बुधवार, 17 अगस्त 2011

हिमांशु चौहान हरित के प्रेम गीत - अधूरे ख्वाब, तेरे बिन

 अधूरे ख्वाब
मेरी आँखों ने देखे थे ख्वाब कई ..ख्वाब पूरे भी होते मगर ना रात ढली .....
चाँद ठहरा रहा रात भर चहरे पे तेरे ..ना वो चाँद चला ना कोई बात चली ...
लफ़्ज़ों में कैसे करूँ बयां ........दिल में क्या चाहतें पली .......
बस इतना समझ ले............. जहाँ देखा , तू ही मिली ......
मेरे दिल को क्या मालूम थी ,,,दुनिया कि बंदिशें ...........
ना तुझसे धर्म मिला.............. ना तुझसे जात मिली ......
मैं सदफ की ख्वाहिश में समुंदर कि गहराई तक गया ....
वाह रे मेरी किस्मत  ..वहां भी राख मिली .................
जिंदगी बन गई ..अधूरी चाहतों का दर्द ........
किसी ने खेला खेल मेरे संग ..ना मेरी एक चली ....
मेरी आँखों ने देखे थे ख्वाब कई ..ख्वाब पूरे भी होते मगर ना रात ढली .....
चाँद ठहरा रहा रात भर चहरे पे तेरे ..ना वो चाँद चला ना कोई बात चली . ||
   .

मेरी जाँ तेरे बिन

clip_image003 आज यूँ ही सोचा ..मेरे दिल में क्या है ..बता भी दूँ ...................
मुझे तुझसे प्यार कितना ..............ये जता भी दूँ ......
......तेरा ऐसा असर मुझ पे...ना काटे अब कटेंगे दिन....................मेरी जाँ तेरे बिन  .........clip_image004
ना रब से दौलतें माँगी,,,,,ना मैंने जन्नतें माँगी .............
मुझे बस तेरी ख्वाहिश है ....यही अब मन्नतें माँगी ................
........  ये आलम है बेताबी का ...रात कटती है तारे गिन ..............मेरी जाँ तेरे बिन .........clip_image004[1]
तू बसी है मेरी हर साँस,,,,...मेरे हर जज्बात में
मैं तुझको ही कहता हूँ ..हर शायरी , हर बात में
........तेरे अहसास से जिन्दा ,मेरे शामो-शहर , पल छिन्न........... .मेरी जाँ तेरे बिन .........clip_image004[2]

 

हिमांशु कुमार चौहान (हरित)

haritchauhan@gmail.com

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