी खिलाणी लघु कथा लघुकथा लतीफ घोंघी ललित ग ललित गर्ग ललित निबंध ललित साहू जख्मी ललिता भाटिया लाल पुष्प लावण्या दीपक शाह लीलाधर मंडलोई लू सुन लूट लोक लोककथा लोकतंत्र का दर्द लोकमित्र लोकेन्द्र सिंह विकास कुमार विजय केसरी विजय शिंदे विज्ञान कथा विद्यानंद कुमार विनय भारत विनीत कुमार विनीता शुक्ला विनोद कुमार दवे विनोद तिवारी विनोद मल्ल विभा खरे विमल चन्द्राकर विमल सिंह विरल पटेल विविध विविधा विवेक प्रियदर्शी विवेक रंजन श्रीवास्तव विवेक सक्सेना विवेकानंद विवेकानन्द विश्वंभर नाथ शर्मा कौशिक विश्वनाथ प्रसाद तिवारी विष्णु नागर विष्णु प्रभाकर वीणा भाटिया वीरेन्द्र सरल वेणीशंकर पटेल ब्रज वेलेंटाइन वेलेंटाइन डे वैभव सिंह व्यंग्य व्यंग्य के बहाने व्यंग्य जुगलबंदी व्यथित हृदय शंकर पाटील शगुन अग्रवाल शबनम शर्मा शब्द संधान शम्भूनाथ शरद कोकास शशांक मिश्र भारती शशिकांत सिंह शहीद भगतसिंह शामिख़ फ़राज़ शारदा नरेन्द्र मेहता शालिनी तिवारी शालिनी मुखरैया शिक्षक दिवस शिवकुमार कश्यप शिवप्रसाद कमल शिवरात्रि शिवेन्‍द्र प्रताप त्रिपाठी शीला नरेन्द्र त्रिवेदी शुभम श्री शुभ्रता मिश्रा शेखर मलिक शेषनाथ प्रसाद शैलेन्द्र सरस्वती शैलेश त्रिपाठी शौचालय श्याम गुप्त श्याम सखा श्याम श्याम सुशील श्रीनाथ सिंह श्रीमती तारा सिंह श्रीमद्भगवद्गीता श्रृंगी श्वेता अरोड़ा संजय दुबे संजय सक्सेना संजीव संजीव ठाकुर संद मदर टेरेसा संदीप तोमर संपादकीय संस्मरण संस्मरण लेखन पुरस्कार 2018 सच्चिदानंद हीरानंद वात्स्यायन सतीश कुमार त्रिपाठी सपना महेश सपना मांगलिक समीक्षा सरिता पन्थी सविता मिश्रा साइबर अपराध साइबर क्राइम साक्षात्कार सागर यादव जख्मी सार्थक देवांगन सालिम मियाँ साहित्य समाचार साहित्यिक गतिविधियाँ साहित्यिक बगिया सिंहासन बत्तीसी सिद्धार्थ जगन्नाथ जोशी सी.बी.श्रीवास्तव विदग्ध सीताराम गुप्ता सीताराम साहू सीमा असीम सक्सेना सीमा शाहजी सुगन आहूजा सुचिंता कुमारी सुधा गुप्ता अमृता सुधा गोयल नवीन सुधेंदु पटेल सुनीता काम्बोज सुनील जाधव सुभाष चंदर सुभाष चन्द्र कुशवाहा सुभाष नीरव सुभाष लखोटिया सुमन सुमन गौड़ सुरभि बेहेरा सुरेन्द्र चौधरी सुरेन्द्र वर्मा सुरेश चन्द्र सुरेश चन्द्र दास सुविचार सुशांत सुप्रिय सुशील कुमार शर्मा सुशील यादव सुशील शर्मा सुषमा गुप्ता सुषमा श्रीवास्तव सूरज प्रकाश सूर्य बाला सूर्यकांत मिश्रा सूर्यकुमार पांडेय सेल्फी सौमित्र सौरभ मालवीय स्नेहमयी चौधरी स्वच्छ भारत स्वतंत्रता दिवस स्वराज सेनानी हबीब तनवीर हरि भटनागर हरि