ऋता शेखर ‘मधु’ की एक हाइगा (चित्रमय कविता) - बापू के बन्दर

हाइगा (चित्रमय कविता) - बापू के बन्दर

Bapu ke bander (Custom)

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2 टिप्पणियाँ "ऋता शेखर ‘मधु’ की एक हाइगा (चित्रमय कविता) - बापू के बन्दर"

  1. बहुत अच्छा हाइगा है ...बापू की बात को और भी अच्छे से याद दिलाता हुआ !
    बधाई !

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