सोमवार, 4 जुलाई 2011

एस. के. पाण्डेय की बाल कविता - बरसात

image

बच्चों के लिए: बरसात

(१)

गर्मी गई आई बरसात ।

दीखे काली काली रात ।।

गर्म हवा पुरानी बात ।

हुई लूक से मिली निजात ।।

(२)

काली घटा सूर्य को ढाके ।

दिन में निशा अँधेरा झाके ।।

बादल गर्जे दामिन दमके ।

रह रह के घन से जल छलके ।।

(३)

दादुर, मोर, पपीहा बोले ।

कुहूँ-कुहूँ कोयल मधु घोले ।।

पक्षी नहाएं निज पर खोले ।

हवा सुहानी शीतल डोले ।।

(४)

हरी-भरी हुई धरती सारी ।

पेड़ बगीचे और कियारी ।।

नदी, ताल में पानी पानी ।

बर्षा का न कोई सानी ।।

(५)

पशु-पक्षी, जीव-जन्तु, किसान ।

कुछ हुए खुश, कुछ परेशान ।।

बहुतों में तो आई जान ।

खिल गई चेहरे पर मुस्कान ।।

(६)

खोजे भी न मिलती धूल ।

खिल गईं कलियाँ खिल गए फूल ।।

खुल गया फिर से भी स्कूल ।

पढ़ने जाओ मस्ती भूल ।।

(७)

रेन कोट या लेकर छाते ।

लोग सभी अब आते जाते ।।

सभल न चलते सो पछताते ।

कीचड़ में सन घर को आते ।।

(८)

सभल-सभल के आओ जाओ ।

नाहक में मत उधम मचाओ ।।

यहाँ-वहाँ मत कूदो-उछलो ।

सोच समझके घर से निकलो ।।

(९)

नहीं तो लग जायेगी चोट ।

जहमत होगी नाना खोट ।।

डॉक्टर ले जायेगा नोट ।

कड़ुवी दवा पिलाये घोट ।।

(१०)

दोस्तों में पड़ सकती फूट ।

पढ़ाई भी जायेगी छूट ।।

ऊपर से मम्मी की डांट ।

मिलेगा न खाने को चाट ।।

------------

डॉ एस के पाण्डेय,

समशापुर (उ.प्र.) ।

http://www.sriramprabhukripa.blogspot.com /

*********

2 blogger-facebook:

रचनाओं पर आपकी बेबाक समीक्षा व अमूल्य टिप्पणियों के लिए आपका हार्दिक धन्यवाद.

स्पैम टिप्पणियों (वायरस डाउनलोडर युक्त कड़ियों वाले) की रोकथाम हेतु टिप्पणियों का मॉडरेशन लागू है. अतः आपकी टिप्पणियों को यहाँ प्रकट होने में कुछ समय लग सकता है.

------------------------------------------------------------

प्रकाशनार्थ रचनाएँ आमंत्रित हैं...

1 करोड़ से अधिक पृष्ठ-पठन, 1.5 लाख गूगल+ अनुसरणकर्ता, 1500 से अधिक सदस्य

/ 2,500 से अधिक नियमित ग्राहक तथा 2000 से अधिक फ़ेसबुक प्रसंशक
/ प्रतिमाह 10,00,000(दस लाख) से अधिक पाठक
/ 10,000 से अधिक हर विधा की साहित्यिक रचनाएँ प्रकाशित
/ आप भी अपनी रचनाओं को इंटरनेट के विशाल पाठक वर्ग का नया विस्तार दें, आज ही नाका से जुड़ें. नाका में प्रकाशनार्थ रचनाओं का स्वागत है.किसी भी फ़ॉन्ट, टैक्स्ट, वर्ड या पेजमेकर फ़ाइल में रचनाएँ rachanakar@gmail.com पर ईमेल करें. अधिक जानकारी के लिए यह लिंक देखें - http://www.rachanakar.org/2005/09/blog-post_28.html

विश्व की पहली, यूनिकोडित हिंदी की सर्वाधिक प्रसारित, समृद्ध व लोकप्रिय ई-पत्रिका - नाका

मनपसंद रचनाएँ खोजकर पढ़ें
गूगल प्ले स्टोर से रचनाकार ऐप्प https://play.google.com/store/apps/details?id=com.rachanakar.org इंस्टाल करें. image

--------