हिमथाणी हरिकांत जेठवाणी हरिवंश राय बच्चन हरिशंकर गजानंद प्रसाद देवांगन हरिशंकर परसाई हरीश कुमार हरीश गोयल हरीश नवल हरीश भादानी हरीश सम्यक हरे प्रकाश उपाध्याय हाइकु हाइगा हास-परिहास हास्य हास्य-व्यंग्य हिंदी दिवस विशेष हुस्न तबस्सुम 'निहाँ' biography dohe hindi divas hindi sahitya indian art kavita review satire shatak tevari undefined
नाम

 आलेख ,1, कविता ,1, कहानी ,1, व्यंग्य ,1,14 सितम्बर,7,14 september,6,15 अगस्त,4,2 अक्टूबर अक्तूबर,1,अंजनी श्रीवास्तव,1,अंजली काजल,1,अंजली देशपांडे,1,अंबिकादत्त व्यास,1,अखिलेश कुमार भारती,1,अखिलेश सोनी,1,अग्रसेन,1,अजय अरूण,1,अजय वर्मा,1,अजित वडनेरकर,1,अजीत प्रियदर्शी,1,अजीत भारती,1,अनंत वडघणे,1,अनन्त आलोक,1,अनमोल विचार,1,अनामिका,3,अनामी शरण बबल,1,अनिमेष कुमार गुप्ता,1,अनिल कुमार पारा,1,अनिल जनविजय,1,अनुज कुमार आचार्य,5,अनुज कुमार आचार्य बैजनाथ,1,अनुज खरे,1,अनुपम मिश्र,1,अनूप शुक्ल,14,अपर्णा शर्मा,6,अभिमन्यु,1,अभिषेक ओझा,1,अभिषेक कुमार अम्बर,1,अभिषेक मिश्र,1,अमरपाल सिंह आयुष्कर,2,अमरलाल हिंगोराणी,1,अमित शर्मा,3,अमित शुक्ल,1,अमिय बिन्दु,1,अमृता प्रीतम,1,अरविन्द कुमार खेड़े,5,अरूण देव,1,अरूण माहेश्वरी,1,अर्चना चतुर्वेदी,1,अर्चना वर्मा,2,अर्जुन सिंह नेगी,1,अविनाश त्रिपाठी,1,अशोक गौतम,3,अशोक जैन पोरवाल,14,अशोक शुक्ल,1,अश्विनी कुमार आलोक,1,आई बी अरोड़ा,1,आकांक्षा यादव,1,आचार्य बलवन्त,1,आचार्य शिवपूजन सहाय,1,आजादी,3,आदित्य प्रचंडिया,1,आनंद टहलरामाणी,1,आनन्द किरण,3,आर. के. नारायण,1,आरकॉम,1,आरती,1,आरिफा एविस,5,आलेख,3752,आलोक कुमार,2,आलोक कुमार सातपुते,1,आशीष कुमार त्रिवेदी,5,आशीष श्रीवास्तव,1,आशुतोष,1,आशुतोष शुक्ल,1,इंदु संचेतना,1,इन्दिरा वासवाणी,1,इन्द्रमणि उपाध्याय,1,इन्द्रेश कुमार,1,इलाहाबाद,2,ई-बुक,325,ईबुक,181,ईश्वरचन्द्र,1,उपन्यास,234,उपासना,1,उपासना बेहार,5,उमाशंकर सिंह परमार,1,उमेश चन्द्र सिरसवारी,2,उमेशचन्द्र सिरसवारी,1,उषा छाबड़ा,1,उषा रानी,1,ऋतुराज सिंह कौल,1,ऋषभचरण जैन,1,एम. एम. चन्द्रा,17,एस. एम. चन्द्रा,2,कथासरित्सागर,1,कर्ण,1,कला जगत,105,कलावंती सिंह,1,कल्पना कुलश्रेष्ठ,11,कवि,2,कविता,2731,कहानी,2040,कहानी संग्रह,224,काजल कुमार,7,कान्हा,1,कामिनी कामायनी,5,कार्टून,7,काशीनाथ सिंह,2,किताबी कोना,7,किरन सिंह,1,किशोरी लाल गोस्वामी,1,कुंवर प्रेमिल,1,कुबेर,7,कुमार करन मस्ताना,1,कुसुमलता सिंह,1,कृश्न चन्दर,6,कृष्ण,3,कृष्ण कुमार यादव,1,कृष्ण खटवाणी,1,कृष्ण