अजय कुमार तिवारी की कविता - घर घर में श्मशान बना दूंगा...

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डेढ़ साल बाद ,

फिर वह नेता आया ,

रोया गाया ,

भाषण के दौरान फरमाया -

भाइयों ,

मैं इस गांव को स्‍वर्ग बना दूँगा ,

घर घर में हैंडपंप लगवा दूँगा ,

चोर डाकुओं से आजाद करा दूँगा ,

अन्‍न धन से घर भरा दूँगा ,

सबका घर होगा ,

सबकी नौकरी होगी सुंदर सा गार्डन होगा ,

इस गांव में रहकर आप खुद को ख़ुशनसीब समझेंगे ।

 

बहुत से लोगों ने भाषण सुना ,

कल्‍पना का ताना बाना बुना ,

ख्वाबों के गार्डन में झूमने लगे ,

नेताजी का चरण चूमने लगे ,

एक व्‍यक्‍ति को यह सब रास न आया ,

उसे डाँटकर दूर भगाया ,

अपना मुँह खोला ,

तेज आवाज में बोला -

 

नेताजी , आपने तीन साल पहले भी ,

यही बात दुहराई थी ,

पर उसके बाद तो आपकी सूरत भी ,

नजर न आई थी ,

इतने दिनों में पहले सारे वादों को खा गए ,

हजम कर फिर मैदान में आ गए ,

पिछली बार भी आपने यही सब कहा था ,

पर किसी के घर बिजली न लगवाया ,

नदी किनारे एक श्मशान तक न बनवाया ,

इसी तरह के कई कामों को आपने गिनाया था ,

पर पूरा करने का आपको ख्‍वाब भी आया था ,

इसी लिए तो पाँच साल के वोट डलवाए ,

और तीन साल में ही चले आए ,

 

नेताजी ने लाल होता हुआ मुँह खोला

धीरे से बोला ,

आपके किसी बात का बुरा नहीं मानूँगा ,

आपको अपना बड़ा भाई जानूँगा ,

दो जूते मारेंगे वह भी सह जाऊँगा ,

बिना छत के रात भर रह जाऊँगा ,

वैसे पिछला सारा प्रपोजल पास करा दिया है ,

आपके सभी कामों को खास करा दिया है ,

पर आपने जल्‍दीबाजी की हमारा ऐतबार न किया ,

पाच साल पूरा होने का इंतजार न किया ,

सिर्फ एक बार और मुझे जीताकर देखिए ,

जन कल्‍याण मंत्री बनाकर देखिए ,

फिर देखिए कैसे मैं करता हूँ कल्‍याण

कैसे बनाता हूँ अपने देश को महान

सूरजमुखी सा घर घर खिला दूँगा

बिजली से पूरा गांव जला दूँगा

खेतो को कोयले की खान बना दूँगा

एक की क्‍या बात करते हो भाई

घर-घर में श्मशान बना दूंगा ।

--

अजय कुमार तिवारी

बी-14,डी.ए.वी.स्‍टाफ कालोनी,

जरही,भटगाँव कालरी,

जिला-सरगुजा , छत्‍तीसगढ़

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1 टिप्पणी "अजय कुमार तिवारी की कविता - घर घर में श्मशान बना दूंगा..."

  1. पर गाँधी के देश में नेता कहा देता है
    वह तो पांच सालो की नाव खेता है
    कविता बहुत मजेदार है ...........

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