रविवार, 2 अक्तूबर 2011

रवि गोहदपुरी की रचनाएँ

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गीत....

मैं हिन्‍दुस्‍तान की आवाज हॅूं...

मैं सीना ताने आगे बढ़ता जाउँ

झुकना मैंने सीखा नही आगे कदम बढाउँ

मैं टकरा जाउँ चट्टानों से

मैं तो खेलूं तूफानों से

खुले न कभी मैं वो राज हॅूं

मैं हिन्‍दुस्‍तान की आवाज हॅूं...

 

सरहद पे हम लड़ते भड़कते अगारों से

हम तो खेले जान पे अपनी तीर और तलवारों से

हरदम अपने वतन की हम लाज बचाते

भारत माँ के कदमों में हम अपना रक्‍त चढ़ाते

मैं भारत का वीर सिपाही इक जांबाज हॅूं

मैं हिन्दुस्‍तान की आवाज हॅूं...

 

गली से लेकर गाँव तक

गाँव से लेकर शहर तक

मेरा ही बोलवाला है

मैं बसता हॅूं हर भारतवासी में

हर इक भारतवासी

यहाँ हिम्‍मतवाला है

मैंने सबके सामने दोस्‍ती का हाथ बढाया

मैं ही शान्‍ति का आग़ाज हॅूं

मैं हिन्‍दुस्तान की आवाज हॅूं...

 

हमने दुनिया को सुर और साल सिखाया

हमने ही दुनिया को अहिंसा का मार्ग बताया

हमने गाई गीतों में सदा खुशहाली

हम तो दिल से मनाते होली और दिवाली

यहाँ कृष्‍ण की बांसुरी है सुर की माला

और तानसेन की धरती पर मैं ही सुर का साज हॅूं

मैं हिन्‍दुस्‍तान की आवाज हॅूं...

 

यहाँ हिन्‍दू -मुस्‍लिम सिक्‍ख-इसाई

सब है यहाँ पर भाई भाई

यहाँ भारत अनेकों में एक है

भारत नेकों में भी नेक है

मेरा देश है सोने की चिड़िया

मैं ही हिन्‍दुस्‍तान का नाज हॅूं

मैं हिन्‍दुस्‍तान की आवाज हॅूं...

...

कविता.......

हाय ये कसा कसा सा बदन तेरा

उपर नागिन सा लिपटा आँचल तेरा

सावन की मन भावन बरसात में

भीगा भीगा सा तन तेरा

 

तेरे सुर्ख पड़े गुलाबी होठों पर

तसव्वुर की कोमल बूंदें छाई हैं

तेरी ये कजरारी आँखें शायद

खुदा ने फुरसत में बनाई हैं

 

आज तो तेरी रेशमी जुल्‍फों के तले

बिस्तर लगा के सोने का मन है

तू मेरे आगोश में खो जाये

मेरा भी ये भीगा भीगा तन है

 

तुझे अपनी बाहों में भर लूं

ये अरमान दिल सजा रहे हैं

तुम्‍हारी कसम तुम्‍हें सनम

मेरा प्‍यार बुला रहा है

मेरे दिल में बस जाओ

मेरे गले से लग जाओ

...

कविता...

ऐसा हुनर है उनके हाथों में

लोहा भी छू ले सोना हो जाए

 

ऐसी सादगी है उनके चेहरे में

जो उनको देखे दीवाना हो जाए

 

आँखों से बरसे शबनम की बॅूंदें जैसे

होठों से छू ले तो मैखाना हो जाए

 

उनके रंग रुप का हर कोई कायल है

जिसको मिले वो वो परवाना हो जाए

 

रवि'को भी कोई अपने दिल में जगह दे

उसका भी जहाँ में ठिकाना हो जाए

 

...

कविता.....

काली काली तेरी आँखें इनमें काजल ना लगाया करो

जरा जुल्‍फें तो उठाओ चेहरे से यू जुल्‍फों से चेहरा ना छुपाया करो

 

ऐसी कातिल हैं तेरी निगाहें दिल को घायल करती हैं

मिलने दो नैना से नैना यू ना शरमाया करो

 

चिलमन तेरी आँखों की मुझे पागल कर देती हैं

यू मिलाके नजरे पलकें ना झुकाया करो

 

देखने दे हमें ये रुप सलोना

सावन की नशीली रातों में यू ना हमें तड़पाया करो

 

होने दे मिलन यू खुले गगन में

दो जिस्‍म एक जान हो जाये हम इसपे आँचल का साया ना करो

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रवि गोहदपुरी

गाँधी नगर वार्ड नं16

जिला-भिण्‍ड मध्‍यप्रदेश

पिन नं 477116

Email id-rpardesi6@gmail.com

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(चित्र - अमरेन्द्र {aryanartist@gmail.com  } फतुहा, पटना की कलाकृति)

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