शुक्रवार, 26 अगस्त 2011

कहानी संग्रह - आदमखोर 1 - भूमिका

aadamkhor1

कहानी संग्रह

आदमखोर

(दहेज विषयक कहानियाँ)

संपादक

डॉ0 दिनेश पाठक ‘शशि’

प्रथम संस्करण : 2008

मूल्य : 150

प्रकाशन : जाह्नवी प्रकाशन

विवेक विहार,

शाहदरा दिल्ली-32

शब्द संयोजन : सागर कम्प्यूटर्स, मथुरा

----

भूमिका

कहानी गद्य साहित्य की एक छोटी और अत्यन्त सुसंघटित व अपने में पूर्ण कथारूप है। न जाने कितने रूपों में कहानी मानव जीवन के प्रत्येक क्षेत्र, और प्रत्येक काल में घुली मिली रहती है। हममें से प्रत्येक व्यक्ति प्रतिदिन सैकड़ों कहानियों से रूबरू होता है।

कहानी की परम्परा अत्यन्त प्राचीन है। कहानी, अकहानी, नई कहानी, दलित कहानी आदि अनेक रूपों में कहानी लिखी गई और कहानी के विभिन्न रूपों को लेकर अनेक आन्दोलन भी चले।

देशकाल एवं वातावरण के अनुरूप कहानी के रूपों में परिवर्तन होता ही रहता है। प्राचीन काल में धार्मिक आचार, आध्यात्मिक तत्व-चिंतन एवं नीतिपरक कहानियों की प्रमुखता रही फिर राजा-महाराजाओं के शौर्य और प्रेम, ज्ञान और न्याय, वैराग्य आदि पर कहानियाँ लिखी गईं।

चरित नायकों एवं युग-प्रेम की स्वाभाविक प्रवृतियों के कारण कथा-साहित्य की परम्परा का निरन्तर विकास होता रहा है। हिन्दी के रीतिकाल तक कहानी में प्रेम की प्रवृति देखी गई किन्तु हिन्दी के वर्तमान काल में कहानी के नये-नये रूप देखने को मिलते हैं जो अति भौतिकतावादी, आपाधापी से पूर्ण युग के यथार्थ के खुरदरे धरातल के दिग्दर्शन भी कराते हैं।

सम्बन्धों में तेजी से आ रहे बदलाव, आत्मीयता का अभाव, धन की बढ़ती लालसा एवं बुजुर्गों के प्रति उपेक्षाभाव में त्वरित गति से बढ़ोत्तरी हुई है। नारी के पूज्या रूप को लीलता दहेज-दानव आदि अनेक ज्वलन्त समस्याएँ आज समाज में उग्र रूप धारण करती जा रही हैं जिनपर हिन्दी साहित्य की व्यंग्य, कहानी, लघुकथा आदि अनेक विधाओं में रचनाकार अपनी लेखनी चला रहे हैं। प्रत्येक रचनाकार की अपनी विशिष्ठ शैली होती है। कई रचनाकार अपनी शैली की विशिष्टता से एक ही विषय पर कई-कई रचनाएं, विभिन्न कोंणों से प्रस्तुत करने की अद्भुत क्षमता रखते हैं।

इस संकलन की सभी कहानियाँ रचनाकारों से विशेष आग्रहकर, केवल और केवल दहेज विषय पर लिखाई गई हैं। इसमें समाहित कई रचनाओं के रचनाकार ऐसे भी हैं जिन्होंने दहेज के अनेक रूपों का उद्घाटन अपनी विशिष्ठ शैली में , विभिन्न रूपों में बहुत ही मार्मिक ढंग से किया है।

संकलन में संकलित रचनाओं के रचनाकारों का मैं हृदय से आभारी हूँ जिन्होंने मेरे निवेदन को स्वीकार कर अपने अमूल्य समय की आहुति दे,मेरे इस

प्रयास को सफल बनाने में सहयोग किया।

‘यत्र नार्यस्तु पूज्यन्ते, रमन्ते तत्र देवता’’ को मानने वाले देश में आज नारी को केवल भोग्या और दहेज जुटाने का साधन माना जा रहा है। पूज्य भाव तो दूर, आत्म स्वरूपा पत्नी को दहेज की खातिर कितनी पीड़ादायक यंत्रणायें दी जाती हैं, संकलन की कहानियों से प्रकट है। संकलन में संकलित रचनाकारों ने समाज के यथार्थ को ऐसा चित्रित किया है कि पढ़ते-पढ़ते रोंगटे खड़े हो जाते हैं।

