एस. के. पाण्डेय की बाल कविता - बरसात

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बच्चों के लिए: बरसात

(१)

गर्मी गई आई बरसात ।

दीखे काली काली रात ।।

गर्म हवा पुरानी बात ।

हुई लूक से मिली निजात ।।

(२)

काली घटा सूर्य को ढाके ।

दिन में निशा अँधेरा झाके ।।

बादल गर्जे दामिन दमके ।

रह रह के घन से जल छलके ।।

(३)

दादुर, मोर, पपीहा बोले ।

कुहूँ-कुहूँ कोयल मधु घोले ।।

पक्षी नहाएं निज पर खोले ।

हवा सुहानी शीतल डोले ।।

(४)

हरी-भरी हुई धरती सारी ।

पेड़ बगीचे और कियारी ।।

नदी, ताल में पानी पानी ।

बर्षा का न कोई सानी ।।

(५)

पशु-पक्षी, जीव-जन्तु, किसान ।

कुछ हुए खुश, कुछ परेशान ।।

बहुतों में तो आई जान ।

खिल गई चेहरे पर मुस्कान ।।

(६)

खोजे भी न मिलती धूल ।

खिल गईं कलियाँ खिल गए फूल ।।

खुल गया फिर से भी स्कूल ।

पढ़ने जाओ मस्ती भूल ।।

(७)

रेन कोट या लेकर छाते ।

लोग सभी अब आते जाते ।।

सभल न चलते सो पछताते ।

कीचड़ में सन घर को आते ।।

(८)

सभल-सभल के आओ जाओ ।

नाहक में मत उधम मचाओ ।।

यहाँ-वहाँ मत कूदो-उछलो ।

सोच समझके घर से निकलो ।।

(९)

नहीं तो लग जायेगी चोट ।

जहमत होगी नाना खोट ।।

डॉक्टर ले जायेगा नोट ।

कड़ुवी दवा पिलाये घोट ।।

(१०)

दोस्तों में पड़ सकती फूट ।

पढ़ाई भी जायेगी छूट ।।

ऊपर से मम्मी की डांट ।

मिलेगा न खाने को चाट ।।

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डॉ एस के पाण्डेय,

समशापुर (उ.प्र.) ।

http://www.sriramprabhukripa.blogspot.com /

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