जन्माष्टमी,5,के. पी. सक्सेना,1,केदारनाथ सिंह,1,कैलाश मंडलोई,3,कैलाश वानखेड़े,1,कैशलेस,1,कैस जौनपुरी,3,क़ैस जौनपुरी,1,कौशल किशोर श्रीवास्तव,1,खिमन मूलाणी,1,गंगा प्रसाद श्रीवास्तव,1,गंगाप्रसाद शर्मा गुणशेखर,1,ग़ज़लें,482,गजानंद प्रसाद देवांगन,2,गजेन्द्र नामदेव,1,गणि राजेन्द्र विजय,1,गणेश चतुर्थी,1,गणेश सिंह,4,गांधी जयंती,1,गिरधारी राम,4,गीत,3,गीता दुबे,1,गीता सिंह,1,गुंजन शर्मा,1,गुडविन मसीह,2,गुनो सामताणी,1,गुरदयाल सिंह,1,गोरख प्रभाकर काकडे,1,गोवर्धन यादव,1,गोविन्द वल्लभ पंत,1,गोविन्द सेन,5,चंद्रकला त्रिपाठी,1,चंद्रलेखा,1,चतुष्पदी,1,चन्द्रकिशोर जायसवाल,1,चन्द्रकुमार जैन,6,चाँद पत्रिका,1,चिकित्सा शिविर,1,चुटकुला,71,ज़कीया ज़ुबैरी,1,जगदीप सिंह दाँगी,1,जयचन्द प्रजापति कक्कूजी,2,जयश्री जाजू,4,जयश्री राय,1,जया जादवानी,1,जवाहरलाल कौल,1,जसबीर चावला,1,जावेद अनीस,8,जीवंत प्रसारण,129,जीवनी,1,जीशान हैदर जैदी,1,जुगलबंदी,5,जुनैद अंसारी,1,जैक लंडन,1,ज्ञान चतुर्वेदी,2,ज्योति अग्रवाल,1,टेकचंद,1,ठाकुर प्रसाद सिंह,1,तकनीक,30,तक्षक,1,तनूजा चौधरी,1,तरुण भटनागर,1,तरूण कु सोनी तन्वीर,1,ताराशंकर बंद्योपाध्याय,1,तीर्थ चांदवाणी,1,तुलसीराम,1,तेजेन्द्र शर्मा,2,तेवर,1,तेवरी,8,त्रिलोचन,8,दामोदर दत्त दीक्षित,1,दिनेश बैस,6,दिलबाग सिंह विर्क,1,दिलीप भाटिया,1,दिविक रमेश,1,दीपक आचार्य,48,दुर्गाष्टमी,1,देवी नागरानी,20,देवेन्द्र कुमार मिश्रा,2,देवेन्द्र पाठक महरूम,1,दोहे,1,धर्मेन्द्र निर्मल,2,धर्मेन्द्र राजमंगल,2,नइमत गुलची,1,नजीर नज़ीर अकबराबादी,1,नन्दलाल भारती,2,नरेंद्र शुक्ल,2,नरेन्द्र कुमार आर्य,1,नरेन्द्र कोहली,2,नरेन्‍द्रकुमार मेहता,9,नलिनी मिश्र,1,नवदुर्गा,1,नवरात्रि,1,नागार्जुन,1,नाटक,82,नामवर सिंह,1,निबंध,3,निर्मल गुप्ता,2,नीतू सुदीप्ति ‘नित्या’,1,नीरज खरे,1,नीलम महेंद्र,1,नीला प्रसाद,1,पंकज प्रखर,4,पंकज मित्र,2,पंकज शुक्ला,1,पंकज सुबीर,3,परसाई,1,परसाईं,1,परिहास,4,पल्लव,1,पल्लवी त्रिवेदी,2,पवन तिवारी,2,पाक कला,22,पाठकीय,61,पालगुम्मि पद्मराजू,1,पुनर्वसु जोशी,9,पूजा उपाध्याय,2,पोपटी हीरानंदाणी,1,पौराणिक,1,प्रज्ञा,1,प्रताप सहगल,1,प्रतिभा,1,प्रतिभा सक्सेना,1,प्रदीप कुमार,1,प्रदीप कुमार दाश दीपक,1,प्रदीप कुमार साह,11,प्रदोष मिश्र,1,प्रभात दुबे,1,प्रभु चौधरी,2,प्रमिला भारती,1,प्रमोद कुमार तिवारी,1,प्रमोद भार्गव,2,प्रमोद यादव,14,प्रवीण कुमार झा,1,प्रांजल धर,1,प्राची,309,प्रियंवद,2,प्रियदर्शन,1,प्रेम कहानी,1,प्रेम दिवस,2,प्रेम