सोमवार, 15 अगस्त 2011

सुमित शर्मा की स्वतंत्रतादिवस विशेष रचना - छिड़ गया महासमर

         

    छिड़ गया महासमर

एक आवाज दिल्‍ली से फिर,
हैं आशा मिटेगा तिमिर,
उत्‍साह और आक्रोश की
छाई भू-गगन पर लहर,
आह्‍वान किए जन-मन का फिर
छिड़ गया महासमर।

नवनिर्माण की साज छिड़ेगी,
खूनी ताज पर गाज गिरेगी,
इतिहास आज बनने को हैं
आओ लिखें गाथा अमर,
प्रारब्‍ध सौंप निज हाथों में
छिड़ गया महासमर।

जुड़ते जाते हिन्‍दुस्‍तानी,
बहुत सहा अब हैं ठानी,
जुड़ते दिल, जुड़ती गलियाँ,
जुड़ते जाते गाँव और शहर,
एकता का दंभ भर
छिड़ गया महासमर।

लोकतंत्र हैं भरमाया,
राजतंत्र फिर से छाया,
ये छाया भी मिट जायेगी,
जो जलेगी ज्‍वाला प्रखर,
ईधन बना जनचेतना को
छिड़ गया महासमर।

कर्मण्‍यता का उत्‍थान हुआ,
भारत को निज का भान हुआ,
दुर्बलों ने ताल ठोकीं,
शोषितों ने कस ली कमर,
उग्र हुआ प्रतिकार-भाव,
छिड़ गया महासमर।

खिल उठी कली, लिए चिंगारी,
महका बाग रोशन क्‍यारी,
ये आज का विश्‍वास हैं,
कल जाएगा अपना सँवर,
साकार करने को दिव्‍यस्‍वप्‍न,
छिड़ गया महासमर।

            - सुमित शर्मा


परिचय

नाम - सुमित शर्मा
जन्‍मतिथि - 31 जनवरी 1992
पता -  तहसील चौराहा,गायत्री कालोनी,
       खिलचीपुर, जिला- राजगढ़, म.प्र.
मोबाइल नं. - 09407258690
शिक्षा - बी.ई.-चतुर्थ वर्ष (कम्‍प्‍यूटर साइंस) अध्‍ययनरत
साहित्‍यिक रचनाएँ  - चलती रहेगी मधुशाला(काव्‍य) , रिश्‍ते (उपन्‍यास), कुछ कवितायें/गजलें, लघु कहानियाँ । (सभी अप्रकाशित) 

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