बुधवार, 31 अगस्त 2011

सुरेन्‍द्र अग्‍निहोत्री की कविता - हम जानते हैं

हम जानते हैं

हर इंसान में

सरकार होती है

एक दिन के लिए

जिम्‍मा मिले तो

आश्‍वस्‍त करता हूं

दर्द की परछाइयाँ

भूली-बिसरी बात होगी

बदल जायेगी

सत्‍ता की परिभाषा

नहीं होगी

घोटाले बाज की बेल

अन्‍ना को जेल

संसद, सांसदों की नही

जनता की होगी

जन के अधिकारों की

अब नही कटौती होगी

होने को कुछ भी हो सकता है ?

हे राम !

अलविदा भाजपा

या कांग्रेस

बेमानी लोकशाही

जब लोक के लिए होगी

जनता तब

चुप नहीं होगी।

---

 

-सुरेन्‍द्र अग्‍निहोत्री

राजसदन- 120/132

बेलदारी लेन, लालबाग

लखनऊ

मो0ः 9415508695

2 blogger-facebook:

  1. बेनामी4:33 pm

    कविता बेहतरीन हैं……सुन्दर भावों के धागे में पिरो कर शब्दों की माला बहुत खूबसूरत है….धन्यवाद…:)निष्ठा

    उत्तर देंहटाएं
  2. बेनामी5:20 pm

    Kavita bahut achchhi hai. AKSonkar

    उत्तर देंहटाएं

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