बुधवार, 13 जुलाई 2011

कान्ति प्रकाश त्यागी की हास्य व्यंग्य कविता - गरीब रेखा

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ग़रीब रेखा
डा० कान्ति प्रकाश त्यागी

यह ग़रीबी रेखा है, ग़रीबी उन्मूलन
अथवा ग़रीबों का पूर्णतया उन्मूलन
यह ग़रीब की रेखा क्या है ?.
कौन है, किसने उसे देखा है ?.
यह ग़रीब की रेखा है :
उसकी लाचारी, बीमारी,बेरोज़गारी,
भूख़मरी, शोषण, चिन्ता,
बचपन में ही बुढ़ापे जैसी झुर्रियां,
तन न ढकने की मज़बूरियां, 
भूख़ से पेट में पड़ी लकीरें,
रेत में आशा की लकीरें,
समुद्र में उठती हुई लहरें,
भाग्य की मिटी लकीरें,
नितदिन बिगड़ती तकदीरें,
असफल होती हुई तदबीरें,

यह रेखा उसकी बेटियां है, उसे बड़े ही लाड़ चाव से पाला है
उसे खिलाने न निवाला है, स्वयं के लिए न चाय का प्याला है

उसकी रेखा को नेता, अभिनेता
पत्रकार, समाचार, अर्थशात्री, समाज़शात्री
हर कोई भुनाने में लगा है
हर कोई अपनी भाषा में , परिभाषा बताने लगा है

फ़िल्म निर्माता का, आस्कर पुरुस्कार का चक्कर,
ग़रीब- रेखा को अधिकाधिक दिखाने की टक्कर।
भूख़ से शरीर हो गया, कंकाल अस्थि पंजर,
जिसका शरीर नोचना चाहते हैं, कितने भ्रमर।
बलात्कार बाद, घोंप दिया जाता है उसे खंज़र,
जिसकी रक्षा करने आए न अभी तक नटवर।

राजनेता भाषण देकर , राजनैतिक लाभ चाहता है,
मीडिया पत्रकार केवल , बिक्री बढ़ाना चाहता है।
समाज़शास्त्री, समाज़ में नाम कमाना चाहता है,
शोध कर्ता, बस शोध कर उपाधि लेना चाहता है।

यह रेखा कभी छोटी हो जाती है,
कभी अचानक बड़ी हो जाती है।
कुछ इसको छोटा करने में लगे हैं,
कुछ इसको बड़ा दिखाने में लगे हैं।

ग़रीब रेखा है वह क्षितिज़ रेखा,
जिसे कभी  किसी ने नहीं देखा।
अपनी अपनी कल्पना में देखा,
जैसा देखा, वैसा दिया लेखा जोखा।

ग़रीब रेखा के ज्ञाता, आयेंगे माँगने तेरा वोट,
पांच साल सारोकर नहीं, बाटेंगे एक दिन नोट।
तुझको रेखा से एक दिन ऊपर उठायेंगे,
ख़ुद भिखारी बन कर, तुझे दाता बनायेंगे।

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Dr.K.P.Tyagi
Prof.& HOD. Mech.Engg.Dept. & Dean of Students Welfare
Krishna institute of Engineering and Technology
13 KM. Stone, Ghaziabad-Meerut Road, 201206, Ghaziabad, UP

4 blogger-facebook:

  1. ग़रीब रेखा के ज्ञाता, आयेंगे माँगने तेरा वोट,
    पांच साल सारोकर नहीं, बाटेंगे एक दिन नोट।
    तुझको रेखा से एक दिन ऊपर उठायेंगे,
    ख़ुद भिखारी बन कर, तुझे दाता बनायेंगे।
    Kaisi vidambana hai ye!

    उत्तर देंहटाएं
  2. गरीबी की रेखा से काफी ऊपर की कविता....कान्ति जी ने इस विवादित रेखा पर टॉर्च मारकर अच्छा प्रकाश डाला है...

    उत्तर देंहटाएं

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