एस. के. पाण्डेय की स्वतंत्रता-दिवस विशेष बाल-कविता : आजादी

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आजादी

(१)

भारत में आ अंग्रेजों ने अपना दाँव दिखाया था ।

धीरे-धीरे सारे भारत में अपना पैर जमाया था ।।

अंग्रेजों ने हम सब पे मनमाना राज चलाया था ।

‘लूट-फूट’ से अंग्रेजों ने भारत को गुलाम बनाया था ।।

 

(२)

अंग्रेजों के जुल्मों से फटती भारत की छाती थी ।

पराधीनता की बेड़ी से भारत माता अकुलाती थीं ।।

मुक्त करो इस बंधन से बेटों से कहती जाती थीं ।

बोस, भगत, आजाद आदि को नींद नहीं तब आती थी ।।

 

(३)

आजादी के लिए सभी को लड़नी पड़ी लड़ाई थी ।

बीर सपूतों ने खुश हो बाजी प्राणों की लगाई थी ।।

बहुत वर्षों के बाद सुनों वह पावन शुभ घड़ी आई थी ।

सरल नहीं थी राह, एक न बहुत बड़ी कठिनाई थी ।।

 

(४)

पंद्रह अगस्त सन सैतालिस को अपना भारत आजाद हुआ ।

विदेशी लुटेरों से समझो तबसे आबाद हुआ ।।

इससे हम पंद्रह अगस्त का राष्ट्रीय पर्व मनाते हैं ।

खुश होकर हम बड़ी शान से तिरंगा फहराते हैं ।।

 

(५)

आजादी तो मिली लेकिन हम सबसे कुछ छूट गया ।

बोस आदि के स्वर्णिम भारत का सपना मानो टूट गया ।।

गद्दारों ने वीर सपूतों के खून का घूँट पिया ।

भ्रष्टाचारी गद्दारों ने खुद ही देश को लूट लिया ।।

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डॉ. एस. के. पाण्डेय,

समशापुर(उ. प्र.) ।
URL: http://sites.google.com/site/skpvinyavali/

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