गंगाप्रसाद शर्मा 'गुणशेखर' की हास्य व्यंग्य कविता - कागज़ के पुल लोहे के इंजीनियर हमारे सुराज में ऐसे कमाल हुए

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    मेमने तुम्हारे लिए हलाल हुए
    जलाओ दिए भेड़िए बहाल हुए

    गाँव में बकरीद मनी खैर करो
    शहर में कत्ल नौनिहाल हुए

    कागज़ के पुल लोहे के इंजीनियर
    हमारे सुराज में ऐसे कमाल हुए

    मिटेगी सबकी गरीबी उदास न हो
    अभी राजा और मंत्री मालामाल हुए

    सड़क को संसद बनाते हो शर्म करो
    तुम्हारे जैसों से रोड बदनाम हुए

    -डॉक्टर गंगाप्रसाद शर्मा 'गुणशेखर'

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