रविवार, 4 सितंबर 2011

पुरुषोत्तम व्यास की कविता - सबको सड़क पर चलना


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सबको सड़क पर चलना
ऊँची- नीची
उतार-चढ़ाव
कभी इधर- से
कभी उधर- से
चौराहे पर मिलना
सबको सड़क पर चलना ।
 

दिवस या निशा
गीली गीली सड़कों पर
गिर के संभलना
अपने या परायें से मिलना या -बि़छुड़ना
सबको सड़क पर चलना ।
 
जीवन या मृत्यु
सब में आना जाना
घरौंदे के ओर जाने वाली सड़क
सबसे प्यारी
सबको सड़क पर चलना ।

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