शुक्रवार, 9 सितंबर 2011

मालिनी गौतम की कविता - ए.. लड़की... बौरा गई है क्या...?

लड़की

ऐ लड़की...........!

ध्यान किधर है तेरा.....

बौरा गई है क्या.....?

 

काम के वक्त

पता नहीं क्या-क्या

चलता रहता है

तेरे दिमाग में....

रोटी बेलते-बेलते

कहाँ खो जाती है तू !

 

हाथ बेलन पर चलते ही रहते हैं

और तवे पर पड़ी रोटी

जल कर खाक हो जाती है!

 

क्या कुलबुलाता रह्ता है

तुझमें हरदम

कभी-कभी बर्नर से

उतरा हुआ तवा

एक ओर पड़ा रह जाता है

और तू धप्प से रोटी डाल देती है

गैस के बर्नर पर…

जाने क्या-क्या ऊल-जलूल

सोचती रहती है......

 

ओ महारानी!

ये चाय-शक्कर के डिब्बे उठाकर

फ्रिज में क्यों रख आई....?

यह लो ! सठिया गई है क्या....?

 

दही की भगोनी

कपड़ों की अल्मारी में

रखने चली है....

अन्धी है क्या....?

 

आँखों के सामने

दूध भर...र...र..करके

उफन गया

और तू खड़ी-खड़ी ताक रही है!

 

कह रही हूँ...

हो क्या गया है तुझे..?

काम के वक्त सिर्फ

काम नहीं कर सकती..?

बेसिर-पैर की बातें

दिमाग में लाना जरूरी है क्या....?

 

फुर्सत के समय में

सोचा कर ना यह सब !!

पर फुर्सत ही तो नहीं होती तेरे पास

सबेरे पाँच से

रात ग्यारह बजे तक

चकरघिन्नी की तरह

एक पैर पर घूमती रहती है,

 

सबकी जरूरतें,

सबकी हँसीं…खुशी….नाराजगी

सबका मन जानना….पहचानना…हँसाना…मनाना

लाड करना…दुलारना

कितना कुछ तो

करना होता है तुझे

तभी तो यह सब करते-करते भी

तू खो जाती है बार-बार निज में

खंगालती रहती है

 

मन के मटमैले पानी को

बुनती रहती है

अपनी इच्छाओं का पशमीना शॉल

रोटियाँ बेलते-बेलते तेरे मन में

जन्म लेती है कविता

हल्दी,धनियाँ,मिर्ची में

तुझे दिखते है प्रिज्म के सात रंग

दही जमाते-जमाते

खटास उतर आती है

 

तेरे शब्दों में

उँगलियों पर जले के निशान

भर देतें है तल्खी तेरे विचारों में.....

....................................

और तभी बह निकलती है......

कविता......किसी निर्झरिणी सी

कलकल...नाद को लिये...

 

डॉ.मालिनी गौतम

23 blogger-facebook:

  1. bahu sundar rachnaa..badhaaii swiikaaren..

    उत्तर देंहटाएं
  2. Malini ji,Kavita ke madhyam se sab kuch kag diya aapne.Dard jab pighal kar kalam ki nok par aata hai to esi hi kavita janm leti hai.
    Dr.Dinesh pathak shashi.Mathura.

    उत्तर देंहटाएं
  3. लड़कियां /महिलाएं कैसे लिखते है कवितायेँ ...
    उनके विचारों में चलती , डूबती , उतरती कविताओं की रोचक यात्रा !

    उत्तर देंहटाएं
  4. रविकर जी,डॉ. गुणशेखर जी,डॉ. दिनेश पाठक जी,आप सभी को कविता अच्छी लगी व आपने अपनी प्रतिक्रियाओं से अवगत कराया......इस हेतु मैं आप सब की आभारी हूँ...
    वीणा जी .....एक स्त्री होने के नाते इस यात्रा को आपसे बेहतर कौन समझ सकता है.....उत्साह बढ़ाने के लिये धन्यवाद......

    उत्तर देंहटाएं
  5. अच्छी है ये अलग तरह की किचन-कविता

    उत्तर देंहटाएं
  6. बहुत अच्छी प्रभावशाली कविता के लिये वधाई।

    उत्तर देंहटाएं
  7. वाह मैडम हकीकत को बयां करती कविता | हार्दिक बधाई |

    उत्तर देंहटाएं
  8. मालिनी जी,बहुत अच्छी और सत्यपरक कविता है|महिलाओं के लिए किचन ही रचनात्मक कार्यों की कार्यशाला होती है...बधाई|

    उत्तर देंहटाएं
  9. मालिनी जी, लड़की के जीवन को बड़ी बारीकी से व्याख्यायित किया है आपने...

    उत्तर देंहटाएं
  10. maalinee gautam ji ati sundar. ek naari ki subah se shaam tak ki thaka dene vaali vichaaron se takaraane vaali rachana. badhaai.

    उत्तर देंहटाएं
  11. बेनामी11:23 am

    Dr. Malini Gautam ki kavitan badi hi khub surat hain. hardik badhai.

    उत्तर देंहटाएं
  12. बेनामी11:28 am

    DR.Malini your poetry is excllent . Congratilation.

    उत्तर देंहटाएं
  13. आप सभी का बहुत-बहुत धन्यवाद ....अपनी अमूल्य प्रतिक्रियाओं से अवगत कराने के लिये.....

    उत्तर देंहटाएं
  14. शीर्षक इतनी मजबूत नहीं है कविता।

    उत्तर देंहटाएं
  15. rahul5:51 pm

    शयद लड़की बौराई है
    या उम्र से घबराई है
    पर छूकर देखिये
    उसके चंचल मन को
    कल किसी से वो शरमाई है

    उत्तर देंहटाएं
  16. ये सब तब होता है जब लड़की को किसी से प्यार होता है

    उत्तर देंहटाएं
  17. मालिनी जी आपकी कविता तो मुझे "निराला जी " की वो तोडती पत्थर की याद तारो ताज़ा कर गयी .............धन्यवाद्

    उत्तर देंहटाएं
  18. बेनामी8:16 pm

    ham kai lagai tum co kabita bout aacha laghta hai

    उत्तर देंहटाएं
  19. ram0052:26 pm

    wah madam wah kitne sundar dhang se ladki ke vicharo aur bhavo ko sabdo mei piroya hai....
    aap badhai ki patar hai. dhanyawad

    उत्तर देंहटाएं
  20. बहुत ही सुंदर कविता है मैडम

    उत्तर देंहटाएं

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