नवेन्‍दु महोदय की लघुकथा - भारत और इंडिया - एक सत्‍यकथा

रविवार को इधर एम जी रोड की एक बिल्‍डिंग के पैसेज में ‘भारत' के परिवारों के बच्‍चे क्रिकेट खेल पा रहे थे। उधर एम जी रोड पर इंडिया' का एक परिवार अपनी चमचमाती कार में विचरण कर आनंदित था। बिल्‍डिंग के बाहर गटर का ढक्‍कन टूटा है। इंडिया वाला उसे देख न सका और कार का एक पहिया गटर में फंस गया। इंडिया वाला उतर कर कार की परिक्रमा करने लगा। उसे कुछ नहीं सूझ रहा था। इतने में भारत वालों की नज़र उस पर पड़ी और वे अनायास ही कार की ओर दौड़े। कुछ ही सैकंडों में कार को गटर से निकाल कर वापस अपनी ‘पिच' की ओर ऐसे दौड़े मानों कुछ भी न हुआ हो। इंडिया वाला बस उनकी ओर ‘वेव' करता रह गया। एक बार फिर उसे कुछ नहीं सूझ रहा था।

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संपर्क: - नवेन्‍दु महोदय, प्‍लाट नं. 17, सेक्‍टर ‘बी', रविशंकर शुक्‍ल नगर, इन्‍दौर-452 008.

navendu.mahodaya@yahoo.com

लेखक परिचय- शिक्षा से इंजीनियर, पेशे से मेनेजमेंट कंसलटेंट; लेखन कार्य में गंभीर रूचि। सामान्‍य लेख पूर्व में दैनिक भास्‍कर एवं नईदुनिया आदि अखबारों में छप चुके हैं। मेनेजमेंट के सम्‍बन्‍धी लेख विषय की पत्रिकाओं में छप चुके हैं।

1 टिप्पणी "नवेन्‍दु महोदय की लघुकथा - भारत और इंडिया - एक सत्‍यकथा"

  1. sachchai hai pashchim se aaneet vairas ne jyadatar bhartiyon ko indian bna diya hai par bhrtiya hi sabse aage....

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