शुक्रवार, 12 अगस्त 2011

शंकर लाल कुमावत की दो कविताएँ

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जिंदगी

खुश हो कर जीने के लिये है जिंदगी

हँसने और हँसाने के लिए है जिंदगी

खुश हो कर जीने के लिये है जिंदगी |

 

मुसीबतें बहुत आयेगी हौसला तोड़ जाएगी

मगर, हर हाल में

उठकर खड़े हो जाने के लिए है जिंदगी

खुश हो कर जीने के लिये है जिंदगी  |

 

बाधायें बहुत आएगी जीवन में

मगर, हर बाधा को लाँघ कर

मंजिल पा जाने के लिए है जिंदगी

खुश हो कर जीने के लिये है जिंदगी  | 

 

दुःख के भंवर बहुत आयेंगे,

अवसाद जीवन में भर जायेंगे 

मगर, हर दुःख को सहकर

आनन्द पा जाने के लिए है जिंदगी

खुश हो कर जीने के लिये है जिंदगी  |

 

झूठ के वैभव डगमगायेंगे कदम

मगर, सत्य के मार्ग से

शिखर पाने जाने के लिए है जिंदगी

खुश हो कर जीने के लिये है जिंदगी  |

 

मृत्यु तो आयेगी एक दिन जरुर,

मगर, उससे पहले खुद को

अमर कर जाने के लिए है जिंदगी

खुश हो कर जीने के लिये है जिंदगी  |

---

 

मुंबई में आतंकी हमला:- एक सवाल

कल फिर मुंबई में धमाका हो गया

कई जाने गई कई घायल हुए

किसी का बाप किसी का भाई

किसी की माँ किसी का बेटा

वक्त से पहले ही सदा के लिए सो गया

देश एक बार फिर से सहम गया

क्योकि कल फिर मुंबई में धमाका हो गया|

 

टीवी पर खबर देखते हुए

एक बच्चा बोला

बार-बार हमारे देश में ही ऐसा क्यों होता है ?

क्यों हर बार हमारा ही खुफिया तंत्र

इतना लाचार होता है ?
क्यों हमारा ही सुरक्षा तंत्र
हर बार असफल होता है ?

सुना है सरहदों पर सेनाओं का कड़ा पहरा है

आंतरिक सुरक्षा का भी पक्का घेरा है

फिर क्यों हर बार यहाँ पर ही

लाशों का मंजर होता है ?

क्यों सुनाई नहीं देती वो चीखे

क्या आदमी सत्ता के मद में

इतना बहरा होता है ?


सवाल सुनकर लगा

बच्चा सही कह रहा है

सवालों का जबाब देने के लिए

टीवी का चैनल बदला तो देखा

घटना पर प्रतिक्रियाओं का दौर चल रहा था
सत्ता पक्ष वाले पाकिस्तान को दोष दे रहे थे

अमेरिका से सहायता की बाट जो रहे थे
विपक्ष वाले प्रधान और गृहमंत्री के

इस्तीफे को रो रहे थे
पुलिस वाले ने बताया

हमारे जवान जान पर खेल कर

हमलों को रोक तो ले

लेकिन पीछे हट जाते हैं

जब देखते हैं

की हमारे राजनेता

आतंकियों को सम्मान से ‘जी’

और शहीदों को गाली देते हैं|

 

खुफिया तंत्र वाले ने बताया

हमे तो मंत्रियों ने

एक दूसरे की जाँच में लगा रखा है

ऐसे में आतंकी हमलों का अनुमान करे

इतना वक्त कहाँ है ?

टीवी चैनल वाले तरह-तरह के

एनिमेशन से घटना को समझाकर

आपको कैसा लग रहा है ?

आप कैसा महसूस कर रहे है ?

जैसे बेतुका सवाल पूछ रहे थे

और कैमरे में

बड़े-बड़े नेताओ को कैद करने की होड़ में लगे थे

इन सबके के बीच

जो लोग दर्द से कराह रहे थे

किसी को नजर भी नहीं आ रहे थे

 

ये सब देख कर

बच्चा बोला, अब मै समझ गया

इस देश में ही ऐसा क्यों होता है

और बोला हर हमले से पहले

शायद आतंकवादी कुछ ऐसे बात करते होंगे

कि

हमले की लिए भारत सबसे महफूज जगह है

पहला तो कभी पकड़े नहीं जायेंगे

अगर पकड़े भी गये तो

कोर्ट केस में ही सालों लग जायेंगे

और सजा हो भी गयी तो

राष्ट्रपति को माफी की याचिका लगाकर

पूरी जिंदगी आराम से बितायेंगे |

 

इसके उल्टा अमेरिका में किया तो

छ: महीने में ही सजा ऐ मौत दे दिये जायेंगे

और हमारे घर देश वाले भी खाक में मिला दिये जायेंगे

फिर क्यों अमेरिका

हम तो हमला करने

हर बार भारत में ही आयेंगे

हर बार भारत में ही आयेंगे

 

द्वारा- शंकर

दिनांक 15-07-2011

3 blogger-facebook:

  1. उमेश काले2:47 pm

    आपकी ये लाइनें " मृत्यु तो ........." काफी अच्छी लगी|
    दूसरी कविता में आपने आज जो माहौल है उसका बहुत अच्छा चित्रण किया है|
    बहुत बहुत बधाई!!

    उत्तर देंहटाएं
  2. सार्थक अभिव्यक्तियां , दूसरी कविता अपने व्षय के कारण शायद फ़ैल गई है कुछ और बंधी रहती तो ज़ियादा सम्प्रेषणीय होती। मुबारकबाद।

    उत्तर देंहटाएं
  3. sakshi dixit11:21 am

    mujhe aapki kavita mumbai me aatanki hamala bahut achchhi lagi . hamare desh ke maujoda halat aise hi hai .

    उत्तर देंहटाएं

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