रविवार, 7 अगस्त 2011

नईख़बर.कॉम - चोरी की सामग्री से सजी साहित्यिक दुकान?

यदि आपकी साइट की सारी की सारी सामग्री की चोरी कर कोई अन्य साइट अपनी दुकान सजा ले तो आपको कैसा लगेगा?

आज मैं गूगल में कुछ सर्च कर रहा था तो नईख़बर.कॉम (http://www.naikhabar.com/poems-story-and-jokes.html) सर्च रिजल्ट में पहले आया. जबकि सामग्री ठेठ रचनाकार.ऑर्ग (http://rachanakar.org) की थी.

मेरा माथा ठनका. मुझे लगा कि रचनाकार.ऑर्ग की रचनाओं को उदाहरण के लिये फिर से छापा गया होगा या कोई एकाध सामग्री साभार पुनःप्रकाशित हुई होगी या किसी लेखक की सहमति से उसकी रचनाएँ रचनाकार.ऑर्ग सहित दोबारा वहाँ प्रकाशित हुई होगी. तो मैं महज जाँच पड़ताल के लिए वहाँ गया.

वहाँ दुख और आश्चर्य के साथ मैंने पाया कि रचनाकार.ऑर्ग की तमाम रचनाएँ वहाँ बड़े शान से प्रकाशित हैं. प्रकटतः रचनाकार.ऑर्ग की फुल फ़ीड को वो बेशर्मी से पुनः प्रकाशित कर रहे हैं और अपने साइट में सामग्री भर रहे हैं. नईखबर के साहित्य खंड के आज का स्क्रीनशॉट ये है जिसमें रचनाकार.ऑर्ग की तमाम नई रचनाएँ यहाँ कॉपी-पेस्ट की गई हैं -

nai khabar-chori

आप देखेंगे कि रचनाकार की तमाम रचनाओं को यहाँ बड़ी ही खूबसूरती से सजाया गया है. यहाँ तक कि अजय 'अज्ञात' की पूरी की पूरी 85 ग़ज़लों को भी रचनाकार स्टाइल में छाप दिया गया है जबकि इस तरह की साइटों में आमतौर पर बड़ी सामग्री को मल्टी पेज (स्क्रॉलिंग नहीं, ताकि बार बार पेज लोड हो) में प्रकाशित किया जाता है! और, कोढ़ में खाज यह कि न तो कहीं रचनाकार.ऑर्ग का नाम दिया गया है और न ही कहीं रचनाकार.ऑर्ग की लिंक दी गई है.

आप सभी पाठकों से आत्मीय आग्रह है कि नेट पर इस तरह के सामग्री डाका के खिलाफ आवाज बुलंद करें नहीं तो कल आपकी साइट की सामग्री के साथ भी यही खतरा हो सकता है. साथ ही नईख़बर.कॉम (http://www.naikhabar.com/poems-story-and-jokes.html)  में छपी चोरी की रचनाओं के नीचे टिप्पणियों में इस संबंध में अपना कड़ा विरोध दर्ज करें. नईख़बर.कॉम में कोई संपर्क सूत्र भी प्रकाशित नहीं है, अलबत्ता डोमेन नेम रजिस्ट्रार के यहाँ कंटेंट चोरी का मामला दर्ज करने की शिकायत प्रारंभ की जा रही है.

आप सभी के सहयोग के लिए हार्दिक धन्यवाद.

11 blogger-facebook:

  1. कंटेंट चोरी का यह मामला बेहद निंदनीय है.
    इस तरह की घटनाओं का विरोध होना चाहिए और मामले की रिपोर्ट भी.

    उत्तर देंहटाएं
  2. उस साईट पर चोरी किये लेख देखे परंतु टिप्पणी लिखने का कोई विकल्प नहीं दिखा अन्यथा वहाँ अपना विरोध दर्ज़ करा देती.

    उत्तर देंहटाएं
  3. कंटेंट चोरी का यह मामला बेहद निंदनीय है.
    इस तरह की घटनाओं का विरोध होना चाहिए और मामले की रिपोर्ट भी.

