गुरुवार, 25 अगस्त 2011

कैस जौनपुरी की ग़ज़ल : आज मैं खुद को सताना चाहता हूँ...

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ग़ज़ल

आज मैं खुद को सताना चाहता हूँ...

 

आज मैं खुद को सताना चाहता हूँ

मैं बुरा हूँ ये सबको बताना चाहता हूँ

 

गुनाह किये हैं मैंने हँसते-हँसते

आज उन गुनाहों की सजा पाना चाहता हूँ

 

सब समझते हैं बहुत अच्छा मुझे

आज सबका ये वहम मिटाना चाहता हूँ

 

तुम्हारी परवाह नहीं तो अपना खयाल क्यूँ रहे

आज मैं खुद को मिटाना चाहता हूँ

 

बरसते भीगते मौसम में आँसू बह रहे हैं

आज अपने आँसुओं में डूब जाना चाहता हूँ

 

सख्त फैसला ले लिया है अब

आज अपने फैसले को निभाना चाहता हूँ

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5 blogger-facebook:

  1. दिल पर करारी चोट करने वाली गज़ल.

    उत्तर देंहटाएं
  2. बेनामी7:43 pm

    bahar se khariz hai poori gazal ye,
    main bhi itana batana chahata hoon.

    उत्तर देंहटाएं
  3. मेरे आदरणीय भाई कैस जौनपुरी साहब, प्लीज़ बुरा न मानिये, ग़ज़ल के अलावा कोई और विधा अपना लें तो अच्छा है। शायद ये आपके लिये नहीं बनी है। एक भी शेर छंद में नहीं है। अफ़सोस हो रहा है। सालभर इंतज़ार कीजिये, किसी अच्छे शायर को उस्ताद बनाइये, तब ग़ज़ल कहियेगा। मुआफ़ करना भाई। - कृष्णकुमार ‘नाज़’

    उत्तर देंहटाएं
  4. नही जानती गजल किसे कहते या गीत क्या होता है?शब्दों,नियमों में नही भावों में डूबना सीखा है और.........जब भी कुछ पद्धति हूँ वो ही करती हूँ.बहुत खूबसूरत ...मन की बात आपकी नही मेरी है.यही सब मैं साधारण शब्दों में कहती हूँ अक्सर मिलने वालों से हा हा हा दोस्तों और रिश्तेदारों से .आपने उसे गजल के रूप में ढाला है या .....गीत के रूप में.
    पर....सचमुच अच्छी लगी.श्री कृष्ण कुमार जी ने जो बात कही उसे जरा अच्छी तरह भी कहा जा सकता था.फिर भी..........कुछ सीखने से यदि लेखन में निखार आता है तो कोई बुराई नही. आखिर कमेन्ट का ओप्शन हमने रखा भी तो इसीलिए है न?

    उत्तर देंहटाएं

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