मंगलवार, 23 अगस्त 2011

यशवन्त कोठारी का व्यंग्य : वर वधू विज्ञापन व विवाह

इधर हमारे देश ने कुछ मामलों में बड़ी प्रगति की है, विवाह और विज्ञापन इसी श्रेणी में आते हैं ! प्राचीनकाल में विवाहों का वर्गीकरण गन्धर्व विवाह या असुर विवाह, देव विवाहों के रूप में होता था। मानवीय सभ्यता की प्रगति के साथ-साथ हमने विवाह में बड़ी तीव्र गति से प्रगति की है।

इधर विवाहों के विज्ञापन नाईयों, दाईयों या विरूदावली गाने वालों के मार्फत जाने बन्द हो गये है। अब सभी बड़े पत्र-पत्रिकाओं में विवाह के विज्ञापन दिये जाते हैं और इन विज्ञापनों के जरिये वर तथा वधू के निकट और निकटतम आते हैं।

एक प्रतिष्ठित पत्र अपने वैवाहिक विज्ञापन हेतु कहता है।

''बाबुल की दुआयें लेती जा, जा तुझको सुखी संसार मिले'' अगर आपको तलाश है अपनी बेटी के लिये एक ऐसे वर की जो अच्छा पढ़ा लिखा हो, अच्छे परिवार का हो लड़का ऐसा हो जो आपकी बेटी को उतने ही प्यार से रखे जितने नाजों से आपने पाल-पोसकर बड़ा किया है तो ऐसा वर तलाश करने का एकमात्र स्थान वैवाहिक विज्ञापन।

एक दूसरे विज्ञापन में दिखाया गया है कि एक कुंवारे साहब व कुंवारी साहबिन सोते हुए सपने देख रही है। इन सपनों में साहब देखते हैं, गृह लक्ष्मी, सुन्दर सुशील कन्या और साहबिन देख रही हैं, डाक्टर, इन्जीनियर, प्रोफेसर, सैनिक, अफसर, पाइलेट आदि और कुछ समय बाद दोनों कुवारों की शादी इस पत्र के माध्यम से हो गयी !

रविवार के दिन सबसे आनन्द के साथ जो कार्य मैं करता हूँ, वह है वैवाहिक विज्ञापनों को ध्यान से पढ़ना। अपने इस महत्वपूर्ण अध्ययन में मैं किसी प्रकार का दखल पसन्द नहीं करता। चूंकि ये विज्ञापन सामान्यतया आंग्ल भाषाओं में आते है अतः आप सभी की सुविधा हेतु कुछ महत्वपूर्ण विज्ञापनों का हिन्दी अनुवाद आपके लाभार्थ प्रस्तुत कर रहा हूँ।

।।1।। एक उच्च वर्गीय 20 वर्षीय सुन्दर सुगढ़ कन्या हेतु लम्बा, ऊँचा हृष्ट-पुष्ट वर चाहिये। कन्या की लम्बाई 5 फीट है, जरा शर्मीली स्वभाव की है, अतः डेटिंग सम्भव नहीं होगी। अध्यापक वर पत्र-व्यवहार न करें।

।।2।। एक मध्यमवर्गीय विधवा उम्र 40 वर्ष हेतु सुन्दर वर चाहिये। बैंक बैलेन्स काफी है। विधुर पत्र व्यवहार न करें।

।।3।। एक अत्यन्त सुन्दर कन्या के लिये विदेश में स्थित वर चाहिये। कन्या बालडान्स व बायफ्रेंडों से गिरी रहती है। वर को शादी के बाद हिन्दुस्तान से बाहर ही रहना होगा। सारी जिम्मेदारी शादी के बाद वर पक्ष की होगी। वैसे यह कन्या घर से 3 बार भाग चुकी है।

।।4।। क्रिकेट के मशहूर खिलाड़ी के लिऐ क्रिकेट समझने वाली वधू चाहिये। खाना बनाना जरूरी नहीं है लेकिन पैस व क्लीन बोल्ड को समझ हो। आवश्यकता हुई तो बैंटिग कराकर देखा जावेगा !

