मंगलवार, 30 अगस्त 2011

यशवन्‍त कोठारी का व्यंग्य - पत्नी की बीमारी

जैसा कि आप जानते हैं, पत्‍नियां जो हैं, वे जब पति के घर आती हैं तब भी बीमार होती हैं और जब जाती हैं तब भी बीमार होती हैं । पत्‍नी या बीवी का बीमार होना एक ऐसा कटु सत्‍य है जिसे हर एक को भोगना पड़ता है । करेले के रस की तरह बीबी की बीमारी का स्‍वाद सभी को कसेला लगता है । मगर इसे भोगे बिना इस असार संसार में गुजारा नहीं है । जो सुखी पति होते हैं वे भी पत्‍नी की बीमारी के नाम से ही दुखी हो जाते हैं । यदि मैं कवि या शायर होता तो पत्‍नी की बीमारी पर शेर या कविता या गजल या नज्‍म लिखता मगर चूंकि मैं कवि या शायर नहीं हूं अतः श्रीमान्‌ की सेवा में यह व्‍यंग्‍य प्रस्‍तुत कर रहा हूं ।

पत्‍नियों के शरीर में कहीं एक कमर नाम की चीज होती है जो शादी से पूर्व क्षीणकटि कहलाती है, मगर कुछ समय बाद कमरा बन जाती है ! सारी परेशानियों की जड़ यहीं से शुरू होती है। सुबह-सुबह उठ कर आप भगवान का नाम लेना चाहते हैं, मगर तभी भागवान आकर मासूम-सी सूचना देती है कि उनके कमर में दर्द है । इस छोटे से वाक्‍य से पारिवारिक राजनीति में भीषण तूफान आ जाता है । नाश्‍ता कौन बनायेगा, बच्‍चों को कौन तैयार करेगा । खाने, बर्तन तथा कपड़ों का क्‍या होगा आदि आदि समस्‍याएं विकराल रूप धारण कर लेती हैं । इन सबसे पहले कमर के दर्द की चिकित्‍सा पर भी विचार किया जाता है चूंकि हर पति आधे से ज्‍यादा डाक्‍टर भी होता है सो सर्वप्रथम वह अपनी पत्‍नी की कमर का इलाज करने का असफल प्रयास करता है। इस कारण मर्ज जो है, वह लगातार बढ़ता ही जाता हैं । पत्‍नी की कमर का दर्द या तो ठीक ही नहीं होता या फिर उस समय बिल्‍कुल ठीक हो जाता है जब पीहर से आधा दर्जन मेहमान आने की सूचना प्राप्‍त होती है । उन दिनों पत्‍नी जिस तेजी ओर समझदारी से काम करती है तब लगता है, काश ये हर दिन ऐसे ही काम करे । मगर पीहर के मेहमानों के जाने के बाद वही ढाक के तीन पात ।

बीबी की बीमारी का एक और अहम मसला है और वो है दवा का खाना या खिलाना । बाजवक्‍त पति लोगों की यह नैतिक जिम्‍मेदारी मानी जाती है कि वो दफ्‍तर जाते वक्‍त और आते ही पत्‍नी से पूछे कि दवा खा ली या नहीं यदि हो सके तो दवा स्‍वयं अपने हाथ से खिलायें । दफ्‍तर से भी फोन पर पूछें कि माबदोलत की तबियत कैसी है । दवा समय से खा लें वगैरह वगैरह । पथ्‍य और परहेज की पूरी जानकारी रखनी पड़ती है, खाबिन्‍द को बल्‍कि कई बार तो हालत यह होती है कि पति जो है वो पत्‍नी की बीमारी का सर्वश्रेष्‍ठ विशेषज्ञ बन जाता है ।

कुछ बीमारीयां जनानी होती है मगर उनके इलाज मरदाना होते हैं । इधर विज्ञान की तरक्‍की की बदौलत इन जनाना बीमारियों की जांचों में हजारों रूपये फूंके जाते हैं और विशेषज्ञ डॉक्‍टर कुछ भी तय नहीं कर पाते । कुछ उम्रदराज होने पर महिलाओं में कुछ ऐसे परिवर्तन होने लगते हैं कि व्‍यक्‍तियों को अजीब लगने लगता है । इस अजीबोगरीब स्‍थिति में आजकल गर्भाशय निकालने के काम को अंजाम दिया जाने लगा है । आवश्‍यकता हो या न हो डॉक्‍टर लोग शरीर के अंग को निकाल बाहर करने को बेताब हो जाते हैं । एक ऐसे ही मामले में मैंने दो लेडी डॉक्‍टरों की राय एक-दूसरे के सामने रख दी । पर्चे भी दिखाये, दोनों डूाक्‍टरों ने जिन स्‍थानों पर टेस्‍ट करवाये थे, उनकी रिपोर्टों में भयानक अन्‍तर था । वे डॉक्‍टरों की मर्जी के मुताबिक रपट बना कर देते हैं ताकि मरीज पर अनावश्‍यक ऑपरेशन का बोझ डाला जा सके। मैंने ऐसे मामलों से पत्‍नी को आगाह किया और समझदारी यह रही कि हम लोग टेस्‍टों के चक्‍कर में ही नहीं पड़े ।

