गुरुवार, 13 अक्तूबर 2011

अखिलेष श्रीवास्‍तव “छत्तीसगढ़़िया” के चंद दोहे

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( 1 )

भारत में लाखों असली रावण, पर मरता है नकली रावण।

लाखों रावण मुस्‍काते हैं, जब जलता है नकली रावण॥

( 2 )

दो अक्‍टूबर को न मिले, उस चीज का नाम बतायें।

जुगाड़ कहीं से हो जाए , तो गाँधी जयंती मनायें॥

( 3 )

संसद के रक्षक मारे गए, अपराध बड़ा नहीं कहलाता।

एक भी सांसद मर जाता, तो अफजल फाँसी चढ़ जाता।

( 4 )

पश्चिमी सभ्‍यता संस्‍कृति के प्रेमी , कलंकित न करो त्‍योहारों को।

गरबा को पब, डिस्‍को न समझो , बख्श दो पावन त्‍योहारों को॥

( 5 )

हर चैनल बार-बार दिखलाए, शोएब की बकवास।

और दो कौड़ी की किताब को , बना दिया है खास॥

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संपर्क:

विवेकानंद मार्ग-3 धमतरी (छत्तीसगढ़)

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(चित्र - साभार - आशीष श्रीवास्तव)

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