दामोदर लाल ‘जांगिड़' की अन्ना हजारे को समर्पित ग़ज़ल

--- विज्ञापन ---

----------- *** -----------

image

ग़ज़ल

जो सुने ना प्रजा की हुंकार ।

बिलकुल बहरी है सरकार॥

 

प्रजातंत्र की पीर अपार,

बन गयी ‘अन्‍ना' का दरबार।

 

राज मुकुट सिंहासन डोले,

सुन कर ‘अन्‍ना' की ललकार।

 

डटे रहेंगे डट कर जो हम,

झुक जायेगी ये सरकार।

 

कई साल से सोयी थी जो,

जागी जनता फिर इक बार।

 

उनके तेवर देखे समझा,

क्‍यो पसरा हैं भ्रष्‍टाचार।

 

प्रजातंत्र की हर धमनी में,

हुआ नये खून का फिर संचार।

--- विज्ञापन ---

----------- *** -----------

_____________________________________

0 टिप्पणी "दामोदर लाल ‘जांगिड़' की अन्ना हजारे को समर्पित ग़ज़ल"

एक टिप्पणी भेजें

रचनाओं पर आपकी बेबाक समीक्षा व अमूल्य टिप्पणियों के लिए आपका हार्दिक धन्यवाद.

स्पैम टिप्पणियों (वायरस डाउनलोडर युक्त कड़ियों वाले) की रोकथाम हेतु टिप्पणियों का मॉडरेशन लागू है. अतः आपकी टिप्पणियों को यहाँ प्रकट होने में कुछ समय लग सकता है.