सोमवार, 15 अगस्त 2011

बालकृष्ण अग्निहोत्री का स्वतंत्रता-दिवस विशेष आलेख : आजादी आंदोलन में इंदौर राज्‍य प्रजा मंडल का योगदान

तब कांग्रेस के आन्‍दोलन का मालवा में पूर्ण रूप से विकास नहीं हो पाया था। राज्‍यस्‍तर के संगठन की प्रेरणा इन्‍दौर के प्रमुख कांग्रेसी कार्यकर्ताओं को प्राप्‍त हुई। आन्‍दोलन के उद्‌देश्‍य की पूर्ति के लिये इंदौर में 1935 से प्रजा मण्‍डल की स्‍थापना की गई। नारायण भालेराव इसके सभापति बने और मिश्रीलाल गंगवाल, कृष्‍णकांत व्‍यास कन्‍हैयालाल खादीवाला और कोतवाल इसके प्रमुख कार्यकर्ता बनाए गए। प्रजामण्‍डल का उद्‌देश्‍य जनता में राजनीतिक चेतना एवं उत्‍तरदायी शासन स्‍थापित करना था। कांग्रेस और प्रजा मण्‍डल ये दो विभिन्‍न संगठन मालवा में स्‍वतंत्रता आन्‍दोलन में प्रबल पक्षधर थे।

कांग्रेस और प्रजामण्‍डल के कार्यकर्ताओं में 1935 काफी व्‍यापक मतभेद उत्‍पन्‍न हो गए। प्रयास यह हुऐ कि कांग्रेस का प्रजामण्‍डल में विलीन कर दिया जाए। परन्‍तु कार्य रूप में परिणत नही हो सका दोनों संगठनों ने अलग-अलग रूप से तथा कार्य पद्धति से इंदौर रियासत की प्रजा प्रभावित तो थी ही परिणाम स्‍वरूप 1936 में इंदौर नगर पालिका के निर्वाचन में प्रजामण्‍डल को एक महत्‍वपूर्ण राजनैतिक सफलता मिली।

प्रजामण्‍डल ने 1938 में सभी बंदी के विरूद्ध आन्‍दोलन किया। रियासती शासन ने किसी भी प्रकार की सभा करने पर प्रतिबंध लगा दिया था। इसके पूर्व 1911 में रीजेन्‍सी कौंसिल ने एक आदेश में खुली जगह में बिना जिला न्‍यायाधीश की आज्ञा से सभा करने पर रोक लगा दी थी। इस आदेश के विरोध में प्रजामण्‍डल के अनेक कार्यकर्ताओं ने हजारीलाल जड़िया के नेतृत्‍व में सभा बंदी कानून का उल्‍लघंन किया और अंततः होलकर राज्‍य के मंत्रिमंडल की इस आन्‍दोलन के समय पराजय हो गई। परन्‍तु इसका मूल्‍य प्रजामंडल के कार्यकर्ता कन्‍हैया लाल वैद्य, कुसुम कांत जैन और लाल सिंह का निष्‍कासन कर 1948 तक इन्‍दौर राज्‍य में प्रवेश के लिये प्रतिबंध लगा दिया गया। प्रजामण्‍डल की राजनैतिक गतिविधियां बड़ी त्‍वरित गति से इंदौर रियासत में व्‍याप्‍त हो रही थी। कार्यकर्ताओं ने गांव-गांव जाकर जन जागृति का अलख जगाया। 1938 में प्रजामण्‍डल का राजव्‍यापी स्‍वरूप बना गया। रियासती शासन ने इसके विरोधकारी करते हुऐ युद्ध के लिऐ चन्‍दा वसूलने के प्रकरण पर तथा चुंगी वृद्धि पर शासन की भर्त्‍सना की और इन्‍दौर नगर में हड़ताल करा दीं, हड़ताल ने काफी उग्र रूप धारण कर लिया तथा गोली चलाने की नौबत आ गई। इस आन्‍दोलन कें संदर्भ में पंराजये करंदीकर और उपाध्‍याय को नजरबंद कर मंडलेश्‍वर जेल में भेज दिया गया और कन्‍हैया लाल मेहता, देवेन्‍द्र कुमार जैन तथा रामप प्रसाद आजाद को काल कोठरी की सजा दी गई।

महिदपुर में प्रजामण्‍डल का जो अधिवेशन हुआ उसका उद्‌घाटन राजकुमारी अमृत कौर ने किया था इस अधिवेशन के अध्‍यक्ष रामेश्‍वर दयाल तोतला थे। और लोग जत्‍थे के जत्‍थे पदयात्रा करते हुए गांव-गांव से महिदपुर पहुंचे थे।

भारत छोड़ों आन्‍दोलन में अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी ने एक गोपनीय संदेश में भारत के प्रदेशों की कांग्रेस का सूचित किया कि वे अगस्‍त क्रांति के लिये तैयार रहे इन्‍दौर कांग्रेस ने इसके समर्थन में 16 जुलाई 1942 को एक स्‍थानीय बैठक आयोजित कीाी जिसमें एक सौ आठ कार्यकर्ताओं की यह सभा भारतीय कांग्रेस कार्य समिति द्वारा पारित प्रस्‍ताव का हार्दिक समर्थन करती है और इसके साथ ही महात्‍मा गांधी के नेतृत्‍व में पूर्ण विश्‍वास प्रकट करती है। यह सभी महात्‍मा गांधी और कांगे्रस को पूर्ण विश्‍वास दिलाती है कि गांधी सत्‍याग्रह आन्‍दोलन में इंदौर की जनता किसी भी प्रांत से पीछे नही रहेगी।

प्रजामण्‍डल ने उत्‍तरदायी शासन की मांग रखी। इसके साथ ही यह नोटिस दिया गया कि इंदौर राज्‍य का ब्रिटेश सरकार से संबंध विच्‍छेद कर दिया जाए। नोटिस की अवधि 3 दिनों की थी। इस कार्य के लिये जो मंडल गठित किया गया उसके पहले डिक्‍टेटर तात्‍या सरवेट नियुक्‍त हुऐ। विद्यार्थियों ने भी सत्‍याग्रह में प्रवेश किया।

लेखक- बालकृष्‍ण अग्‍निहोत्री

अग्‍निवेद भवन, 56 सरदारपुरा, ललितपुर (उ0प्र0)

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