एस. के. पाण्डेय की लघुकथा - चूक

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चूक

बसंती ने अपने पति रामू से कहा “मेरे लिए एक गन्ना ले आओ” । रामू पढ़ाई कर रहा था, इसलिए तुरंत अपने छोटे भाई को आवाज दिया कि एक गन्ना ले आओ । शायद बहू गन्ना माँग रही है, यह सोचकर रामू के पिताजी ने गन्ना लाकर घर में पहुँचा दिया ।

थोड़ी देर बाद रामू कमरे से बाहर निकला तो देखा आँगन के एक कोने में गन्ना रखा हुआ है ।

रामू बसंती से बोला “गन्ना आ तो गया, चूसा नहीं तुमने” । बसंती ने आवेश में कहा “मुझे नहीं चूसना है । भगवान करें कि तुम्हारे जैसा पति दुश्मन को भी न मिलें” ।

रामू अवाक रह गया । कुछ बोलने अथवा पूछने का साहस नहीं जुटा पाया । उसके मन में यही आ रहा था कि लोग सच ही कहते है कि नारी को तो स्वयं विधाता भी नहीं समझ सकते । आखिर अचानक क्या हो गया इन्हें ? सोचता रहा पर समझ न सका कि क्या चूक हो गई ?

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डॉ एस के पाण्डेय,

समशापुर (उ.प्र.) ।

http://www.sriramprabhukripa.blogspot.com/

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(चित्र- अमरेन्द्र, फतुहा, पटना की कलाकृति)

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1 टिप्पणी "एस. के. पाण्डेय की लघुकथा - चूक"

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