सोमवार, 4 जुलाई 2011

सुमित शर्मा की कविता - वक्त ने देखा

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मैंने इतिहास के पन्‍नों में

युग-युग देखे, दुःख-सुख देखे,

पर लोकतंत्र के नाम पर

ऐसी व्‍यवस्‍थित लूट नहीं ।

 

मैंने राजसिंहासन पर

गौरी देखे, तुगलक देखे,

पर राजद्रोह के मुकदमों में

अजमल-कसाब सी छूट नहीं ।

 

मैंने सत्‍ता के मंचो पर

बर्बर देखे, बाबर देखे,

पर राजनीति के प्रपंचो में

इतने सारे झूठ नहीं ।

 

मैंने सत्‍ता की गलियों में

हिटलर देखे, डायर देखे,

पर लोकतंत्र को घायल करते

दिल्‍ली वाले ठूँठ नहीं ।

 

सैकड़ों बरस गुलामी के,

फिर घरवाले ही चोर बने,

भारत, तेरी तकदीर में

इससे बड़ी कोई फूट नहीं ।

 

-सुमित शर्मा

कवि परिचय-

नाम - सुमित शर्मा

जन्मतिथि - 31 जनवरी 1992

पता - तहसील चौराहा, गायत्री कालोनी,

खिलचीपुर, जिला- राजगढ़(म.प्र.)

शिक्षा - बी.ई.-चतुर्थ वर्ष (कम्‍प्‍यूटर साइंस) अध्‍ययनरत

साहित्‍यिक रचनाएँ - चलती रहेगी मधुशाला (काव्‍य) , रिश्ते (उपन्‍यास), कुछ कविताएँ/गजलें, लघु कहानियाँ । (सभी अप्रकाशित)

8 blogger-facebook:

  1. sab aprakashit kyu hai hamare hak se hame vanchit mat rakhiye . itna achchha likhate hai padane ka mauka dijiye.
    sakshi dixit

    उत्तर देंहटाएं
  2. Had kar di aapne, apne khyaalon ko bahut achhi zubaan de di.kamyaabi apke kadam choome. Thanks for sharing with us,

    उत्तर देंहटाएं
  3. बहुत बढिया लिखा है आपने ..ऐसे ही लिखते रहे शुभकामनाये

    उत्तर देंहटाएं
  4. बहुत बढिया ... .. लिखते रहे शुभकामनाये

    उत्तर देंहटाएं
  5. बेहतरीन अभिव्यक्ति , बधाई।

    उत्तर देंहटाएं
  6. बेनामी9:26 pm

    abe h kaha......????
    or ghar se kab aaya...??
    or tera call kyu ni lag raha h....??

    उत्तर देंहटाएं
  7. सुमित जी,
    हमने आपने इतिहास के पन्नों में ऐसे कारनामें नहीं देखे तो क्या हुआ, आनेवाली पीढियां तो देखेंगी?!
    बहरहाल अच्छी खोज - खबर ली है आपने आज के सत्ताधारियों की ...

    उत्तर देंहटाएं

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