सोमवार, 10 अक्तूबर 2011

प्रभुदयाल श्रीवास्तव का बाल-गीत - रसगुल्लों की चाहत ने बंद लड़ाई करवा दी


image

एक है गुल्ली एक है टुल्ली
दोनों ऊधम करती हैं
कितना भी डाँटो समझाओ
नहीं किसी से डरतीं हैं

टुल्ली है चुलबुल थोड़ी सी
गुल्ली सीधी सादी है
अक्सर चाय और बिस्कुट
देती उनको दादी है

आपस में दोनों लड़ती हैं
बाल खींचतीं आपस में
उनमें समझौता करवाना
नहीं किसी के था बस में|

मम्मी ने रसगुल्ले लाकर
रखे एक कटोरी में
भरकर लाई चाकलेट वह
एक छोटी सी बोरी में|

मम्मी बोली अब तुम दोनों
कभी न लड़ना आपस में
वरना चाकलेट रसगुल्ले
कर आऊंगी वापस मैं|

रसगुल्लों की चाहत ने
बंद लड़ाई करवा दी
चाकलेट रसगुल्लों से
दोनों की मुट्ठी भरवा दी|

2 blogger-facebook:

रचनाओं पर आपकी बेबाक समीक्षा व अमूल्य टिप्पणियों के लिए आपका हार्दिक धन्यवाद.

स्पैम टिप्पणियों (वायरस डाउनलोडर युक्त कड़ियों वाले) की रोकथाम हेतु टिप्पणियों का मॉडरेशन लागू है. अतः आपकी टिप्पणियों को यहाँ प्रकट होने में कुछ समय लग सकता है.

------------------------------------------------------------

प्रकाशनार्थ रचनाएँ आमंत्रित हैं...

1 करोड़ से अधिक पृष्ठ-पठन, 1.5 लाख गूगल+ अनुसरणकर्ता, 1500 से अधिक सदस्य

/ 2,500 से अधिक नियमित ग्राहक तथा 2000 से अधिक फ़ेसबुक प्रसंशक
/ प्रतिमाह 10,00,000(दस लाख) से अधिक पाठक
/ 10,000 से अधिक हर विधा की साहित्यिक रचनाएँ प्रकाशित
/ आप भी अपनी रचनाओं को इंटरनेट के विशाल पाठक वर्ग का नया विस्तार दें, आज ही नाका से जुड़ें. नाका में प्रकाशनार्थ रचनाओं का स्वागत है.किसी भी फ़ॉन्ट, टैक्स्ट, वर्ड या पेजमेकर फ़ाइल में रचनाएँ rachanakar@gmail.com पर ईमेल करें. अधिक जानकारी के लिए यह लिंक देखें - http://www.rachanakar.org/2005/09/blog-post_28.html

विश्व की पहली, यूनिकोडित हिंदी की सर्वाधिक प्रसारित, समृद्ध व लोकप्रिय ई-पत्रिका - नाका

मनपसंद रचनाएँ खोजकर पढ़ें
गूगल प्ले स्टोर से रचनाकार ऐप्प https://play.google.com/store/apps/details?id=com.rachanakar.org इंस्टाल करें. image

--------