मंगल,1,फिक्र तौंसवी,1,फ्लेनरी ऑक्नर,1,बंग महिला,1,बंसी खूबचंदाणी,1,बकर पुराण,1,बजरंग बिहारी तिवारी,1,बरसाने लाल चतुर्वेदी,1,बलबीर दत्त,1,बलराज सिंह सिद्धू,1,बलूची,1,बसंत त्रिपाठी,2,बातचीत,1,बाल कथा,325,बाल कलम,22,बाल दिवस,3,बालकथा,47,बालकृष्ण भट्ट,1,बालगीत,8,बृज मोहन,2,बृजेन्द्र श्रीवास्तव उत्कर्ष,1,बेढब बनारसी,1,बैचलर्स किचन,1,बॉब डिलेन,1,भरत त्रिवेदी,1,भागवत रावत,1,भारत कालरा,1,भारत भूषण अग्रवाल,1,भारत यायावर,2,भावना राय,1,भावना शुक्ल,5,भीष्म साहनी,1,भूतनाथ,1,भूपेन्द्र कुमार दवे,1,मंजरी शुक्ला,2,मंजीत ठाकुर,1,मंजूर एहतेशाम,1,मंतव्य,1,मथुरा प्रसाद नवीन,1,मदन सोनी,1,मधु त्रिवेदी,2,मधु संधु,1,मधुर नज्मी,1,मधुरा प्रसाद नवीन,1,मधुरिमा प्रसाद,1,मधुरेश,1,मनीष कुमार सिंह,4,मनोज कुमार,6,मनोज कुमार झा,5,मनोज कुमार पांडेय,1,मनोज कुमार श्रीवास्तव,2,मनोज दास,1,ममता सिंह,2,मयंक चतुर्वेदी,1,महापर्व छठ,1,महाभारत,2,महावीर प्रसाद द्विवेदी,1,महाशिवरात्रि,1,महेंद्र भटनागर,3,महेन्द्र देवांगन माटी,1,महेश कटारे,1,महेश कुमार गोंड हीवेट,2,महेश सिंह,2,महेश हीवेट,1,मानसून,1,मार्कण्डेय,1,मिलन चौरसिया मिलन,1,मिलान कुन्देरा,1,मिशेल फूको,8,मिश्रीमल जैन तरंगित,1,मीनू पामर,2,मुकेश वर्मा,1,मुक्तिबोध,1,मुर्दहिया,1,मृदुला गर्ग,1,मेराज फैज़ाबादी,1,मैक्सिम गोर्की,1,मैथिली शरण गुप्त,1,मोतीलाल जोतवाणी,1,मोहन कल्पना,1,मोहन वर्मा,1,यशवंत कोठारी,8,यशोधरा विरोदय,2,यात्रा संस्मरण,16,योग,3,योग दिवस,3,योगासन,2,योगेन्द्र प्रताप मौर्य,1,योगेश अग्रवाल,2,रक्षा बंधन,1,रच,1,रचना समय,72,रजनीश कांत,2,रत्ना राय,1,रमेश उपाध्याय,1,रमेश राज,26,रमेशराज,8,रवि रतलामी,2,रवींद्र नाथ ठाकुर,1,रवीन्द्र अग्निहोत्री,4,रवीन्द्र नाथ त्यागी,1,रवीन्द्र संगीत,1,रवीन्द्र सहाय वर्मा,1,रसोई,1,रांगेय राघव,1,राकेश अचल,3,राकेश दुबे,1,राकेश बिहारी,1,राकेश भ्रमर,5,राकेश मिश्र,2,राजकुमार कुम्भज,1,राजन कुमार,2,राजशेखर चौबे,6,राजीव रंजन उपाध्याय,11,राजेन्द्र कुमार,1,राजेन्द्र विजय,1,राजेश कुमार,1,राजेश गोसाईं,2,राजेश जोशी,1,राधा कृष्ण,1,राधाकृष्ण,1,राधेश्याम द्विवेदी,5,राम कृष्ण खुराना,6,राम शिव मूर्ति यादव,1,रामचंद्र शुक्ल,1,रामचन्द्र शुक्ल,1,रामचरन गुप्त,5,रामवृक्ष सिंह,10,रावण,1,राहुल कुमार,1,राहुल सिंह,1,रिंकी मिश्रा,1,रिचर्ड फाइनमेन,1,रिलायंस इन्फोकाम,1,रीटा शहाणी,1,रेंसमवेयर,1,रेणु कुमारी,1,रेवती रमण शर्मा,1,रोहित रुसिया,1,लक्ष्मी यादव,6,लक्ष्मीकांत मुकुल,2,लक्ष्मीकांत