गुरुवार, 15 सितंबर 2011

गंगाप्रसाद शर्मा 'गुणशेखर' की कविता - मेरी प्यारी प्यारी नानी

Amrendra_14

मेरी प्यारी-प्यारी नानी 


मेरी मम्मी की, मम्मी की
है कुछ अजब कहानी
किसी बात पर चिढ़ जाएं ,
तो,याद करा दें नानी।
मेरी प्यारी-प्यारी नानी।


संकेतों से पास बुलाके
बिना बात की बात बना के
थपकी दे-दे रोज़ सुनाएं
लोरी,कथा,कहानी। 
मेरी प्यारी-प्यारी नानी।


उनको कोई बात  बताना
भैंस के आगे बीन बजाना 
किन्तु प्यार के दो बोलों से
हो जाएं पानी-पानी।
मेरी प्यारी-प्यारी नानी। 


कभी लगें कविता की धारा
लगतीं कभी कहानी। 
कभी-कभी चुटकुले सरीखी
फूटे मधुरिम बानी।
मेरी प्यारी-प्यारी नानी।


नानी के दो होंठ रसीले,
अमृत-से मधुमय औ गीले
बड़े प्यार से चुपके-चुपके
गालों पर लिख रहे कहानी।
मेरी प्यारी-प्यारी नानी।  

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(चित्र - अमरेन्द्र. फतुहा, पटना की कलाकृति)

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