    उत्तर देंहटाएं
  4. rachanakar ki samagri ki chouri ek gambeer kisham ka mamala hai hum sab isaki bharshana karte hain

    उत्तर देंहटाएं
  5. वाकई निंदनीय कृत्य है।

    उत्तर देंहटाएं
  6. रवि भाई
    नमस्कार
    बहुत बरसो बाद यहाँ आ रहा हूँ , जबकि शुरुवात आपसे ही हुई थी .. आपके प्रेम का आभारी अब तक हूँ. अब फिर से active blogging शुरु की है .. अब नियमित रूप से आते रहूँगा ...

    आपने इस पोस्ट में एक बहुत ही जरुरत की जानकारी दी है ..

    आभार
    विजय

    कृपया मेरी नयी कविता " फूल, चाय और बारिश " को पढकर अपनी बहुमूल्य राय दिजियेंगा . लिंक है : http://poemsofvijay.blogspot.com/2011/07/blog-post_22.html

    उत्तर देंहटाएं
  7. रवि भाई
    जैसे कि पहले भी मेरी रचनाये आप ही के ब्लॉग पर प्रकाशित हुई थी .. अगर आपको मेरी कोई भी रचना पसंद आये तो उसे अपने ब्लॉग पर जरुर लगाये..
    मुझे बेहद खुशी होंगी
    आपका
    विजय

    उत्तर देंहटाएं
  8. यह घटना वाकई में निंदनीय है इसके खिलाफ मुहीम चलानी होगी | वैसे आप copy Protection का उपयोग कर सकते है |

    उत्तर देंहटाएं
  9. साईट द्वारा लेख चोरी का मामला घोर निंदनीय है । इस मामले में चोरी कर्ता साईट के खिलाप रिपोर्ट दर्ज कराते हुए कानूनी कार्यवाही की जानी चाहिए । जिससे कि दूसरो के लेख को अपने नाम से प्रकाशित करने वालो को सबक मिले ।

    उत्तर देंहटाएं
  10. ईमेल से प्राप्त यशवंत कोठारी जी का पत्र -

    प्रिय भाई , बहुत ही ज्यादा चोरी चल रही ह़े ,आपके यहाँ प्रकाशित मेरी बहुत सी रचनाए प्रिंट मिडिया वाले अख़बार बिना सूचना के छाप रहे ह़े,लेकिन नई खबर वाले तो गजब कर रहे ह़े कुछ करे. yk

    उत्तर देंहटाएं
  11. Dear Ravi Ji,

    Sorry for inconvience caused by us.
    Our website is update by most of the people.
    Since we have received your complain.
    We are working on it, and all the content related to your website will be removed before Tuesday (night).

    Editor
    NaiKhabar.com

    उत्तर देंहटाएं

रचनाओं पर आपकी बेबाक समीक्षा व अमूल्य टिप्पणियों के लिए आपका हार्दिक धन्यवाद.

स्पैम टिप्पणियों (वायरस डाउनलोडर युक्त कड़ियों वाले) की रोकथाम हेतु टिप्पणियों का मॉडरेशन लागू है. अतः आपकी टिप्पणियों को यहाँ प्रकट होने में कुछ समय लग सकता है.

----

1.5 लाख गूगल+ अनुसरणकर्ता, 1500 से अधिक सदस्य

/ 2,500 से अधिक नियमित ग्राहक
/ प्रतिमाह 10,00,000(दस लाख) से अधिक पाठक
/ 10,000 से अधिक हर विधा की साहित्यिक रचनाएँ प्रकाशित
/ आप भी अपनी रचनाओं को विशाल पाठक वर्ग का नया विस्तार दें, आज ही नाका से जुड़ें. नाका में प्रकाशनार्थ रचनाओं का स्वागत है.अपनी रचनाएँ rachanakar@gmail.com पर ईमेल करें. अधिक जानकारी के लिए यह लिंक देखें - http://www.rachanakar.org/2005/09/blog-post_28.html

विश्व की पहली, यूनिकोडित हिंदी की सर्वाधिक प्रसारित, समृद्ध व लोकप्रिय ई-पत्रिका - नाका

मनपसंद रचनाएँ खोजकर पढ़ें
गूगल प्ले स्टोर से रचनाकार ऐप्प https://play.google.com/store/apps/details?id=com.rachanakar.org इंस्टाल करें. image

--------