वैष्णव,1,लखमी खिलाणी,1,लघु कथा,211,लघुकथा,791,लतीफ घोंघी,1,ललित ग,1,ललित गर्ग,13,ललित निबंध,16,ललित साहू जख्मी,1,ललिता भाटिया,2,लाल पुष्प,1,लावण्या दीपक शाह,1,लीलाधर मंडलोई,1,लू सुन,1,लूट,1,लोक,1,लोककथा,302,लोकतंत्र का दर्द,1,लोकमित्र,1,लोकेन्द्र सिंह,3,विकास कुमार,1,विजय केसरी,1,विजय शिंदे,1,विज्ञान कथा,57,विद्यानंद कुमार,1,विनय भारत,1,विनीत कुमार,2,विनीता शुक्ला,3,विनोद कुमार दवे,4,विनोद तिवारी,1,विनोद मल्ल,1,विभा खरे,1,विमल चन्द्राकर,1,विमल सिंह,1,विरल पटेल,1,विविध,1,विविधा,1,विवेक प्रियदर्शी,1,विवेक रंजन श्रीवास्तव,5,विवेक सक्सेना,1,विवेकानंद,1,विवेकानन्द,1,विश्वंभर नाथ शर्मा कौशिक,2,विश्वनाथ प्रसाद तिवारी,1,विष्णु नागर,1,विष्णु प्रभाकर,1,वीणा भाटिया,15,वीरेन्द्र सरल,10,वेणीशंकर पटेल ब्रज,1,वेलेंटाइन,3,वेलेंटाइन डे,2,वैभव सिंह,1,व्यंग्य,1864,व्यंग्य के बहाने,2,व्यंग्य जुगलबंदी,17,व्यथित हृदय,2,शंकर पाटील,1,शगुन अग्रवाल,1,शबनम शर्मा,7,शब्द संधान,17,शम्भूनाथ,1,शरद कोकास,2,शशांक मिश्र भारती,8,शशिकांत सिंह,12,शहीद भगतसिंह,1,शामिख़ फ़राज़,1,शारदा नरेन्द्र मेहता,1,शालिनी तिवारी,8,शालिनी मुखरैया,6,शिक्षक दिवस,6,शिवकुमार कश्यप,1,शिवप्रसाद कमल,1,शिवरात्रि,1,शिवेन्‍द्र प्रताप त्रिपाठी,1,शीला नरेन्द्र त्रिवेदी,1,शुभम श्री,1,शुभ्रता मिश्रा,1,शेखर मलिक,1,शेषनाथ प्रसाद,1,शैलेन्द्र सरस्वती,3,शैलेश त्रिपाठी,2,शौचालय,1,श्याम गुप्त,3,श्याम सखा श्याम,1,श्याम सुशील,2,श्रीनाथ सिंह,6,श्रीमती तारा सिंह,2,श्रीमद्भगवद्गीता,1,श्रृंगी,1,श्वेता अरोड़ा,1,संजय दुबे,4,संजय सक्सेना,1,संजीव,1,संजीव ठाकुर,2,संद मदर टेरेसा,1,संदीप तोमर,1,संपादकीय,3,संस्मरण,616,संस्मरण लेखन पुरस्कार 2018,128,सच्चिदानंद हीरानंद वात्स्यायन,1,सतीश कुमार त्रिपाठी,2,सपना महेश,1,सपना मांगलिक,1,समीक्षा,668,सरिता पन्थी,1,सविता मिश्रा,1,साइबर अपराध,1,साइबर क्राइम,1,साक्षात्कार,14,सागर यादव जख्मी,1,सार्थक देवांगन,2,सालिम मियाँ,1,साहित्य समाचार,49,साहित्यिक गतिविधियाँ,179,साहित्यिक बगिया,1,सिंहासन बत्तीसी,1,सिद्धार्थ जगन्नाथ जोशी,1,सी.बी.