सोमवार, 15 अगस्त 2011

राजीव श्रीवास्तवा का आह्वान - ऐ! मेरे देशवासियों इस बार १५ अगस्त कुछ ऐसे मनाना :

इस बार १५ अगस्त कुछ ऐसे मनाना,

ऐ! मेरे देशवासियों इस बार १५ अगस्त कुछ ऐसे मनाना,

की आने वाली पीढ़ी याद करे ,और याद करे ज़माना!

 

श्वेत वस्त्र जब पहनो तो तन भी पावन रखना ,

सर पर गर गाँधी टोपी हो तो हिंसा के आगे ना झुकना!

 

हाथ में लो जो तिरंगा तो ,प्रेम से उसे लहराना,

उँचाई पर प्रेम भाव से देश ध्वज फहराना!

 

इस बार वही झंडा फहराये जिसके दिल में हो देश से प्यार,

यहाँ वहाँ के झूठे बोल, बोल कर मत करना देश का तिरस्कार!

 

राष्ट्रा गान जब मुख से निकले तो बह जाये अमृत धारा,

देश भक्ति के गीतों से महक उठे ये गुलशन सारा!

 

हर धर्म के लोगों को दिल से अपने गले लगाना,

इसी देश के सब बंदे है फिर भाई -भाई बन जाना!

 

याद करना उन वीरों को जिन्होंने हँस कर शीश कटवाया है,

चंदन से नही अपने लहू से धरती माँ को तिलक लगाया है!

 

नही इतनी सस्ती थी ये आज़ादी, जिस पर आज हम इतराते हैं,

कितने शहीदों की छाती पे खड़े है,ये क्यू भूल हम जाते हैं!

 

इस बार चुटकी भर मिट्टी से खुद को तिलक लगा लेना,

वीर शहीदों को याद कर थोड़े अश्रु बहा लेना!

 

आज कुछ भ्रष्ट लोगों ने देश का सर झुकाया है,

धरती माँ के दामन में कला दाग लगाया है!

 

जिनके हाथो में हमने इस देश की इज़्ज़त सौपी है,

मुख से राम कह कर इन्होंने बगल में छुरी घोंपी है!

 

और कितने १५ अगस्त यूँ ही आ कर चले जाएँगे,

यही हाल रहा तो हम एक दिन ख़ाक में मिल जाएँगे!

 

अभी भी वक़्त है सुन लो, धरती माता की पुकार,

इस १५ अगस्त से ही सही,  अब तो कर लो अपने वतन से प्यार!

डॉक्टर राजीव श्रीवास्तवा

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