रविवार, 28 अगस्त 2011

शंकर लाल इंदौर की अन्ना को समर्पित कविताएँ

जन लोकपाल: अन्ना और सरकार


अनशन पर बैठ गए अन्ना हजारे
बोले भ्रष्टाचार मिटाने को
भ्रष्टाचारियों को सजा दिलाने को
जन लोकपाल कानून बनाये सरकारें|

सरकार पहले तो तमतमायी फिर भड़की
और देने लगी अंदर कर देने की धमकी
लेकिन जब देखे सड़कों के नज़ारे
हर तरफ उठ रही थी लोकपाल की माँग
और लग रहे थे अन्ना जिंदाबाद के नारे|

देखकर वो जन सैलाब
सरकार इतनी हिल गयी
की मंजूर है सारी माँगे
ये एग्रीमेंट भी साइन कर गयी |

इस पर राजनेता और मंत्री सरकार से भिड़ गये
बोले यदि देश में लोकपाल कानून बन जायेगा
तो हमारा एक बड़ा तबका जेल में नजर आएगा
फिर इस देश को कौन चलायेगा ?
 
यदि राजनेता करप्शन नहीं करेगा
लाखों करोड़ों से घर नहीं भरेगा
तो ये ऐशो आराम कहाँ से करेगा ?
फिर आम-आदमी और नेता में
फर्क ही क्या रहेगा ?
और कोई कैसे तो चुनाव लड़ेगा
और कैसे जीतेगा ?
ऐसे में राजपाट सब छुट जायेगा
और हर राजनेता
बेरोजगार हो सड़कों पर नजर आएगा |

वो भयानक भविष्य सोचकर
भ्रष्ट नेताओ की आत्मा बुरी तरह से डर गई 
वो बोले नहीं-नहीं ये सब नहीं चलेगा
हमारे रहते इस देश में कोई
जन लोकपाल कानून नहीं बनेगा|

आखिर हम चुने हुए राजा है
इस देश पर हम अपना ही हुक्म चलायेंगे
जो हमारे हाथो की कठपुतली होगा
ऐसा ही लोकपाल बनायेंगे |

इस पर जनता बोली
अब जाग चुके है हम
अब तक सहा है आगे नहीं सहेंगे हम 
अब तो भ्रष्टाचार को मिटा के रहेंगे हम
जरूरत पड़ी तो जेल भी भरेंगे हम
आगे बढ़ो अन्ना अभी तक साथ रहे है हम
आगे भी साथ रहेंगे हम |

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अन्ना का आन्दोलन: बापू गाँधी से नागरिक का वार्तालाप 

नागरिक -
बापू गाँधी तेरे देश में
ये कैसी मज़बूरी है
अनशन के लिए भी यहाँ
अनुमति क्यों जरुरी है ?
बापू गाँधी तेरे देश में
ये कैसी मज़बूरी है ?

बापू गाँधी तेरे देश में
ये कैसी तानाशाही है
सत्य अहिंसा पर भी अब
पाबन्दी क्यों लगायी है ?
बापू गाँधी तेरे देश में
ये कैसी तानाशाही है ?

बापू गाँधी तेरे देश में
ये कैसी लाचारी है ?
संसद में भी अब
क्यों छाये भ्रष्टाचारी है ?
बापू गाँधी तेरे देश में
ये कैसी लाचारी है ?

बापू गाँधी तेरे देश में
ये कैसी आजादी है ?
संविधान का गला घोटकर
जनता के मूल अधिकारों पर भी अब
लगी क्यों फांसी है ?
बापू गाँधी तेरे देश में
ये कैसी आजादी है ?

 

बापू गाँधी -
बंद करो ये शिकायत करना
इससे कुछ नहीं हासिल होगा 
अगर सही आजादी पाना है तो
अब तुम को भी सड़कों पर आना होगा
सत्य अहिंसा से आंदोलन चलाना होगा
अन्ना बनकर आया हूँ में
अब तुमको भी साथ निभाना होगा
हो चला हूँ बूढ़ा अब मैं
अब तुमको ही भ्रष्टाचार मिटाना होगा|

नागरिक –
नहीं करगे शिकायत अब
भूल हुई हम से भारी है
भ्रष्टाचार मिटाना अब हमारी मेरी जिम्मेदारी है
डर नहीं किसी बात का अब 
अन्ना बना हर नर-नारी है
भ्रष्टाचार मिटाना अब हमारी मेरी जिम्मेदारी है |

नव चैतन्य आया सड़क पर
यौवन ने ली अंगडाई है
अब मशाल उठायेंगे
भ्रष्टाचार जलायेंगे
ये कसम अब हम सब ने खायी है
देश भक्ति का जज्बा दिलो में
इन भ्रष्टों पर भारी है
भ्रष्टाचार मिटाना अब हमारी जिम्मेदारी है |

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शंकर लाल इंदौर मध्यप्रदेश

1 blogger-facebook:

  1. उमेश काले9:30 am

    बहुत ही सुंदर| आज गाँधी जी भी होते तो ऐसा की कहते| बधाई

    उत्तर देंहटाएं

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