सोमवार, 5 सितंबर 2011

वन्‍दना शशांक मिश्र भारती की शिक्षक दिवस विशेष कविता - गुरु-शिष्य

हे सृष्‍टा! हम गुरु- शिष्‍य साथ हों

आशीवर्चन युक्‍त आपके हाथ हों

विश्‍व में किसी से न अब शोषित हों

प्रभु आपसे रक्षित और पोषित हों।

 

आपकी दया और अनुकम्‍पा से

हम गुरु शिष्‍य हर्षित गर्वित हों

विनम्र बनें बुद्धि- कौशल से युक्‍त हों

वसुधैव कुटुम्‍बकम्‌पन घोषित हों।

 

सर्वे भवन्‍तु सुखिंनः से मन्‍त्र हों

सर्वे निरोगः से चल रहे यन्‍त्र हों,

नीति श्रीकृष्‍ण की दया हो बुद्ध की

द्वेष कहीं न , गढें स्‍नेह सूत्र हों॥

 

दुबौला-रामेश्‍वर-262529 पिथौरागढ़ उत्‍तराखण्‍ड ईमेलः&shashank.misra73@rediffmail.com

3 blogger-facebook:

  1. बहुत सुन्दर आह्वान्।

    उत्तर देंहटाएं
  2. Bandhaii swikaren shashakt or sarthak rachna ke liye

    उत्तर देंहटाएं
  3. पहली कक्षा की शिक्षिका--
    माँ के श्रम सा श्रम वो करती |
    अवगुण मेट गुणों को भरती |
    टीचर का एहसान बहुत है --
    उनसे यह जिंदगी संवरती ||


    माँ का बच्चा हरदम अच्छा,
    झूठा बच्चा फिर भी सच्चा |
    ठोक-पीट कर या समझाकर-
    बना दे टीचर सच्चा-बच्चा ||


    लगा बाँधने अपना कच्छा
    कक्षा दो में पहुंचा बच्चा |
    शैतानी में पारन्गत हो
    टीचर को दे जाता गच्चा ||

    उत्तर देंहटाएं

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