मंगलवार, 30 अगस्त 2011

साहित्‍य संस्‍था ‘मंथन, चण्‍डीगढ़ में भ्रष्‍टाचार पर कविताओं से वार

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चण्‍डीगढ़ । साहित्‍य संस्‍था मंथन' के सौजन्‍य से आज रविवार, दिनांक 28 अगस्‍त, 2011 को महावीर मुनी जैन मन्‍दिर, सैक्‍टर 23-डी, चण्‍डीगढ़ में भ्रष्‍टाचार विषय को लेकर एक कवि दरबार का आयोजन सुप्रसिद्ध साहित्‍यकार व समालोचक डॉ. कैलाश आहलूवालिया की अध्‍यक्षता में हुआ, जिसमें मुख्‍यातिथि के रूप में कहानीकार अनन्‍त शर्मा अनन्‍त' ने शिरकत की। मंच संचालन ग़ज़लकार सुशील हसरत' नरेलवी ने किया।

भ्रष्‍टाचार मुक्‍त राष्‍ट्र के संघर्ष को समर्पित इस कवि दरबार का शुभारम्‍भ कवि पवन बतरा की कविता ग़रीबी की मार' भ्रष्‍टाचार' से हुआ। तत्‍पश्‍चात सुशील हसरत' नरेवली ने राजनैतिक भ्रष्‍टाचार पर वार करते हुए अपनी ग़ज़ल में कहा कि ‘‘इस क़दर बदतर हुए हालात मेरे देश में/लोग अनशन पे, सियासत ठाठ से सोती रही'', कवि दीपक खेतरपाल ने व्‍यंग्‍य कविता अवलोकन' के ज़रीये कहा कि ‘‘कितनी कुर्बानियाँ, कितने सत्‍याग्रह, कितने अनशन'', कवि राजेश पंकज ने कविता मूल्‍य वृ़द्धि' में कहा कि ‘‘रेट बढ़ जाएंगे घूस के, सोमवार से'' तो राजन ग़रीब ने कविता भ्रष्‍टाचार' सुनाकर खूूब वाह-वाही बटोरी।

कवि सतनाम सिँह ने गीत होंठों को सी लिया है/अब न मुझे बुलाना, नरेन्‍द्र नाज़ ने गीत अन्‍ना हज़ारे जी हम साथ हैं तुम्‍हारे', कवयित्री उर्मिला कौशिक सखी' ने अपनी कविता में बच्‍चे के माध्‍यम से कहा कि ‘‘मैं भ्रष्‍टाचार से मुक्‍त समाज व संस्‍कार चाहता हूँ/देश में आपसी भाइर्-चारा व प्‍यार चाहता हूँ, कवयित्री पुनीता बावा ने कविता दुस्‍वप्‍न' में कहा कि ‘‘पिछले बारह दिन से देख रही हूँ दुस्‍वप्‍न', कवि हरीश ने भ्रष्‍टाचार को निशाना बनाते हुए गीत सच कहता हूँ पेट नहीं भरता' सुनाकर खूब तालियाँ बटोरी।

तदुपरान्‍त उर्दू के सुविख्‍यात शायर जनाब जय गोपाल अश्‍क़' ने एक नज़्‍म रिश्‍वत' पढ़ी जिसमें आज़ादी से अब तक की रिश्‍वतखोरी की दास्‍तां निहित थी तत्‍पश्‍चात ग़ज़ल कुछ अन्‍दाज़ में कही ‘‘वो पहले राजा पुशतैनी, हैं अब नेता भी पुश्‍तैनी/टिकी है नींव तन्‍त्र की कुछ इक ही खानदानों पर'', इसके अलावा कवियित्री ललिता पुरी ने कविता ने कविता कलयुग', कवयित्री परमजीत परम ने पंजाबी कविता कोई नहीं', कवि अश्‍विनी ने कविता बरखा शराब', कवि विजय कपूर ने कविता पता नहीं', कहानीकार व कवि अनन्‍त शर्मा अनन्‍त ने कविता अण्‍णा में नहीं जानता था', युवा कवि सन्‍नी चंदेल ने कविता में कहा कि ‘‘इक नीली सी पहाड़ी पर छोटा सा चाँद घूमता है'', तो डॉ. कैलाश आहलूवालिया ने कविता में ‘‘कुछ इस तरह की बातें, कुछ उस तरह की बातें, देर रात तक की बातें'' सुनाकर माहौल को खुुशग़वार बनाकर ढेरां तालियाँ बटोरीं।

अध्‍यक्षीय भाषण में सुप्रस़िद्ध साहित्‍यकार डॉ. कैलाश आहलूवालिया ने अपने व्‍यक्‍तव्‍य में कहा कि ‘‘अनुभवी कवियों ने सार्थक कविताओं के माध्‍यम से भ्रष्‍टाचार पर पैना निशाना साघा व अण्‍णा जी की मुहिम की मुक्‍तकण्‍ठ से प्रशंसा की। नये कवियों की रचनाओं में भी शब्‍द-शक्‍ति के अच्‍छे प्रयोग देखे।

अन्‍त में, संस्‍था की ओर से सभी मंचासीन महानुभावों, पधारे हुए साहित्‍यकार, साहित्‍य प्रेमियों व श्रोतागणों का आभार कवि दीपक खेतरपाल ने प्रकट किया गया।

सुशील ‘हसरत' नरेलवी अध्‍यक्ष ‘मंथन' (अवैतनिक)

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