ज्योति चौहान की प्रेम कविता - जुदाई

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जुदाई में तेरी मत पूछ -क्या हुआ मेरा हाल
जुदा होकर तुमसे कैसे कहूं -"क्या दिन थे वो"
वो दिन, दिन नही, मेरे लिए तो रात थे,
हर पल तुम्हें याद करती ,
वो पल भी क्या पल थे- “जब साथ हम हुआ करते थे”
आये तुम सावन क़ी तरह
जिंदगी तब जिन्दगी लगने लगी
खुशियों क़ी बरसात लेकर- आये तुम “मेरे मन के आँगन में”
 
दामन को फूलों से भर दिया
रंगीन ख्वाब मैं देखने लगी
चारों तरफ सब अच्छा लगने लगा
लगता था तब कि जैसे-“ सारी ये दुनिया खुश है”
उड़ने लगी मैं भी हवा में
फूलों की तरह तुम सुंदर, मोर की तरह मनमोहक
तुमको देखते ही साँसें मेरी क्यूँ रुक जाती
तुम्हारी तरफ क्यूँ मैं खिंचती जा रही थी
फिर जिंदगी को अचानक मेरी खुशियां रास ना आई
 
क्यूँ और क्यूँ हम जुदा हुए
क्यूँ कुछ भी मैं कर ना सकी
क्यूं किस्मत को ये मंज़ूर नहीं हुआ ,
भूल गयी थी मैं –“कि इंसान कठपुतली होता है” ,
उसे ख्वाब सजाने का कोई हक़ ही नहीं ,
जुदाई में तेरी मत पूछ -“क्या हुआ हाल मेरा”  
क्यू भूल गयी थी मैं –
“कि नदी के छोर भी कभी एक हुआ करते हैं ,
कि आसमान भी कभी धरती से मिला करता है ,
 
और मिल न सके क्यूँ हम ,
कश्ती पहुंच ना सकी किनारे पर ,
डूबते को न मिला तिनके का सहारा,
उजड़ गया क्यू सपनों का छोटा-सा आशियाना ,
हर पल गुमशुदा मैं रहने लगी,
बुझी -२ सी ,पतझड़ के मौसम सी मैं हो गयी
तेरी जुदाई को मैं सह न पा रही थी
मेरी वो हँसी न जाने कहाँ खो गयी
चुटकलों पर भी मुझे हँसी न आती
महफिलों में भी अकेली मैं हो गयी
उन लम्बे रास्तों पर तनहा मैं चलती जा रही हूँ , बस चलती जा रही हूँ
जुदाई में तेरी मत पूछ -क्या हुआ हाल मेरा” 
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परिचय :
नाम: ज्योति चौहान
जन्म स्थान :-डेल्ही ,मूलत: उत्तर प्रदेश की है
जन्म तिथि :- 12.6.1982.
शिक्षा : दिल्ली विश्वविद्यालय से स्नातक , साथ ही रसायन-शास्त्र में स्नातकोतर,शिक्षा में स्नातक , पुस्तक- विज्ञान तथा सूचना तकनीकी में स्नातक, और कंप्यूटर में पी.जी.डी.सी.ए
व्यवसाय :- एक बहुराष्ट्रीय कंपनी में कार्यरत हैं . नोएडा में अनुसंधान और विकास विभाग में एक वैज्ञानिक के रूप में काम कर रही हैं.
रूचि : सामाजिक सेवा , पड़ना तथा कविता , निबंध इत्यादि लिखना
उपलब्धि : स्कूलिंग में कविता ,निबंध इत्यादि तथा सांस्कृतिक कार्यक्रम में पुरुस्कार प्राप्त, कवितायें प्रसिद्ध समाचार- पत्र , मैगज़ीन, वेब-पोर्टल पर प्रकाशित
संपर्क :- ज्योति चौहान ,सेक्टर-२२, sector-22,नॉएडा-२०१३०१
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(चित्र - अमरेन्द्र , फतुहा, पटना की कलाकृति)

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4 टिप्पणियाँ "ज्योति चौहान की प्रेम कविता - जुदाई"

  1. सुन्दर व सार्थक कविता के लिये ज्योति जी को मुबारकबाद्।

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  2. ज्योति जी विरह से परिपूर्ण रचना है
    बहुत सुन्दर..........................................

    उत्तर देंहटाएं

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