हकीकत तो यह है कि कई बार पत्‍नी की बीमारी का ढोल पीटा जाता है ताकि उनकी तरफ घर-परिवार विशेषकर पति महोदय का ध्‍यान जाये। वे तबज्‍जो चाहती हैं और पति व्‍यस्‍त हैं, ऐसी स्‍थिति में बीमारी का बहाना बनाना, ‘डॉक्‍टर के यहां ले चलो।' ‘मुझे चेक-अप के लिए जाना है, आप भी साथ चलिये । पता नहीं अस्‍पताल में क्‍या हो ।' जैसे वाक्‍यों से पति महोदय को नवाजा जाता है। बेचारे पति महाराज ने जो गलती शादी करके की थी उसे सुधारने के लिए अस्‍पताल जाते हैं और आते हैं और जाते हैं । डॉक्‍टरों के नुस्‍खों और बीबी की बीमारियों में एक सीधा अनुपात होता है । डॉक्‍टर की भारी फीस, जांचों के बिलों और दवा के बिलों को देख देखकर कई बार पति स्‍वयं बीमार हो जाते हैं । एक बार तो मैं स्‍वयं जनाना अस्‍पताल के बाहर गिर गया था । यह अलग बात है कि मेरे बीमार होने के समाचार-मात्र से पत्‍नी स्‍वस्‍थ हो गयी थी ।

पति-पत्‍नी की बीमारी की चर्चा में एक और चीज महत्‍वपूर्ण होती है-बच्‍चे । बच्‍चे जब तक छोटे होते हैं, पत्‍नी और पति की आंखों के तारे होते हैं । मगर बाद में वे पति-पत्‍नी की बीमारी के कारण भी बन जाते हैं । कई बार बीवी की बीमारी की सुन कर मायके वाले आ जाते हैं । तीमारदारी के नाम पर मोहल्‍लेवालियां आती है और आपको बता दूं कि तब जो आपसी संवाद होते हैं वे लिखना मुमकिन नहीं है ।

बीबी अपनी बीमारी के दौरान भी घर-व्‍यवस्‍था पर बड़ी चौकन्‍नी निगाह रखती है। कौन सी चीज कहां रखी जाये, दूध को फ्रिज में रखा था या नहीं तथा दही, सब्‍जी को ढकना है आदि आदेश को खाट पर पड़ी-पड़ी ही दे देती है ।

पत्‍नी की बीमारी का समाचार जंगल की आग की तरह चारों तरफ फेल जाता है । कई बार मैंने देखा है कि मैं बीमार रहूं तो कोई जिक्र तक नहीं । मगर उनकी बीमारी का जिक्र बहुत जल्‍दी होता है । रोज फोन, पत्र आते हैं।

बीवी की बीमारी झेलने वाले पति वास्‍तव में दया और सहानुभूति के पात्र हैं । खासकर वे पति जिनके घर में कोई असाध्‍य बीमारी है । मगर कुछ उदाहरण ऐसे भी देखें कि इधर पूर्व पत्‍नी का निधन हुआ और उधर पति महोदय ने सेहरे की तैयारी कर ली ।

पत्‍नी की बीमारी दाम्‍पत्‍य जीवन में एक आवश्‍यक घटना या दुर्घटना है । इसे हर एक को झेलना ही पड़ता है । बहादुरी से इस को झेलना ही सच्‍चे पति की निशानी है ।

कभी-कभी सोचता हूं, क्‍या ऐसा नहीं हो सकता कि घर परिवार से बीमारी नाम की चीज ही उठ जाये । मगर ऐसा असंभव है क्‍योंकि बीवी ही नहीं सब बीमार होते हैं बल्‍कि औसत भारतीय पत्‍नियां तो अपने स्‍वास्‍थ्‍य की परवाह किये बिना घर परिवार को सजाती संवारती हैं । ऐसी ही बीवियों के कन्‍धों पर टिका है सुखी दाम्‍पत्‍य का रहस्‍य ।

यह आलेख पढने के बाद शायद आप सोच रहे होंगे कि इस विषय को कहां खत्‍म किया जायेगा तो साहब सक शेर अर्ज है-

उनके देखे से आ जाती है चेहरे पर रौनक ।

वो समझते हैं बीमार का हाल अच्‍छा है ॥

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यशवन्‍त कोठारी

86, लक्ष्‍मीनगर ब्रह्मपुरी बाहर

जयपुर 302002

फोन 2670596

1 blogger-facebook:

  1. वाकई सर जी, पत्नी की बीमारी से हर पति परेशान हो जाता है या उसे होना पड़ता है, लेकिन आपने उस सोच को जिस तरह से व्यंग के रूप में अवतरित किया है वह काबिले तारीफ है, "पत्नी की बीमारी"

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