एस. के. पाण्डेय की बाल कविता - चूहे की सीख

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चूहे की सीख

(१)

बिल्ली मौसी वापस जाओ ।

कभी दुबारा फिर मत आओ ।।

हमको अब न और सताओ ।

आज से मत तुम चूहा खाओ ।।

(२)

शाकाहारी अब बन जाओ ।

धर्म-कर्म में ध्यान लगाओ ।।

लोक गया परलोक बनाओ ।

समय और न ब्यर्थ गवाँओं ।।

(३)

जो हो रूखा-सूखा खाओ ।

चोरी से भी ध्यान हटाओ ।।

घूम-टहल के स्वास्थ्य बनाओ ।

बूढ़ी हो गई जरा लजाओ ।।

छोटा हूँ पर तुम्हें सिखाओं ।

सच-सच कहता मत गुस्साओ ।।

(४)

चूहा होकर हमें सिखाए ।

सुन-सुन बिल्ली अति खिसियाये ।।

भाग गई न वापस आई ।

रहता चूहा अति हर्षाई ।।

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डॉ. एस. के. पाण्डेय,

समशापुर (उ. प्र.) ।

URL: https://sites.google.com/site/skpandeysriramkthavali/

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