गुरुवार, 15 सितंबर 2011

सुमित शर्मा की कविता - फलक पर चाँद तारों संग...

फलक पर चाँद-तारों संग,
    रोशनी की बहारों संग,
    खुले आकाश में आजादी के
    सारे नजारों संग,
    बड़ी दिलकश नुमाइश है,
    मुझे उड़ने की ख्‍वाहिश है।

    छिड़ी रचनात्‍मकता की जंग,
    इंद्रधनुष के मैं भी संग,
    विधाता की कूची बनकर
    भरुँ जीवन में ऐसे रंग,
    ये मेरी आजमाइश है,
    मुझे उड़ने की ख्‍वाहिश है।

    घटाओं की प्‍यारी हुड़दंग,
    प्रफुल्‍लित हर-मानस हर-अंग,
    बूंदें बनकर जल की मैं भी
    बरसने का सीखूँ कोई ढंग,
    ये भी मेरी फरमाइश है,
    मुझे उड़ने की ख्‍वाहिश है।

       

    आत्‍म-परिचय
   
    नाम - सुमित शर्मा
    जन्‍मतिथि - 31 जनवरी 1992
    पता -  तहसील चौराहा,गायत्री कालोनी,
             खिलचीपुर, जिला- राजगढ़, म.प्र.
    मोबाइल नं. - 09407258690
    शिक्षा - बी.ई.-चतुर्थ वर्ष (कम्‍प्‍यूटर साइंस) अध्‍ययनरत
    साहित्‍यिक रचनाएँ  - चलती रहेगी मधुशाला(काव्‍य) , रिश्‍ते (उपन्‍यास), कुछ कवितायें/गजलें,
                 लघु कहानियाँ । (सभी अप्रकाशित) 

3 blogger-facebook:

  1. Dear Sumit,
    I liker ur poem.Its great.Congrats and thank you for this wonderful work.

    sachin kaushik

    उत्तर देंहटाएं
  2. छिड़ी रचनात्‍मकता की जंग,
    इंद्रधनुष के मैं भी संग,
    विधाता की कूची बनकर
    भरुँ जीवन में ऐसे रंग,
    ये मेरी आजमाइश है,
    मुझे उड़ने की ख्‍वाहिश है।
    WAWOOOOOOOOOO..........

    उत्तर देंहटाएं

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