रविवार, 11 सितंबर 2011

आर. के. भारद्वाज की कविता - बच्चे

image

बच्‍चे

सभी कहते हैं कि बच्‍चे बडे अच्‍छे होते हैं,

स्‍कूल जाते है तो पिटते हैं, नही जाते हैं तो पिटते हैं

वैसे सभी कहते हैं कि बच्‍चे बडे अच्‍छे होते हैं

घर में पूर्वजों को बन्‍दर कहें तो पिटते हैं

स्‍कूल में न कहें तो पिटते हैं,

 

वैसे सभी कहते हैं कि बच्‍चे बडे अच्‍छे होते हैं

जिससे यह नाराज होते हैं, अगले पल उसी की बाहों में होते हैं

अच्‍छा बुरा इनकी नजरों में समान होता हैं

इन्‍हीं का अपमान इन्‍हीं का मान होता हैं

आप कुछ बच्‍चों को पाते हैं किसी बडे स्‍कूल में

किसी माल में, किसी बडी कार में, किसी बडे घर में

कुछ बच्‍चे इन तथाकथित बच्‍चों से अलग होते हैं

 

ये अक्‍सर पाये जाते हैं किसी हज्‍जाम की दुकान पर

किसी मैकेनिक की वर्कशाप पर, या नये बनते किसी मकान पर

कभी कभी इनको कूडा बीनते, जूठन खाते भी पाया जाता है

और बाल श्रम के कानून को ठेंगा दिखाया जाता है

ये कटे कटे से बच्‍चे बडों से बडे होते हैं

सभी कहते हैं कि बच्‍चे बडे अच्‍छे होते है।

 

ये आपको मैन से जैन्‍टल मैन बनाते हैं,

आपके दाढी, बाल बनाते हैं, जूतों को चमकाते हैं

स्‍वरोजगार को नारा ये ही तो साकार करते हैं

अपने अपने परिवार का साज सवांर करते हैं

कभी आपने शेव कराने के बाद इनके गालों को सहलाया है

इनकी कहानी सुनकर क्‍या कभी आपका दिल भर आया है

 

ये बाप के लिये दवा लाते हैं, बहन के लिये कंगन लाते हैं

कभी भी चाट पकौडी मिठाई को देखकर नहीं ललचाते हैं,

ये नगें पांव जाते हैं, आपका फेंका कूडा, कारटन, खाली बोतल में

ये अपना रोजगार पाते हैं, दिनभर ठोकर खाते हैं, फिर भी चार पैसे कमा लाते हैं

ये अपने भारत के नौनिहाल हैं, ये हिन्‍दोस्‍तॉ के कल है

 

यदि आप ऐसा ही भारत देखना चाहते हैं तो फिर इन्‍हें इन्‍हीं के हाल पर छोड दो

लेकिन अगर आप इनको बदलना चाहते हैं तो आप इस हालात को एक नया मोड दो

इन्‍हें गले लगाये, इन्‍हें नयी राह दिखायें,

फिर इनकी खुशहाली लौट आयेगी

भारत में रोज दिवाली मन जायेगी ।

----

RK Bhardwaj

151/1 Teachers’ Colony,Govind Garg,

Dehradun (Uttarakhand)

E mail: HYPERLINK "mailto:rkantbhardwaj@gmail.com" rkantbhardwaj@gmail.com

---

(चित्र- अमरेन्द्र , फतुहा, पटना की कलाकृति)

0 blogger-facebook

एक टिप्पणी भेजें

रचनाओं पर आपकी बेबाक समीक्षा व अमूल्य टिप्पणियों के लिए आपका हार्दिक धन्यवाद.

स्पैम टिप्पणियों (वायरस डाउनलोडर युक्त कड़ियों वाले) की रोकथाम हेतु टिप्पणियों का मॉडरेशन लागू है. अतः आपकी टिप्पणियों को यहाँ प्रकट होने में कुछ समय लग सकता है.

------------------------------------------------------------

प्रकाशनार्थ रचनाएँ आमंत्रित हैं...

1 करोड़ से अधिक पृष्ठ-पठन, 1.5 लाख गूगल+ अनुसरणकर्ता, 1500 से अधिक सदस्य

/ 2,500 से अधिक नियमित ग्राहक तथा 2000 से अधिक फ़ेसबुक प्रसंशक
/ प्रतिमाह 10,00,000(दस लाख) से अधिक पाठक
/ 10,000 से अधिक हर विधा की साहित्यिक रचनाएँ प्रकाशित
/ आप भी अपनी रचनाओं को इंटरनेट के विशाल पाठक वर्ग का नया विस्तार दें, आज ही नाका से जुड़ें. नाका में प्रकाशनार्थ रचनाओं का स्वागत है.किसी भी फ़ॉन्ट, टैक्स्ट, वर्ड या पेजमेकर फ़ाइल में रचनाएँ rachanakar@gmail.com पर ईमेल करें. अधिक जानकारी के लिए यह लिंक देखें - http://www.rachanakar.org/2005/09/blog-post_28.html

विश्व की पहली, यूनिकोडित हिंदी की सर्वाधिक प्रसारित, समृद्ध व लोकप्रिय ई-पत्रिका - नाका

मनपसंद रचनाएँ खोजकर पढ़ें
गूगल प्ले स्टोर से रचनाकार ऐप्प https://play.google.com/store/apps/details?id=com.rachanakar.org इंस्टाल करें. image

--------