अदिति मजूमदार की कविता - टूटा वृक्ष

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एक टूटा वृक्ष
एक टूटा वृक्ष हूँ
अपनी आखिरी
सांसें गिन रहा हूँ


परोपकारी बनने का सपना देखा
कर्मयोगी भी बना
लेकिन अपनी शाखाओं को
बचा न सका
दिमाग उम्र दिल
सब लगा दिया
मेरी ख़ामोशी ने
दुर्दशा को निश्चित कर दिया


अगर मैं बोल सकता
कहता कि मुझे बचाओ
मुझे काट घर न बनाओ
मुझमें भी कई घर है
उन्हें तो बचाओ


उंगुलियों पर गिन रहा हूँ
पीड़ित मस्तिष्क में
धरती में सामने के लिए
जर्जरित हो रहा हूँ.
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अदिति मजुमदार ( अमेरिका )


परिचय ---
जन्म पश्चिम बंगाल में कोलकता शहर में हुआ ।पिता के तबादले के कारण भारत के विभिन्न शहरों में अपनी पढ़ाई पूरी करती रही।
कोलकता विश्वविद्यालय से एम.ए. तथा जाधवपुर विश्वविद्यालय से बी.एड. की डिग्री प्राप्त कर शिक्षण और लेखन में कार्य करती रही।
२००६ में अमेरिका आने के उपरांत कई विदेशी पत्र- पत्रिकाओं में लेख छपने लगे, जिससे लिखने की और प्रेरणा मिली ।
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पता: ३०० इंडियन ब्रांच ड्रिव
मोरिस्विल ,नोर्थ करोलिना.
यू एस ए

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1 टिप्पणी "अदिति मजूमदार की कविता - टूटा वृक्ष"

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