शुक्रवार, 30 सितंबर 2011

ज्योति चौहान की कविता - मैं हर हाल में खुश हूँ

ज्योति चौहान

मैं खुश हूं

जिन्दगी है छोटी,

मगर हर पल में खुश हूँ,

स्कूल में खुश हूं ,घर में खुश हूँ,

आज पनीर नहीं है, दाल में ही खुश हूँ

 

आज कार नहीं है, तो दो कदम चल के ही खुश हूँ

आज दोस्तों का साथ नहीं ,किताब पढ़के ही खुश हूँ

आज कोई नाराज है उसके इस अंदाज़ में भी खुश हूँ

जिसे देख नहीं सकती उसकी आवाज़ सुनकर ही खुश हूँ

 

जिसे पा नहीं सकती उसकी याद में ही खुश हूँ

बीता हुआ कल जा चुका है,

उस कल की मीठी याद में खुश हूँ

आने वाले पल का पता नहीं, सपनों में ही खुश हूँ

मैं हर हाल में खुश हूँ

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ज्योति चौहान

सेक्टर-२२, नॉएडा

jyotipatent@gmail.com

6 blogger-facebook:

  1. jyoti singh5:53 pm

    aapne bahut accha likha hai.is bhari puri duniya me hame har pal khus rahna chahiye...

    उत्तर देंहटाएं
  2. अगर सुख नहीं तो दुःख में ही खुश हूँ.
    ११ नहीं है तो १ में ही खुश हूँ.
    सच कहा है आपने ज्योति जी, अगर इन्सान हर परिश्थिति में खुश रहना सीख जाये तो यह संसार कितना सुन्दर हो जाये. बहुत खुबसूरत विचार है आपके.

    --
    --
    गौरव कुमार सोनी
    इंदौर

    उत्तर देंहटाएं
  3. बेनामी9:16 pm

    "जिसे पा नहीं सकती उसकी याद में ही खुश हूँ

    बीता हुआ कल जा चुका है,

    उस कल की मीठी याद में खुश हूँ

    आने वाले पल का पता नहीं, सपनों में ही खुश हूँ

    मैं हर हाल में खुश हूँ...."

    बहुत सुन्दर है आप की यह आदत ,इसे बनाये रखे !!

    मेरी शुभकामनाएं !!!!

    उत्तर देंहटाएं
  4. बेनामी1:34 pm

    apki kavita pdhakar sab khush honge yh andaj rakhne par me khush hu

    उत्तर देंहटाएं

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