शुक्रवार, 9 सितंबर 2011

हिमांशु कुमार चौहान 'हरित' की दो प्रेम कविताएँ

 

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खता

दिल में जज्बात जागे ये खता ना थी ...
खता थी सरे बाजार नुमाइश कर बैठा ......
चाँद को देखना गुनाह ना था ......
गुनाह था उसे पाने की ख्वाहिश कर बैठा ......
किसी को प्यार करना अपराध ना था ....
अपराध था बदले में मोहब्बत की फरमाइश कर बैठा .........

आज जब बन बैठा सजाये मौत का हकदार ..
सोचता हूँ ,,,खता क्या थी ,,बस यही ना ................................................
के नफरत की दुनिया में प्यार की आजमाइश कर बैठा ......

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तेरी निगाहों ने

कुछ मुझसे कहा है ..तेरी अनजान निगाहों ने .......clip_image003
तू टूटना चाहती है ...आके मेरी बाँहों में ..........clip_image005
मैंने भी तुझको माँगा ...हर एक दुआओं में ........clip_image003[1]
तेरा इश्क सबसे हँसी है ..मेरे हर एक गुनाहों में .....clip_image005[1]
सदियों से हरित बैठा ...बस .तेरी ही राहों में ..............clip_image003[2]
अब आ भी जा मेरी जाँ...तू मेरी पनाहों में ........clip_image005[2]

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हिमांशु कुमार चौहान (हरित)

haritchauhan@gmail.com

Production Executive

IFB Automotive Pvt Ltd, Gurgaon

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