श्रीवास्तव विदग्ध,1,सीताराम गुप्ता,1,सीताराम साहू,1,सीमा असीम सक्सेना,1,सीमा शाहजी,1,सुगन आहूजा,1,सुचिंता कुमारी,1,सुधा गुप्ता अमृता,1,सुधा गोयल नवीन,1,सुधेंदु पटेल,1,सुनीता काम्बोज,1,सुनील जाधव,1,सुभाष चंदर,1,सुभाष चन्द्र कुशवाहा,1,सुभाष नीरव,1,सुभाष लखोटिया,1,सुमन,1,सुमन गौड़,1,सुरभि बेहेरा,1,सुरेन्द्र चौधरी,1,सुरेन्द्र वर्मा,62,सुरेश चन्द्र,1,सुरेश चन्द्र दास,1,सुविचार,1,सुशांत सुप्रिय,4,सुशील कुमार शर्मा,24,सुशील यादव,6,सुशील शर्मा,16,सुषमा गुप्ता,20,सुषमा श्रीवास्तव,2,सूरज प्रकाश,1,सूर्य बाला,1,सूर्यकांत मिश्रा,14,सूर्यकुमार पांडेय,2,सेल्फी,1,सौमित्र,1,सौरभ मालवीय,4,स्नेहमयी चौधरी,1,स्वच्छ भारत,1,स्वतंत्रता दिवस,3,स्वराज सेनानी,1,हबीब तनवीर,1,हरि भटनागर,6,हरि हिमथाणी,1,हरिकांत जेठवाणी,1,हरिवंश राय बच्चन,1,हरिशंकर गजानंद प्रसाद देवांगन,4,हरिशंकर परसाई,23,हरीश कुमार,1,हरीश गोयल,1,हरीश नवल,1,हरीश भादानी,1,हरीश सम्यक,2,हरे प्रकाश उपाध्याय,1,हाइकु,5,हाइगा,1,हास-परिहास,38,हास्य,51,हास्य-व्यंग्य,51,हिंदी दिवस विशेष,9,हुस्न तबस्सुम 'निहाँ',1,biography,1,dohe,3,hindi divas,6,hindi sahitya,1,indian art,1,kavita,3,review,1,satire,1,shatak,3,tevari,3,undefined,1,
ltr
item
रचनाकार: कृष्ण गोपाल सिन्हा की कहानी - संकल्प
कृष्ण गोपाल सिन्हा की कहानी - संकल्प
http://3.bp.blogspot.com/_t-eJZb6SGWU/TcY2vdauqjI/AAAAAAAAJ3I/eKL0JR2KP98/clip_image002%5B3%5D.jpg?imgmax=800
http://3.bp.blogspot.com/_t-eJZb6SGWU/TcY2vdauqjI/AAAAAAAAJ3I/eKL0JR2KP98/s72-c/clip_image002%5B3%5D.jpg?imgmax=800
रचनाकार
http://www.rachanakar.org/2011/07/blog-post_6616.html
http://www.rachanakar.org/
http://www.rachanakar.org/
http://www.rachanakar.org/2011/07/blog-post_6616.html
true
15182217
UTF-8
सभी पोस्ट लोड किया गया कोई पोस्ट नहीं मिला सभी देखें आगे पढ़ें जवाब दें जवाब रद्द करें मिटाएँ द्वारा मुखपृष्ठ पृष्ठ पोस्ट सभी देखें आपके लिए और रचनाएँ विषय ग्रंथालय खोजें सभी पोस्ट आपके निवेदन से संबंधित कोई पोस्ट नहीं मिला मुख पृष्ठ पर वापस रविवार सोमवार मंगलवार बुधवार गुरूवार शुक्रवार शनिवार रवि सो मं बु गु शु शनि जनवरी फरवरी मार्च अप्रैल मई जून जुलाई अगस्त सितंबर अक्तूबर नवंबर दिसंबर जन फर मार्च अप्रैल मई जून जुला अग सितं अक्तू नवं दिसं अभी अभी 1 मिनट पहले $$1$$ minutes ago 1 घंटा पहले $$1$$ hours ago कल $$1$$ days ago $$1$$ weeks ago 5 सप्ताह से भी पहले फॉलोअर फॉलो करें यह प्रीमियम सामग्री तालाबंद है चरण 1: साझा करें. चरण 2: ताला खोलने के लिए साझा किए लिंक पर क्लिक करें सभी कोड कॉपी करें सभी कोड चुनें सभी कोड आपके क्लिपबोर्ड में कॉपी हैं कोड / टैक्स्ट कॉपी नहीं किया जा सका. कॉपी करने के लिए [CTRL]+[C] (या Mac पर CMD+C ) कुंजियाँ दबाएँ