शनिवार, 8 अक्तूबर 2011

अखिलेष श्रीवास्‍तव “छत्तीसगढ़़िया” की हास्य व्यंग्य कविता - भारतीय क्रिकेट टीम का इंग्‍लैण्‍ड दौरा-2011 (हास्‍य व्‍यंग्य और थोड़़ी सच्‍चाई)

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लौट के बुद्धू घर को आये

घुटने टेके सिर को झुकाये, गुलामों जैसा खेल दिखाये।
अंग्रेजों से मात खा गये, सभी मैचों को हार के आये।


इंसान समझकर भेजे थे, इंग्‍लैण्‍ड पहुँच गदहा कहलाये।
दहाड़़ते थे शेरों जैसे , पूँछ दबा कर भारत आये।


करोड़़ों रुपए कमाने वाले, सौ रुपये का खेल दिखाये।
कितनी पार्टी और उत्‍सव में, कन्‍याओं संग कमर हिलाये।


उसी का यह परिणाम है भाई, नौटंकी सा खेल दिखाये।
बैटिंग बालिंग बच्‍चों जैसी, उस पर हाथ पैर तुड़़वाये।


जान बची और लाखों पाये , लौट के बुद्धू घर को आये।

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संपर्क:-

विवेकानंद मार्ग-3 धमतरी (छत्तीसगढ़़)

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