पिलकेंद्र अरोरा के कुछ सड़कछाप दोहे

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निर्माण तेरा बुदबुदा, अस मानुस की जात
रात बनत उखड़ जात है, ये सड़क प्रभात

सड़क में गड्ढे गड्ढे में सड़क, भीतर बाहर है मिट्टी
मिट्टी गिट्टी में मिली, गुमी निगम की सिट्टी पिट्टी

काल गिरे सो आज गिर, आज गिरे सो अब
डामर ठंडा बिछ जाएगा, तू बहुरि गिरेगा कब?

लिस्ट जो देखन में चला, ब्लैक न मिलिया कोय
दुर्भाग्य जो खोजा आपना, उस-सा ब्लैक न कोय

टेंडर का टुकड़ा बुरा, दो दो आंगुल दाँत
फिक्सिंग करे तो पास हो, नारद मारे लात

ठेकेदार इतना दीजिए, जामे डिपार्टमेंट समाय
इंजीनियर भूखा न रहे, अफसर न भूखा जाए

नेता अफसर दोऊ खड़े, पहले काके लागू पाए
बलिहारी नेता आपकी अफसर दियो बताए

(संत कवि कबीर से क्षमा याचना सहित)

(साभार - पत्रिका, इंदौर संस्करण - 29-8-11 )

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2 टिप्पणियाँ "पिलकेंद्र अरोरा के कुछ सड़कछाप दोहे"

  1. पिलकेन्द्र जी के ये सड़कछाप दोहों की जितनी तारीफ़ करूँ, कम है...। कबीर जी आज की परिस्थितियों को देखते हुए निश्चय ही आपको क्षमा करेंगे...। मेरी बहुत बधाई स्वीकारें...।
    प्रियंका गुप्ता

    उत्तर देंहटाएं
  2. पिलकेंद्र जी, पहली बार मैने किसी का लिखा ऐसा अच्छा व्यंग्यात्मक दोहा पढ़ा...बहुत शानदार लगा...बधाई...।
    प्रेम गुप्ता ‘मानी’

    उत्तर देंहटाएं

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