अदिति मजूमदार की कविता - शहर के एकांत में

--- विज्ञापन ---

----------- *** -----------

शहर के एकांत वीराने में

बैठी हूँ तुम्हारे इंतज़ार में

पतझड़ की सुबह सी मैं

इंतज़ार है हरियाली का

फूलों का फलों का

एकांत में कर रही इंतज़ार मैं

पिया तुम भूल कैसे गए मुझे

फूलों की खुशबू सी थी मैं

मैं शीलता, कोमलता थी

एकांत छोड़ चले गए मुझे?

कमरों की खाली दीवारें

पुकार रही है तुम्हें

चोरी से ही सही

तोड़ जाते एकांत की जंजीरें

शहर के इस भीड़ में

ढूंढ़ती फिरूं तुम्हें मैं

शहर के एकांत वीराने में

बैठी हूँ तुम्हारे इंतज़ार में

-----------------------------------

अदिति मजूमदार

--- विज्ञापन ---

----------- *** -----------

_____________________________________

0 टिप्पणी "अदिति मजूमदार की कविता - शहर के एकांत में"

एक टिप्पणी भेजें

रचनाओं पर आपकी बेबाक समीक्षा व अमूल्य टिप्पणियों के लिए आपका हार्दिक धन्यवाद.

स्पैम टिप्पणियों (वायरस डाउनलोडर युक्त कड़ियों वाले) की रोकथाम हेतु टिप्पणियों का मॉडरेशन लागू है. अतः आपकी टिप्पणियों को यहाँ प्रकट होने में कुछ समय लग सकता है.