रविवार, 11 सितंबर 2011

एस. के. पाण्डेय की बाल कविता - तोते की सीख

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तोते की सीख

(१)

मैं नहीं जीव भक्षी हूँ ।

सीधा-साधा पक्षी हूँ ।।

केवल फल ही खाता हूँ ।

मैं तोता कहलाता हूँ ।।

(२)

पेड़ के ऊपर घर में रहता फल खाता जल पीता हूँ ।।

पालो तो पिंजड़े में भी भाई मैं बस जाता हूँ ।

मुझे पढ़ाओ तो पढ़ जाऊँ राम-राम मैं गाता हूँ ।

झूठ नहीं है भाई मेरे सच-सच मैं बतलाता हूँ ।।

(३)

प्यारी-प्यारी बोली मेरी प्यार से ही मैं रहता हूँ ।

किसी को मैं न कभी सताता न ही किसी से लड़ता हूँ ।।

एक दूजे को सभी सताते दुनिया से मैं डरता हूँ ।

पशु-पक्षी को खाने वाले दिन-दिन बढ़ते कहता हूँ ।।

(४)

करके देखो आप बिचार ।

सबको जीने का अधिकार ।।

ठीक नहीं है अत्याचार ।

करना सीखो सबसे प्यार ।।

डॉ. एस. के. पाण्डेय,

समशापुर (उ. प्र.) ।

http://www.sriramprabhukripa.blogspot.com/

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(चित्र - अमरेन्द्र, फतुहा, पटना की कलाकृति)

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