शनिवार, 8 अक्तूबर 2011

धनंजय कुमार उपाध्याय की कविता - आतंकवाद

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आतंकवाद

ब्रिटिश शासन के अंत के बाद

स्वाधीन भारत में आतंकवाद

गहरे सदमे का यह प्रहार

नहीं झेल सकेगा अपना समाज

 

राजीव कांड में इसका हाथ

कश्मीर चाहता पृथक राष्ट्र

नागा और बोडो का विवाद

स्वाधीन भारत में आतंकवाद

 

नहीं रहेगी राजनीति में चहल-पहल

जब हो जायेगा इसका हल

करते है नेता आज-कल

नहीं निकलेगा इसका कोई हल

 

कश्मीर से कन्याकुमारी

गुजरात से लेकर अरुणाचल

चारों तरफ बस एक ही बात

स्वाधीन भारत में आतंकवाद

 

इस शासन पर है सबको घमंड

भारत का सबसे बड़ा है लोकतंत्र

जन्म से लेकर मृत्युपर्यंत

हम देख रहे है सिर्फ आतंक ही आतंक

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===धनंजय कुमार उपाध्याय===

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