शनिवार, 23 जुलाई 2011

सुमित शर्मा की कविता - अब और क्या बाकी है...


माँ की छाती पर एक घाव और,
हृदय रौंदता एक पाँव और,
लहू में रंगी लाशों की, निकली एक और झाँकी है,
अब और कहो क्‍या बाकी हैं?

विपरीत धारा का एक बहाव और,
हिचकोले खाती एक नाव और,
पथ-जर्जर, दुर्गम-राह, तूफानी-गति हवा की है,
अब और कहो क्‍या बाकी है?

पर प्रण प्रगति का हैं अटल,
फिर वार करो या कोई छल,
बढ़ते कदम पथ पर हमारे, तिरछी नजर जहां की है,
अब और कहो क्‍या बाकी है?

फिर चहल-पहल, सब कुछ जारी,
आतंक पर हिम्‍मत भारी,
एक अंधियारी रात ढली, फिर उजली किरण सुबह की है,
अब और कहो क्‍या बाकी है?
                       -सुमित शर्मा

 

परिचय
नाम - सुमित शर्मा
जन्‍मतिथि - 31 जनवरी 1992
पता -  तहसील चौराहा, गायत्री कालोनी,
       खिलचीपुर, जिला- राजगढ़, म.प्र.
शिक्षा - बी.ई.-चतुर्थ वर्ष (कम्‍प्‍यूटर साइंस) अध्‍ययनरत
साहित्‍यिक रचनाएँ  - चलती रहेगी मधुशाला(काव्‍य) , रिश्‍ते (उपन्‍यास), कुछ कवितायें/गजलें, लघु कहानियाँ ।  ( सभी अप्रकाशित )

5 blogger-facebook:

  1. विपरीत धारा का एक बहाव और,
    हिचकोले खाती एक नाव और,
    पथ-जर्जर, दुर्गम-राह, तूफानी-गति हवा की है,
    अब और कहो क्‍या बाकी है?

    अच्छा लिखते हो सुमित प्रवाह बनाये रखो तुममे साहित्य सेवा का मार्ग प्रशस्त होगा

    उत्तर देंहटाएं
  2. फिर चहल-पहल, सब कुछ जारी,
    आतंक पर हिम्‍मत भारी,
    एक अंधियारी रात ढली, फिर उजली किरण सुबह की है,
    अब और कहो क्‍या बाकी है?


    बहुत अच्छा लिखा है सुमित,
    विवेक जैन vivj2000.blogspot.com

    उत्तर देंहटाएं
  3. बहुत बढ़िया है...उम्र के हिसाब से तो और भी.

    उत्तर देंहटाएं
  4. बेनामी9:26 pm

    wah sumit wah sumit

    उत्तर देंहटाएं

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