ज्योति चौहान की कविता - शिक्षक तुझे धन्यवाद

--- विज्ञापन ---

----------- *** -----------

शिक्षक तेरा धन्यवाद

शिक्षक तेरा धन्यवाद ,  दिया है तुमने हमें वरदान ,

हूँ जहाँ भी मैं उसमें  तेरा है बड़ा योगदान,  

नहीं है शब्द कैसे करूं मैं तेरा धन्यवाद,

बस चाहिए तेरा आशीर्वाद,

शिक्षक की महिमा कभी होगी ना कम,

भले कर लें कितनी ही उन्नति हम,

शिक्षक तेरा धन्यवाद!

 

शिक्षक तू है शिक्षा का सागर,

शिक्षक बांटे ज्ञान बराबर,

शिक्षक तू है मेरा भगवान्, 

माता पिता का नाम तू है दूजा,

प्यासे को जैसे मिलता पानी ,

शिक्षा तू है वो ही जिंदगानी ,

शिक्षक तू ना  देखे जात-पात ,

तू न करता कभी पक्ष-पात ,

निर्धन हो या हो धनवान ,

तू सबको समझे एक-सामान ,

 

शिक्षक तू है मांझी नाव- किनारा  ,

तू ही देता डूबते को किनारा ,

शिक्षक तू सदा ही कहता -

"श्रम लगन है सच्चा गहना "

शिक्षक तेरा धन्यवाद,

तुझको करती हूँ मैं शत-शत प्रणाम

---

ज्योति चौहान ,सेक्टर -२२ ,नॉएडा 

JYOTIPATENT@GMAIL.COM

--- विज्ञापन ---

----------- *** -----------

_____________________________________

1 टिप्पणी "ज्योति चौहान की कविता - शिक्षक तुझे धन्यवाद"

  1. पहली कक्षा की शिक्षिका--
    माँ के श्रम सा श्रम वो करती |
    अवगुण मेट गुणों को भरती |
    टीचर का एहसान बहुत है --
    उनसे यह जिंदगी संवरती ||


    माँ का बच्चा हरदम अच्छा,
    झूठा बच्चा फिर भी सच्चा |
    ठोक-पीट कर या समझाकर-
    बना दे टीचर सच्चा-बच्चा ||


    लगा बाँधने अपना कच्छा
    कक्षा दो में पहुंचा बच्चा |
    शैतानी में पारन्गत हो
    टीचर को दे जाता गच्चा ||

    उत्तर देंहटाएं

रचनाओं पर आपकी बेबाक समीक्षा व अमूल्य टिप्पणियों के लिए आपका हार्दिक धन्यवाद.

स्पैम टिप्पणियों (वायरस डाउनलोडर युक्त कड़ियों वाले) की रोकथाम हेतु टिप्पणियों का मॉडरेशन लागू है. अतः आपकी टिप्पणियों को यहाँ प्रकट होने में कुछ समय लग सकता है.