शुक्रवार, 9 सितंबर 2011

गंगा प्रसाद शर्मा गुणशेखर की हास्य-व्यंग्य कविता ( दोहे )

चर गईं खेत-खरिहान तुम्हारी मौसी भैंसी
तुम रहे खड़े पगुराय तुम्हारी ऐसी - तैसी


तुम नहीँ जानते भगत सिंह, सुखदेव कौन थे
इतने हुए महान तुम्हारी  ऐसी - तैसी


तुमने खूनी सींगों से है जमकर खेली होली
हम हैं लहूलुहान तुम्हारी  ऐसी  -  तैसी


दुर्बल गायों का चारा तक खा डाला सब तुमने
हे गोपालक भगवान तुम्हारी  ऐसी - तैसी


दाने-दाने को मोहताज जहाँ मजदूरों के बच्चे
तुम निगल रहे पकवान तुम्हारी  ऐसी - तैसी


तुम अरबों-खरबों की कोठी में रहो शान से
भूखों मरे किसान तुम्हारी  ऐसी - तैसी

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