गंगा प्रसाद शर्मा "गुणशेखर" की स्वतंत्रता दिवस विशेष कविता

--- विज्ञापन ---

----------- *** -----------

 

भूली -बिसरी यादें हमको फिर-फिर घेर रही हैं
और हमारी त्याग तपस्या हमको फेर रही हैं
बँधुआ बच्चों, मज़दूरों को उन्मुक्त करें
भारत माँ को भ्रष्ट तंत्र से मिलकर मुक्त करें
अपने दिल के घावों को है माँ ने खोल  दिखाया.
जन गण मन का हर्ष  आज स्वातंत्र्य दिवस पर छाया ..
   

    पंजाब,असम,कश्मीर प्रांत सब भारत माँ के हिस्से हैं 
बाहों को कंधों से काटें ये कैसे किस्से हैं
माँ के पूतों के शोणित से धरा लाल होगी तो
श्वान, गीध भी खा न सकेंगे दुश्मन की बोटी को
सवा लाख से एक लड़ा  है वीरभूमि का जाया .
जन गण मन का हर्ष  आज स्वातंत्र्य दिवस पर छाया  .. 

    बैरी को भी मीत मान लेते हैं मन से
मित्र कहीं गर शत्रु बन गये, त्यागेंगे तन-मन से
अर्जुन,त्रिशूल, पृथ्वी का जिसको भान नहीं हैं
मिट जायेंगे  धरती से यह अनुमान नहीं है
जो भी आगे बढ़ा समझ लो अपना नाम मिटाया। 
जन गण मन का हर्ष  आज स्वातंत्र्य दिवस पर छाया ..
 

-डॉक्टर  "गुणशेखर"       

--- विज्ञापन ---

----------- *** -----------

_____________________________________

0 टिप्पणी "गंगा प्रसाद शर्मा "गुणशेखर" की स्वतंत्रता दिवस विशेष कविता"

एक टिप्पणी भेजें

रचनाओं पर आपकी बेबाक समीक्षा व अमूल्य टिप्पणियों के लिए आपका हार्दिक धन्यवाद.

स्पैम टिप्पणियों (वायरस डाउनलोडर युक्त कड़ियों वाले) की रोकथाम हेतु टिप्पणियों का मॉडरेशन लागू है. अतः आपकी टिप्पणियों को यहाँ प्रकट होने में कुछ समय लग सकता है.