पुरुषोत्तम व्यास की कविता - कहते हैं - भारतीय है

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कहते हैं-भारतीय है।
 
पीट-पीट कर मेजों को
अधिकार की लड़ाई-लड़ते
सुनते-नहीं
मिलते-नहीं
मतलब के बयान देते।
 
परिवार –हमारा
गीत-उसी पर लिखते।
 
विद्वान-हैं हम
इस-पर सुर्खियों पर छाये रहते
बात-एक
हजार-बार दोहराना
भूसे-पर रोटी सकते हैं।
 
अधिकार की लड़ाई
भाषा-की
विचारों-की
सिर्फ अपने लिये
सेनापति-बन गये
बिना-जिये सैनिक का जीवन।
 
सुख-संपन्नता-वैभव पाना
जरूरी हैं-
दूसरे-के मुख से निवाला-छिनना
भी उचित है।
 
कुर्सी –पर बैठकर
बिना-कुछ लिये
नही-होता सांसों में उतार चढ़ाव
लार-टपकते ऐसी
कुत्ते भी झेंप जाते।
 
मुनियों की पावन-धरती
ज्ञान ही जहाँ पूजा
सुंदर-से विचारों
जहाँ-अपनाया जाता।
 
ऋषि-दधीचि का दान
इन-कथाओं असर नही
स्वार्थ का हर तरफ खेल दिखता
फिर-भी
गर्व से कहते हैं-
हम भारतीय हैं ।
 
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ई-मेल pur_vyas007@yahoo.com

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