गुरुवार, 22 सितंबर 2011

रामवीर भास्‍कर की कविता- अन्‍ना की आँधी

अन्‍ना की बस एक ही तमन्‍ना

भ्रष्‍टाचार मुक्त हो देश अपना।

 

एक ही जज्‍बा था जन-जन में

भ्रष्‍टाचार मुक्त का सपना हो पूरा।

 

न कोई पंगा, न कोई दंगा

लेकर तिरंगा, निकल पड़ी जनता।

 

जन-जन का बस एक ही नारा

मैं हूँ अन्‍ना, अन्‍ना हमारा।

 

जब अन्‍ना भक्त हो गये सख्‍त

सरकार के हौसले हो गये पस्‍त।

 

सरकार सकपका गई,

देख भीड़ जनता की भारी।

 

देख कर जन लोकपाल की शर्तें

भ्रष्‍टाचार में लिप्‍त नेता घबरा गये।

 

इसीलिए देकर अवैध करार

अन्‍ना को तिहाड़ जेल भिजवा दिया।

 

न डंडा, न तलवार,पहन अन्‍ना की टोपी

निकल पड़ी जनता की टोली।

 

देख अन्‍ना की आँधी ,भ्रष्‍टाचारी डरने लगे।

बचने के उपाय तलाशने लगे।

 

वन्‍दे मातरम की गूँज से सरकार मजबूर हो गई

आधी शर्तें मानने को सहमत हो गई।

 

 

तेरहवें दिन तोड़ अनशन,जनता का आह्‌वान किया

भ्रष्‍टाचार की मशाल यूँ ही जलती रहे

ताकि भ्रष्‍टाचारी डरते रहें,जनहित में कार्य करते रहें।

--

 

18,नार्थ अर्जुन नगर,

आगरा(उ.प्र.)

3 blogger-facebook:

  1. ye aandhi poore desh mai jari rahe v janta amal mai bhi laye tabhi sarthakata hai.
    Dr.Dinesh pathak shashi.

    उत्तर देंहटाएं
  2. सुन्दर प्रस्तुति |
    बधाई ||

    उत्तर देंहटाएं
  3. Kavita achchhi v sarthak hai.
    Somindra singh

    उत्तर देंहटाएं

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