मंगलवार, 30 अगस्त 2011

रामेश्वर काम्बोज ‘हिमांशु’ के कुछ हाइकु

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उदासी (हाइकु)

 

1

छोड़ो उदासी

कि नदिया भी प्यासी

मिले न जल

2

बीता है आज

रीता बहुत कुछ

भरेगा कल

3

मूँदो न नैना

देखो इधर भी

धारा तरल

4

दूर नभ में

चुप तारा अकेला

खोजे मीत को

5

रजनी-वधू

आँचल में समेटे

मधु प्रीत को

6

तेरी उदासी

मुझ पर है भारी

स्मित बिखेरो

7

छाई उदासी

मन-मरुभूमि में

अँखियाँ प्यासी

8

बाट है सूनी

नहीं आया बटोही

व्यथा है दूनी

9

कुछ न सूझे

गुमसुम आँगन

भीगा है मन

10

मन में क्या है ?

मन ही नहीं जाने

किए जतन

11

तारे गिनते

सब रातें कटतीं

नींद उड़ी है

12

किससे पूछें-

हो सुधियों से तर

हूक उठी क्यों ?

-0-

12 blogger-facebook:

  1. कृपया तीसरे हाइकु को इस प्रकार पढ़ेंगे-
    मूँदो न नैना
    देखो तो इधर भी
    धारा तरल

    उत्तर देंहटाएं
  2. shobha rastogi shobha5:59 pm

    sahaj,saral, madhur shabdon ki prastuti ne man ke antsthal ko anayas hi choo liya .

    उत्तर देंहटाएं
  3. रामेश्वर जी, आपके हाइकू पढ़ कर आनंद आ गया, आनंद से मेरा तात्पर्य मजे से है, ह्रदय को छु लेने वाली पंक्तियाँ है,
    "कुछ न सूझे
    गुमसुम आँगन
    भीगा है मन.....बहुत ही उत्तम....

    उत्तर देंहटाएं
  4. बेनामी9:48 pm

    नये हाईकु लेखक इन हाइकुओं से काफी कुछ सीख सकते हैं
    उमेश मोहन धवन

    उत्तर देंहटाएं
  5. बहुत सुन्दर हाइकु हैं...हर भाव मन को गहरे तक छू लेता है...मेरी बधाई...।

    उत्तर देंहटाएं
  6. रामेश्वर जी ,
    आप जब भी लिखते हो बस कमाल लिखते हो |
    यह हाइकु हृदय को छू गए | यह हाइकु दिल का आईना हैं ...दिल की इबारत यहाँ पढ़ी जा सकती है ...हाँ ..पढ़ने वाली आँख चाहिए ! हर हाइकु अपने आप में पूरी कहनी लिए हुए है !
    सुन्दर लेखन के लिए बधाई !
    हरदीप

    उत्तर देंहटाएं
  7. आपके हाइकू सदा ही बहुत गहरे होती है जितनी बार पढो हमेशा नये लगते हैं गहरे भावों को कमल की स्याही शब्दों का रूप दे देती है .और पढने वाले को अभिव्यक्ति की ऊँचाइयों पर ले जाते हैं
    हर हाइकू
    सागर है भावों का
    पढो डूब के
    सादर
    रचना

    उत्तर देंहटाएं
  8. सभी हाइकु बहुत उम्दा हैं .....पढ़कर बहुत अच्छा लगा ....सार्थक हाइकु के लिए बधाई एवं शुभकामनाएं ....
    डा. रमा द्विवेदी

    उत्तर देंहटाएं
  9. amita kaundal2:12 am

    बहुत सुंदर हाइकु हैं मन को छू गए. खासकर यह वाला
    मन में है क्या ?
    मन ही नहीं जाने
    किये जतन
    सादर,
    अमिता

    उत्तर देंहटाएं
  10. बाट है सूनी
    नहीं आया बटोही
    व्यथा है दूनी...

    जितनी प्रशंसा की जाये उतनी कम है ये हाइकु "अनमोल" है बार-बार पढ़ा... आपको हार्दिक बधाई सभी हाइकु अपना स्थान रखते हैं।

    उत्तर देंहटाएं
  11. गुमसुम आँगन, भीगा है मन... सचमुच पढ़ कर मन भीग गया... बहुत ही सुन्दर भाव लिए हुये सभी हाइकू अत्यन्त उत्कृष्ट अभिव्यक्ति ...
    सादर,
    मंजु

    उत्तर देंहटाएं
  12. aapke haaiku padhna sukhad anubhuti hoti hai bhale bhaav mein udaasi hin ho. mann ko gahre chhu gaye sabhi haaiku, bahut shubhkaamnaayen.

    उत्तर देंहटाएं

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