।।5।। सुप्रसिद्ध स्वर्गीय कलाकार की विधवा को अब एक सुप्रसिद्ध कवि की आवश्कता पति के रूप में है।

पहले वाले पति इन पर कुछ नहीं लिख सके, इसलिये मर गये। नये कवि को रोज इन पर एक कविता लिखकर प्रकाशित करानी होगी। ताकि प्यार सप्रमाण हो, ऐसा नहीं होने पर वे भी पूर्व स्थिति को प्राप्त हो सकते हैं।

।।6।। भूतपूर्व देशी रियासत के महाराजा की इकलौती पुत्री हेतु वर चाहिये। पढ़ी लिखी होना जरूरी नहीं है हां तलवारबाजी, घुड़सवारी व हाथी पोलो का अनुभव आवश्यक है। चयनित प्रत्याशी को प्रायोगिक करके दिखाना होगा।

।।7।। एक अध्यापक की पुत्री हेतु वर चाहिये। दहेज के इच्छुक सम्पर्क न करें वर को यदि कक्षा में अण्डे व टमाटर फैंकने, हड़ताल-घेराव व तोड़फोड़ का अनुभव होगा तो तरजीह दी जायेगी।

।।8।। इस विज्ञापन को ध्यान से पढ़ें, आपके बेहोश होने का खतरा है।

रुस्तमें हिन्द, भारत केसरी मशहूर पहलवान हेतु एक उच्च वर्ग की वधू चाहिये। जो सुबह बादाम और शाम को भांग घोट सकें। भैंस का 2 किलो दूध सुबह शाम पीना अनिवार्य है। आवश्यकता होने पर पंजा भी लड़ाना होगा। अगर लड़की की हड्डिया कमजोर है तो कोशिश न करें। फोटो के साथ सम्पर्क करें।

।।9।। भूतपूर्व मंत्री की अभूतपूर्व पुत्री हेतु वर की आवश्यकता है। कन्या की आंखें नीली लाल व शरीर पीला है। गर्दन मटकेदार है। दल-बदलू को प्राथमिकता दी जावेगी।

अब जब की आप इन विज्ञापनों का पारायण कर चुके हैं। मैं आपको कुछ नितान्त अछूते विवरण सुनाना चाहता हूँ।

वैवाहिक विज्ञापनों के इस संसार में बड़े अजीब-अजीब अनुभव होते है। मेरे पड़ोसी झपकलाल पर परमात्मा की कृपा है और इस कृपा के कारण उनके एक पत्नी एक उप पत्नी और 4 बच्चे हैं। उन्हें इन विज्ञापनों का बड़ा शौक है। हर वर्ष गर्मी में ये पत्नी व बच्चों को मैके भेजकर अखबारों में विज्ञापन दे देतें है।

उनके पास जो पत्र आते हैं, उन्हें देखने का सौभाग्य मेरे को भी मिलता है। इन विज्ञापनों को झपकलाल जी अलग-अलग ढंग से निकलवाते हैं। दहेज, जाति सेक्स आदि का बन्धन नहीं रखते और इस कारण ढेर सारे पत्र आते हैं।

हम लोग पूरी गर्मियों भर इन पत्रों के रस का आस्वादन करते, लेकिन एक बार एक महिला अपनी 2 पुत्रियों को लेकर झपकलाल के घर पर ही आ गयी। कहने लगी लो चुन लो तीनों में से जो भी पसन्द हो।

झपकलाल जी को पसीना आ गया तब से उन्होंने विज्ञापन देना बन्द कर दिया। एक समाज शास्त्रीय अध्ययन के अनुसार इन विज्ञापनों में एक ही महिला अलग-अलग ढंग से पत्र लिखती है।

कभी सलवार कुर्ते में कभी साड़ी में कभी बाबकट तो कभी घने काले बालों की स्वामिनी के रूप में ये अपने आपको प्रदर्शित करती हैं। एक अन्य महिला 20 वर्ष से लगाकर 50 वर्ष तक के हर विज्ञापनों में पत्र लिखती है। कभी दो लहर इस किनारे पर भी आयेगी।

इस अध्ययन से पता चलता है कि देश में अध्यापिकायें, नौकरीपेशा तथा बदसूरत औरतें काफीं है। झपकलाल ने एक बार अध्यापिकाओं की मांग निकलवाई और लगभग 5000 प्रेम पत्र प्राप्त किये। इनमें से अधिकांश प्रेम पत्र श्रृंगार, विरह और रीतिकाल के उत्कृष्टतम उदाहरण हैं।

हम इन प्रेम पत्रों को प्रकाशित करने की दिशा में भी सोच रहे हैं।

विवाह, विज्ञापन वर, वधू ऐसा विषय है कि जो कि रोचक और महत्वपूर्ण है लेकिन आप इस लेख को पढ़ने में सारा समय जाया कर देंगे तो विज्ञापन कब पढ़ेंगे। अतः शुभकामना लेकर विज्ञापन पढ़ें।

सफल हो तों मुझे भी लिखें।

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यशवन्त कोठारी

86, लक्ष्मी नगर,, ब्रह्मपुरी बाहर,जयपुर-302002 फोनः-2670596

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