संकलन हेतु जिन मित्रेां ने मुझे विशेष सहयोग दिया उनमें गाजियाबाद के श्री कालीचरण प्रेमी, दिल्ली के श्री किशोर श्रीवास्तव एवं डॉ.कुहेली भट्टाचार्य, लखनऊ से डॉ. राजेन्द्र परदेशी, जयपुर की सुश्री माधुरी शास्त्री, आगरा की डॉ.उषा यादव,भोपाल की सुश्री मालती बसंत, होशंगाबाद के डॉ.जगदीश व्योम तथा भुवनेश्वर के श्री अरुण कुमार जैन एवं मथुरा के डॉ.अनिल गहलौत, श्री मदनमोहन शर्मा‘अरविन्द’ सितारगंज की श्रीमती आशा शैली के नाम प्रमुख हैं। छोटे पुत्र सागरदीप पाठक के पुस्तक की तैयारी में मिले सहयोग को भी नकारा नहीं जा सकता साथ ही पुस्तक के प्रकाशन हेतु जाह्नवी प्रकाशन के मालिक श्री अतुल गुप्ता के सहयोग को भी। इस संकलन की अधिकांश कहानियाँ पाठक-मन को झकझोरने में, नेत्रेां से अश्रुधारा बहाने और कुछ सोचने पर बाध्य करने में पूर्ण समर्थ हैं, रचनाओं के संपादन के दौरान ऐसा मैंने महसूस किया है। इस संकलन को पढ़ने के बाद यदि समाज के कुछ व्यक्ति भी दहेज जैसी कुत्सित और वीभत्स इस कुप्रथा को दूर करने में अपने को सहायक बना सके तो मैं अपना श्रम सार्थक समझूंगा। आपकी प्रतिक्रियाओं का इंतजार रहेगा।

डॉ.दिनेश पाठक‘शशि’

28, सारंगविहार, पोस्ट-रिफायनरी नगर

मथुरा-281006

---

अनुक्रमणिका

1 आदमखोर डॉ. उषा यादव

2 पत्थर की आँख श्रीमती पुष्पा रघु

3 संघर्ष पथ सुश्री उर्मि कृष्ण

4 तोड़ने की पहल डॉ. सरला अग्रवाल

5 यह भी सच है। डॉ. सरला अग्रवाल

6 असली सोना पं. उमाशंकर दीक्षित

7 चक्रवात श्रीमती मंजुला गुप्ता

8 सच्चाई श्रीमती मंजुला गुप्ता

9 चेतना कुहेली भट्टाचार्य

10 लालसा कुहेली भट्टाचार्य

11 महत्वाकांक्षा की पराकाष्ठा डॉ0 सुशीला शील

12 किसी भी शहर में धर्मपाल साहिल

13 नीड़ के पंछी श्रीमती मंजुला गुप्ता

14 आत्मदाह डॉ. प्रेमदत्त मिश्र मैथिल

15 दहेज श्रीमती राज चतुर्वेदी

16 सीढ़ियाँ चढ़ती धूप श्रीमती माधुरी शास्त्री

17 दहेज के लिए श्री चरण सिंह जादौन

18 मकड़जाल श्रीमती शशि पाठक

19 एक और अभिमन्यु डॉ0 दिनेश पाठक‘शशि’

(क्रमशः अगले अंक में जारी...)

0 blogger-facebook

एक टिप्पणी भेजें

रचनाओं पर आपकी बेबाक समीक्षा व अमूल्य टिप्पणियों के लिए आपका हार्दिक धन्यवाद.

स्पैम टिप्पणियों (वायरस डाउनलोडर युक्त कड़ियों वाले) की रोकथाम हेतु टिप्पणियों का मॉडरेशन लागू है. अतः आपकी टिप्पणियों को यहाँ प्रकट होने में कुछ समय लग सकता है.

----

1.5 लाख गूगल+ अनुसरणकर्ता, 1500 से अधिक सदस्य

/ 2,500 से अधिक नियमित ग्राहक
/ प्रतिमाह 10,00,000(दस लाख) से अधिक पाठक
/ 10,000 से अधिक हर विधा की साहित्यिक रचनाएँ प्रकाशित
/ आप भी अपनी रचनाओं को विशाल पाठक वर्ग का नया विस्तार दें, आज ही नाका से जुड़ें. नाका में प्रकाशनार्थ रचनाओं का स्वागत है.अपनी रचनाएँ rachanakar@gmail.com पर ईमेल करें. अधिक जानकारी के लिए यह लिंक देखें - http://www.rachanakar.org/2005/09/blog-post_28.html

विश्व की पहली, यूनिकोडित हिंदी की सर्वाधिक प्रसारित, समृद्ध व लोकप्रिय ई-पत्रिका - नाका

मनपसंद रचनाएँ खोजकर पढ़ें
गूगल प्ले स्टोर से रचनाकार ऐप्प https://play.google.com/store/apps/details?id=com.rachanakar.org इंस्टाल करें. image

--------